Responsive Scrollable Menu

Inside the debate over ‘gentle’ parenting and boundaries | BBC News

Government research suggests that around two thirds of parents with young children feel overwhelmed by the amount of parenting information available and struggle with conflicting advice, with many turning to social media for support. Faced with an array of parenting philosophies, or "brands" to choose from, is all of this advice helping parents or making them more anxious? And is there really a best way to parent? Or are we losing our own intuition as we strive to become the 'perfect' parent? Subscribe to our channel here: https://bbc.in/bbcnews For the latest news download the BBC News app or visit BBC.com/news #Parenting #BBCNews

Continue reading on the app

सूखे से जूझ रहा तेलंगाना, कविता ने पीएम मोदी से लगाई मदद की गुहार; 60 लाख किसानों के लिए उठाई आवाज

Telangana Drought: तेलंगाना में गहराते सूखे के संकट और फसलों की बर्बादी ने किसानों की कमर तोड़ दी है. इस विकट परिस्थिति को देखते हुए तेलंगाना राष्ट्र समिति की वरिष्ठ नेता के कविता ने केंद्र सरकार के पाले में गेंद डाल दी है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधी अपील करते हुए कहा है कि वह तेलंगाना के करीब 60 लाख अन्नदाताओं के जीवन की रक्षा के लिए आगे आएं. राज्य में बारिश न होने और सूखे के कारण हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं. किसानों की फसलें खेतों में ही सूख रही हैं और भूजल स्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है. ऐसे कठिन समय में किसानों को उबारने के लिए केंद्र सरकार की ओर से तत्काल राहत पैकेज और मुफ्त बिजली की बेहद जरूरत है.

राज्य सरकार पूरी तरह नाकाम, मुख्यमंत्री ने मानी हार

बंजारा हिल्स स्थित पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए के कविता ने राज्य प्रशासन के रवैये पर कड़ा रोष जताया. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि राज्य सरकार इस गंभीर आपदा से निपटने में पूरी तरह विफल साबित हुई है. आसपास के राज्यों जैसे महाराष्ट्र और कर्नाटक ने अपने यहां सूखे की स्थिति को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है. वहां सूखा प्रभावित क्षेत्रों की विधिवत घोषणा की गई है ताकि नियमों के तहत केंद्र से वित्तीय और अन्य सहायता तुरंत हासिल की जा सके.

इसके विपरीत तेलंगाना सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही और उसने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया. कविता ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे राज्य के मुख्यमंत्री ने अपनी हार स्वीकार कर ली है. जब नीतियां बनाने और राहत पहुंचाने का समय था, तब सरकार ने किसानों को भगवान भरोसे छोड़ दिया.

सुपर अल नीनो की मार और 24 घंटे मुफ्त बिजली की दरकार

जलवायु में आए वैश्विक बदलावों का जिक्र करते हुए कविता ने बताया कि इस बार सुपर अल नीनो के प्रभाव से मौसम चक्र पूरी तरह बिगड़ चुका है. देश के कुछ उत्तरी और तटीय हिस्सों में जहां जरूरत से ज्यादा बारिश और बाढ़ की स्थिति बनी, वहीं दक्षिण भारत के बड़े हिस्से में बादल बरसे ही नहीं. उन्होंने कहा कि तेलंगाना समेत आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र के किसान इस समय सूखे की दोहरी मार झेल रहे हैं.

किसानों को अपनी बची हुई फसलों को बचाने के लिए बोरवेल चलाने पड़ रहे हैं, लेकिन बिजली की किल्लत उनके रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा बन गई है. उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि देश के जिन राज्यों में अतिरिक्त बिजली उपलब्ध है, वहां से बिजली का प्रबंध कर तेलंगाना को दिया जाए. किसानों को 24 घंटे मुफ्त बिजली उपलब्ध कराना अब कोई सुविधा नहीं बल्कि उनकी जिंदगी और मौत से जुड़ा सवाल बन चुका है.

वरुण यज्ञ पर कटाक्ष और केंद्र को जनता की चेतावनी

बारिश की आस में राज्य सरकार द्वारा कराए जा रहे अनुष्ठानों पर भी कविता ने तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए पूजा पाठ का सहारा ले रही है. मुख्यमंत्री को अपनी पूजा और वरुण यज्ञ जारी रखने चाहिए, लेकिन जमीन पर जूझ रहे लाखों किसानों को केवल दुआओं के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता. उन्होंने स्पष्ट किया कि तेलंगाना के गठन के बाद से राज्य को केंद्र से उस अनुपात में विशेष मदद नहीं मिली जिसका वह हकदार था. यदि इस नाजुक समय में भी किसानों की अनदेखी की गई, तो राज्य की जनता और किसान केंद्र सरकार को कभी माफ नहीं करेंगे. संकट की इस घड़ी में संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत केंद्रीय दल को जमीन पर भेजना चाहिए ताकि नुकसान का सही आकलन हो सके.

पेपर लीक और संस्थागत सुधारों पर दो टूक

पत्रकारों से चर्चा के दौरान कविता ने युवाओं से जुड़े मुद्दों और देश में बार-बार हो रहे पेपर लीक के मामलों पर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि आज का नौजवान सड़कों पर उतरकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहा है, जिसकी वह सराहना करती हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी एक मंत्री या अधिकारी के इस्तीफे से ऐसी गहरी समस्याओं का समाधान नहीं होने वाला है. जब तक पूरी व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव नहीं किया जाएगा और परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक युवाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता.

