भारतीय घरों में मीठा खाने के शौकीन लोगों की कमी नहीं है। खाना खाने के बाद मीठा खाने के लिए होना ही चाहिए। तो वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो अपना मन मारकर रह जाते हैं। यह बात तो हम सभी जानते हैं कि मिठाई में कैलोरी की मात्रा काफी होती है। इसलिए बहुत से लोग वजन बढ़ने के डर से मीठा नहीं खा पाते हैं। ऐसे में आप चाहें तो घर पर लौकी की बर्फी बनाकर खा सकती हैं। इसके लिए न तो आपको दूध की जरूरत होगी और न ही मावा की। आप इसको आसानी से बनाकर तैयार कर सकती हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको लौकी की बर्फी की रेसिपी के बारे में बताने जा रहे हैं।
सामग्री
लौकी - 500 ग्राम
घी - दो बड़े चम्मच
डेसिकेटेड कोकोनट (सूखा नारियल पाउडर) - एक कप
मिल्क पाउडर - आधा कप
गुड़ - एक कप या स्वादानुसार
थोड़ा सा घी ग्रीस करने के लिए
कटे हुए ड्राई फ्रूट्स - 3 से 4 बड़े चम्मच
ऐसे बनाएं लौकी की बर्फी
सबसे पहले लौकी को अच्छे से धो लें और फिर कद्दूकस कर लें। लौकी का बीज वाला हिस्सा निकाल दें और फिर एक कड़ाही को गैस पर चढ़ा दें। अब कढ़ाही में 2 बड़े चम्मच घी डालकर गर्म करें। अब कद्दूकस की हुई लौकी कड़ाही में डालें और स्लो आंच पर भूनें। इसको तब तक भूनना है, जब तक कि इसका पानी न सूख जाए। जब लौकी अच्छे से भुन जाए, तो इसमें गरी का बुरादा डालकर मिलाएं। इसके बाद इसमें कटे हुए ड्राई फ्रूट्स और मिल्क पाउडर मिलाएं।
इन सभी चीजों को चलाते हुए मिक्स कर लें। फिर गुड़ को तोड़कर या कद्दूकस करके डालें। अब इसको लगातार चलाते हुए भूनें। इसको तब तक चलाते हुए पकाएं, जब तक कि यह गाढ़ा होकर जमने वाला न हो जाए। जब यह मिश्रण गाढ़ा होने लगे, तो एक प्लेट में हल्का सा घी लगाकर उसमें मिश्रण को निकाल लें। साथ ही चम्मच से चलाते हुए इसको प्लेट में बराबर फैला लें।
फिर इसको करीब 2 घंटे के लिए सेट होने के लिए रख दें। जब यह बर्फी अच्छे से सेट हो जाए, तो ऊपर से ड्राई फ्रूट्स डालें। फिर इसको अपनी पसंद के हिसाब से शेप में काट लें। इस तरह से बिना चीनी और दूध वाली लौकी की टेस्टी बर्फी बनकर तैयार है।
इन बातों का रखें ख्याल
लौकी की बर्फी बनाते समय लौकी का पानी अच्छे से सुखाना जरूरी है।
गुड़ डालने के बाद इसके मिश्रण को लगातार चलाते रहें।
गुड़ आप अपने हिसाब से ज्यादा या फिर कम कर सकती हैं।
दो दिन में लौकी की बर्फी को खाकर खत्म कर दें।
यह बर्फी तैयार होने के बाद इसको फ्रिज में रखें।
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क्या आप भी iPhone छोड़कर Android स्मार्टफोन खरीदने का प्लान कर रहे हैं, तो अब बिना किसी दिक्कत के मिनटों में पूरा डेटा ट्रांसफर किया जा सकता है। ऐसे में गूगल ने आपके कार्य को और भी आसान कर दिया है। दरअसल, Android 17 के साथ कंपनी ने एक नया माइग्रेशन सिस्टम पेश किया है। इसकी मदद से आसानी से iPhone का डेटा, Android फोन में ट्रांसफर किया जा सकता है। खासकर अब आपको इसके लिए किसी थर्ड-पार्टी-एप्स की जरुरत नहीं है।
आपको बताते चलें कि, गूगल ने बताया है कि Android 17 में शामिल नया डेटा ट्रांसफर फीचर सेटअप प्रक्रिया के दौरान ही काम किया जा सकता है। इसका सीधा अर्थ यही है कि नया Android फोन चालू करते समय यूजर्स सीधे तौर पर अपने iPhone से जरुरी डेटा वायरलेस तरीके से कॉपी कर सकते हैं।
क्या-क्या डेटा कर पाएंगे ट्रांसफर?
- सबसे पहले आप सिर्फ फोटो, कॉन्टैक्ट्स और मैसेज जैसी सहित जानकारी ट्रांसफर की जा सकती थी, वही अब यह सुविधा काफी विस्तृत हो गई है। Android 17 के मध्यम से गूगल अकाउंट से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां नए फोन में लेकर आ सकते हैं।
- वहीं, आप Google अकाउंट डिटेल्स, सेव किए सभी पासवर्ड, Wi-Fi नेटवर्क के पासवर्ड और eSIM से संबंधित सभी जानकारी शामिल है। इससे नया फोन सेटअप करने में काफी समय लग सकता है और मेहनत की बचत होगी।
फिलहाल चुनिंदा डिवाइस पर मिल रहा है फीचर
गूगल ने यह भी कहा है कि, यह सिर्फ नए माइग्रेशन सिस्टम की शुरुआत अभी सीमिक डिवाइसों से की जा रही है। लेकिन, यह Android 17 का हिस्सा है और आने वाले समय में अन्य समर्थित स्मार्टफोन्स पर भी उपलब्ध करा दिया जाएगा। इसके बाद यूजर्स अपने पुराने iPhone की सेटिंग्स और जरुरी डेटा को आसानी से नए एंड्रॉयड फोन में ले जा सकते हैं।
ऐसे करेगा काम नया माइग्रेशन सिस्टम
- वही, आप नया Android 17 डिवाइस सेट करेंगे, तो आपको iPhone या iPad से डेटा कॉपी करने का ऑप्शन नजर आएगा। इस ऑप्शन को चुनते ही Android फोन एक QR Code जनरेट होगा। iPhone से उस QR Code को स्कैन करने पर दोनों डिवाइसों के बीच वायरलेस कनेक्शन स्थापित होगा।
- जिसके बाद यूजर अपनी जरुरत के अनुसार, तय कर पाएंगे कि कौन-सा डेटा नए फोन में ट्रांसफर करना है। Google ने यह भी कहा है कि डेटा ट्रांसफर शुरु करने से पहले दोनों डिवाइस पूरी तरह चार्ज हों, एक ही Wi-Fi नेटवर्क से संबंधित हो और नए Android फोन में पर्याप्त स्टोरेज उपलब्ध हो। अगर स्टोरेज कम होगी, तो डेटा ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी नहीं होगी।
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