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हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट क्या अंतर है? जानिए इसके लक्षण और तुरंत बचाव के उपाय

नई दिल्ली, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। कभी-कभी हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षणों पर ध्यान न देना आसान होता है, खासकर तब जब लक्षण धीरे-धीरे शुरू हों या आते-जाते रहें। नए या असामान्य लक्षणों को गंभीरता से लेना और जल्द मदद लेना जरूरी हो सकता है।

लोग अक्सर हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट शब्दों का इस्तेमाल एक-दूसरे की जगह पर करते हैं, लेकिन ये दोनों एक ही चीज नहीं हैं। ज्यादातर हार्ट अटैक से कार्डियक अरेस्ट नहीं होता है। लेकिन जब कार्डियक अरेस्ट होता है, तो हार्ट अटैक इसका एक आम कारण होता है। दूसरी समस्याओं की वजह से भी दिल धड़कना बंद कर सकता है।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक, कार्डियक अरेस्ट में दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है। ऐसा आमतौर पर किसी इलेक्ट्रिकल समस्या के कारण होता है जिससे दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है। जब दिल पंप करना बंद कर देता है, तो वह दिमाग, फेफड़ों और शरीर के अन्य जरूरी अंगों तक खून नहीं पहुंचा पाता। कार्डियक अरेस्ट होने पर व्यक्ति कोई प्रतिक्रिया नहीं देता। हो सकता है कि उनकी सांस रुक जाए या वे सिर्फ हांफने लगें। अगर उन्हें तुरंत मदद न मिले, तो उनकी मौत हो सकती है।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने बताया कि अगर किसी को कार्डियक अरेस्ट हो जाए, तो तुरंत सीपीआर देने से उनके बचने की संभावना दोगुनी या तिगुनी हो सकती है। सबसे पहले, स्थानीय इमरजेंसी नंबर पर कॉल करें। फिर सीपीआर शुरू करें। अगर आस-पास ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (एईडी) है, तो जितनी जल्दी हो सके उसका इस्तेमाल करें। अगर दो लोग मदद कर रहे हैं, तो एक को सीपीआर शुरू करना चाहिए। दूसरे को इमरजेंसी कॉल करना चाहिए और एईडी ढूंढना चाहिए। हर मिनट कीमती है। बिना मदद के हर मिनट बचने की संभावना 10 फीसदी कम हो जाती है। इमरजेंसी स्टाफ़ भी ऐसे व्यक्ति को बचाने में मदद कर सकता है जिसका दिल धड़कना बंद हो गया हो।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक, हार्ट अटैक में दिल के किसी हिस्से तक खून नहीं पहुंच पाता, क्योंकि खून सप्लाई करने वाली कोई मुख्य नस ब्लॉक हो जाती है। अगर खून के बहाव की इस समस्या को जल्दी ठीक नहीं किया जाता, तो दिल का वह हिस्सा जिसे पर्याप्त खून नहीं मिल रहा है, उसकी कोशिकाएं नष्ट होना शुरू हो सकती हैं। हार्ट अटैक के लक्षण अचानक दिख सकते हैं। हार्ट अटैक में सीने में तेज दर्द, शरीर के ऊपरी हिस्से के दूसरे हिस्सों में बेचैनी, सांस लेने में तकलीफ, ठंडा पसीना आना, जी मिचलाना या उल्टी जैसा महसूस होता है। कभी-कभी, लक्षण धीरे-धीरे शुरू होते हैं और घंटों या दिनों तक बने रहते हैं।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने बताया कि कार्डियक अरेस्ट के उलट, हार्ट अटैक के दौरान दिल आमतौर पर धड़कता रहता है। मदद मिलने में जितनी ज्यादा देर होती है, दिल के लिए उतना ही अधिक खतरा होता है। हार्ट अटैक किसी को भी हो सकता है। महिलाओं, डायबिटीज वाले लोगों और बुजुर्गों में लक्षण साफ तौर पर दिखाई नहीं दे सकते हैं। उदाहरण के लिए, हो सकता है कि उनमें सीने का दर्द न हो। अगर आपको पक्का नहीं है कि यह हार्ट अटैक है, तब भी अपने लोकल इमरजेंसी नंबर पर कॉल करें। हर मिनट कीमती है!

सबसे अच्छा यही है कि आप अपने लोकल इमरजेंसी नंबर पर कॉल करें ताकि तुरंत इमरजेंसी रूम पहुंच सकें। इमरजेंसी मेडिकल सर्विस कर्मचारी पहुंचते ही इलाज शुरू कर सकते हैं। एम्बुलेंस से आने वाले सीने में दर्द के मरीजों को अस्पताल में आमतौर पर जल्दी इलाज भी मिलता है।

--आईएएनएस

ओपी/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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इन लक्षणों को मामूली समझने की गलती पड़ सकती है भारी, हो सकता है स्ट्रोक का शुरुआती संकेत

नई दिल्ली, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर सिरदर्द, चक्कर आना, हाथ-पैरों में कमजोरी या अचानक संतुलन बिगड़ने जैसी समस्याओं को थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शरीर में अचानक दिखाई देने वाले ये बदलाव संभावित स्ट्रोक यानी ब्रेन अटैक के संकेत भी हो सकते हैं? स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें समय पर इलाज न मिलने पर व्यक्ति की जान तक जा सकती है। इसलिए जरूरी है कि शरीर के इन संकेतों को समझें और लापरवाही करने से बचें।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, हृदय संबंधी बीमारियां दुनियाभर में मौत का सबसे बड़ा कारण हैं। साल 2022 में करीब 1.98 करोड़ लोगों की मौत हृदय संबंधी बीमारियों के कारण हुई, जिनमें लगभग 85 प्रतिशत मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक की वजह से थीं। स्ट्रोक तब होता है, जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में खून की आपूर्ति रुक जाती है या मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाती है। ऐसी स्थिति में दिमाग की कोशिकाओं को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और वे क्षतिग्रस्त होने लगती हैं।

स्ट्रोक का सबसे आम लक्षण चेहरे, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी आना है। खासतौर पर शरीर के एक तरफ कमजोरी महसूस होना खतरे का संकेत हो सकता है। कई बार व्यक्ति का चेहरा एक तरफ झुकने लगता है या मुस्कुराने पर चेहरे के दोनों हिस्से सामान्य तरीके से काम नहीं करते। इसके अलावा अचानक बोलने में परेशानी होना, जुबान लड़खड़ाना या सामने वाले की बात समझने में दिक्कत होना भी स्ट्रोक के लक्षण हो सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति को अचानक एक या दोनों आंखों से धुंधला दिखाई देने लगे, चलने में परेशानी हो या शरीर का संतुलन बिगड़ जाए, तो इसे सामान्य चक्कर या कमजोरी समझकर टालना नहीं चाहिए।

कुछ मामलों में बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक बहुत तेज सिरदर्द भी स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। इसके साथ उल्टी, बेहोशी या शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन महसूस हो सकता है। कई बार ये लक्षण कुछ मिनटों में अपने आप ठीक भी हो जाते हैं, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि खतरा टल गया है। यह मिनी स्ट्रोक यानी ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (टीआईए) हो सकता है, जो भविष्य में बड़े स्ट्रोक की चेतावनी देता है।

स्ट्रोक का खतरा कई कारणों से बढ़ सकता है। अस्वस्थ खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी, तंबाकू का सेवन, अत्यधिक शराब पीना और मोटापा इसके प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल भी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना और अपनी जीवनशैली में सुधार करना बेहद जरूरी है।

डब्ल्यूएचओ का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति में अचानक स्ट्रोक के लक्षण दिखाई दें, तो बिना देर किए उसे अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचाएं या एंबुलेंस बुलाएं। लक्षण शुरू होने का समय नोट करना भी जरूरी है, क्योंकि इलाज के दौरान यह जानकारी काफी मददगार होती है। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा न दें।

--आईएएनएस

पीआईएम/एएस

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