इसी तरह मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांगों पर उन्होंने कहा कि केवल चेहरे बदल देने से व्यवस्था पारदर्शी नहीं बनती. पूरी चुनाव प्रक्रिया को अधिक भरोसेमंद बनाने की जरूरत है और इस दिशा में मतपत्र यानी पेपर बैलेट से चुनाव कराना एक अधिक सुरक्षित और बेहतर उपाय साबित हो सकता है.

यह भी पढ़ें: तेलंगाना एसीबी ने एनआईएमएस के अतिरिक्त अधीक्षक से जुड़े परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया

Continue reading on the app

  Sports

Wasim Jaffer का दावा Virat Kohli के बाद ODI में No 3 पर Tilak Varma बनेंगे मजबूत विकल्प

भारतीय क्रिकेट टीम में विराट कोहली के बाद नंबर 3 की जिम्मेदारी किस बल्लेबाज को मिलेगी, इसे लेकर अभी से चर्चा शुरू हो गई है। पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर का मानना है कि तिलक वर्मा इस भूमिका के लिए एक मजबूत विकल्प बन सकते हैं। उनका कहना है कि तिलक में अलग-अलग क्रम पर बल्लेबाजी करने और परिस्थिति के हिसाब से अपना खेल बदलने की अच्छी क्षमता है।

बता दें कि विराट कोहली ने साफ कर दिया है कि 2027 का वनडे विश्व कप भारत के लिए उनका आखिरी विश्व कप होगा। ऐसे में भारतीय टीम को लंबे समय से नंबर 3 पर बल्लेबाजी कर रहे कोहली का विकल्प तैयार करना होगा। कोहली ने इस स्थान पर करीब 15 साल तक टीम को मजबूती दी है और उनके जाने के बाद शीर्ष क्रम में एक बड़ी जगह खाली होने वाली है।

वसीम जाफर ने अपने यूट्यूब चैनल पर तिलक वर्मा की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि तिलक पहले नंबर 3 पर शतक लगा चुके हैं और इसके बाद टी20 क्रिकेट में नंबर 5 और नंबर 6 पर भी अच्छी तरह से बल्लेबाजी कर चुके हैं। जाफर के मुताबिक, एक बल्लेबाज के लिए अलग-अलग क्रम पर सफलतापूर्वक खेलना बड़ी खूबी है और तिलक में यह क्षमता नजर आती है।

गौरतलब है कि जाफर ने भारतीय टीम के भविष्य के शीर्ष क्रम को लेकर एक और संभावना भी सामने रखी है। उनका मानना है कि रोहित शर्मा और विराट कोहली के जाने के बाद भारत के शीर्ष क्रम में बाएं हाथ के बल्लेबाजों की मौजूदगी बढ़ सकती है। रोहित शर्मा की जगह यशस्वी जायसवाल को सलामी बल्लेबाज के रूप में देखा जा सकता है, जबकि कोहली की जगह तिलक वर्मा जैसे बाएं हाथ के बल्लेबाज को मौका मिल सकता है।

जाफर ने तिलक की प्रथम श्रेणी क्रिकेट में बल्लेबाजी का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, तिलक का प्रथम श्रेणी क्रिकेट में औसत करीब 55 का है और वह तीनों प्रारूपों में आसानी से अपनी जगह बनाने की क्षमता रखते हैं। घरेलू क्रिकेट में उनका प्रदर्शन इस बात का संकेत देता है कि उनके पास लंबी पारी खेलने की तकनीक भी मौजूद है।

हालांकि, तिलक के सामने सबसे बड़ी चुनौती वनडे क्रिकेट में अनुभव की कमी है। उन्होंने भारत के लिए अब तक केवल 4 वनडे मुकाबले खेले हैं। इनमें उन्होंने 2 बार नंबर 3, जबकि 1-1 बार नंबर 4 और नंबर 5 पर बल्लेबाजी की है। इन मुकाबलों में उन्होंने कुल 68 रन बनाए हैं और उनका औसत 22.67 रहा है।

तिलक का आखिरी वनडे मुकाबला दिसंबर 2025 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आया था। उसी सीरीज में रुतुराज गायकवाड़ ने नंबर 4 पर बल्लेबाजी करते हुए शतक भी लगाया था। ऐसे में नंबर 3 के लिए तिलक अकेले दावेदार नहीं होंगे और टीम प्रबंधन को आने वाले समय में कई खिलाड़ियों को आजमाने का मौका मिल सकता है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, कोहली की जगह भरना किसी भी बल्लेबाज के लिए आसान नहीं होगा। नंबर 3 पर भारत को सिर्फ रन बनाने वाला खिलाड़ी नहीं, बल्कि दबाव में पारी संभालने और जरूरत के मुताबिक तेजी से रन बनाने वाला बल्लेबाज चाहिए। कोहली ने वर्षों तक यह भूमिका निभाई है और उनके जाने के बाद टीम को ऐसा विकल्प तैयार करना होगा जो लंबे समय तक इस जिम्मेदारी को निभा सके।

ऐसे में तिलक वर्मा के लिए आने वाले वनडे मुकाबले बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। अगर वह घरेलू क्रिकेट और सीमित मौकों पर लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो 2027 विश्व कप के बाद भारतीय वनडे टीम में नंबर 3 की जगह के लिए उनका दावा मजबूत हो सकता है।

Sun, 04 Oct 2026 21:39:00 +0530

  Videos
See all

Bihar News : JDU पर तेजस्वी यादव का कटाक्ष ! #tejashwiyadav #tejashwiyadavnews #ytshorts #shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-04T16:33:20+00:00

Kehke Rahega Kehne Wala: Abhijeet ने खोली Music Industry की पोल! | Kishore Ajwani #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-04T16:34:53+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers