RBI MPC बैठक से पहले इन 3 बैंकों ने किया FD के ब्याज दरों में बदलाव, जानें कहाँ मिल रहा कितना इंटरेस्ट?
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 5 अक्टूबर से शुरू होने वाली है। इससे पहले कई बैंकों ने फिक्स्ड डिपॉजिट के ब्याज दरों (FD Rates) में बदलाव किया है। इस लिस्ट में फेडरल बैंक, आरबीएल बैंक और जना स्मॉल फाइनेंस बैंक शामिल हैं। तीनों ने इसी सप्ताह नए इंटरेस्ट रेट्स लागू किए हैं। ध्यान रखें कि सभी बैंक समय-समय पर ब्याज दरों में संशोधन करते रहते हैं। इसलिए निवेश से पहले बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या नजदीकी शाखा विजिट करने की सलाह दी जाती है।
आरबीएल बैंक ने 1 अक्टूबर को एफडी के ब्याज दरों में बदलाव किया है। सामान्य नागरिकों को 3.50% से लेकर 7% ब्याज ऑफर कर रहा है। वरिष्ठ नागरिकों को 4% से लेकर 7.50% तक इंटरेस्ट मिल रहा है। सुपर सीनियर सिटीजंस (80 साल या इससे अधिक आयुवर्ग) को बैंक कम से कम 4.25% और अधिकतम 7.75% ब्याज ऑफर कर रहा है। अधिकतम ब्याज 18 महीने से लेकर 60 महीने से कम के मैच्योरिटी स्लैब पर मिल रहा है।
यहाँ चेक आरबीएल बैंक एफडी की ब्याज दरें
जना स्मॉल फाइनेंस बैंक
इस बैंक ने एफडी के लिए नई ब्याज दरें 29 सितंबर से लागू कर दी हैं। सामान्य नागरिकों को 7 दिन से लेकर 10 साल के टेन्योर पर 3 करोड़ रुपये से कम का निवेश करने पर 3.50% से लेकर 8% ब्याज मिल रहा है। वरिष्ठ नागरिकों को अधिकतम 8.30% रिटर्न मिल रहा है। सबसे ज्यादा रिटर्न 2 साल से लेकर 3 साल तक टेन्योर पर मिल रहा है। 3 साल से लेकर 5 साल तक के एफडी पर सामान्य नागरिकों को 7.77% और वरिष्ठ नागरिकों को 8% रिटर्न बैंक दे रहा है। 5 साल से अधिक और 10 साल तक के टेन्योर पर 7% ब्याज मिल रहा है।
फेडरल बैंक
प्राइवेट सेक्टर का फेडरल बैंक भी इस लिस्ट में शामिल है। नई दरें 29 सितंबर से लागू हैं। सबसे अधिक ब्याज 48 महीने के टेन्योर पर ऑफर कर रहा है। सामान्य नागरिकों के लिए न्यूनतम ब्याज 3% और अधिकतम 6.70% है। वरिष्ठ नागरिकों को 3.50% से लेकर 7.20% ब्याज मिल रहा है। 15 महीने के टेन्योर पर 7.05% और 15 महीने से लेकर 24 महीने तक के टेन्योर पर बैंक 7.15% ब्याज वरिष्ठ नागरिकों को दे रहा है।
बढ़ती बॉन्ड यील्ड से शेयर बाजार पर बढ़ा दबाव, एआई निवेश चक्र की मजबूती पर टिकी निवेशकों की नजर: जेफरीज
मुंबई, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के ग्लोबल इक्विटी रणनीतिकार क्रिस वुड ने कहा है कि अमेरिकी शेयर बाजार अब तक बढ़ती बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद मजबूत बना हुआ है। इसका मुख्य कारण मजबूत कॉरपोरेट आय और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ा निवेश उछाल रहा है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि अब इक्विटी बाजारों के लिए जोखिम बढ़ने लगे हैं, क्योंकि बॉन्ड यील्ड ऐसे स्तरों पर पहुंच रही है जो शेयरों के वैल्यूएशन पर दबाव डाल सकते हैं।
अपने साप्ताहिक न्यूजलेटर ग्रीड एंड फियर में क्रिस वुड ने कहा कि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में हालिया तेजी शेयर बाजारों के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम बिंदु बनती जा रही है। 10-वर्षीय अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड 5.34 प्रतिशत और 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5.69 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो वर्ष 2002 के बाद का उच्चतम स्तर है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का असर भारतीय बाजारों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। भारतीय शेयर बाजार लगातार आठवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ और अमेरिकी यील्ड में बढ़ोतरी निवेशकों की सतर्कता का एक प्रमुख कारण रही।
क्रिस वुड ने बताया कि ऐतिहासिक रूप से अमेरिकी शेयर बाजारों में मिड-टर्म चुनावों से पहले कमजोरी देखने को मिलती है और उसके बाद रिकवरी आती है। लेकिन इस बार यह पैटर्न स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दिया है, जिसकी बड़ी वजह कंपनियों की उम्मीद से बेहतर कमाई रही है।
उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट आय में मजबूती का एक बड़ा कारण एआई आधारित पूंजीगत व्यय का मौजूदा चक्र है। प्रौद्योगिकी कंपनियां एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं, जिससे उनकी आय और मुनाफे को समर्थन मिला है। इसी कारण अमेरिकी शेयर बाजार ऊंची ब्याज दरों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद अपेक्षाकृत मजबूत बने हुए हैं।
हालांकि, अब निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि एआई निवेश चक्र कितने समय तक जारी रह पाएगा। वुड का मानना है कि बाजार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि कंपनियां एआई पर किए जा रहे विशाल निवेश से पर्याप्त रिटर्न हासिल कर पाएंगी या नहीं।
उन्होंने कहा कि यदि एआई परियोजनाओं से अपेक्षित लाभ नहीं मिलता, तो मौजूदा निवेश चक्र की गति धीमी पड़ सकती है, जिसका असर तकनीकी कंपनियों की आय और शेयर बाजारों पर पड़ सकता है।
क्रिस वुड ने एक दूसरी बड़ी चिंता की ओर भी इशारा किया। उनके अनुसार, जी7 देशों के सरकारी बॉन्ड बाजार संरचनात्मक मंदी के दौर में हैं। लगातार ऊंची बनी हुई बॉन्ड यील्ड वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों को और सख्त कर सकती है।
जब बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है, तो निवेशकों के लिए फिक्स्ड इनकम एसेट्स अधिक आकर्षक हो जाते हैं। इससे इक्विटी बाजारों में निवेश का आकर्षण कम हो सकता है, विशेष रूप से तब जब बॉन्ड यील्ड में और बढ़ोतरी होती है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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