रेगिस्तानी लोमड़ी भूल जाइए, ये है माइनस डिग्री तापमान को मात देने वाली 'हिल फॉक्स'
जम्मू-कश्मीर के ऊंचे पहाड़ों वाले इलाके जोजिला दर्रा (Zojila Pass) में हाल ही में एक बहुत ही दुर्लभ नजारा देखने को मिला. यहां एक 'हिमालयन रेड फॉक्स' यानी लाल लोमड़ी को बर्फ में चलते हुए देखा गया है. स्थानीय लोगों और वाइल्डलाइफ लवर्स ने इस शर्मीले शिकारी की तस्वीरें और वीडियो अपने कैमरे में कैद किए हैं. सिर्फ जोजिला ही नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में मौजूद मशहूर पाराशर झील के पास भी इस खूबसूरत लोमड़ी को देखा गया है.
इकोसिस्टम के लिए अच्छी खबर
जानकारों की मानें तो हिमालयन रेड फॉक्स का दिखना इस बात का सबूत है कि वहां का पर्यावरण (Ecosystem) अभी भी स्वस्थ है. ये लोमड़ी छोटे चूहों और जीवों का शिकार करके पहाड़ों के घास के मैदानों में कुदरती बैलेंस बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाती है. इसे 'हिल फॉक्स' के नाम से भी जाना जाता है और यह अक्सर इंसानों की नजरों से दूर ऊंचे इलाकों में ही रहना पसंद करती है.
क्यों नीचे आ रही हैं ये लोमड़ियां?
हिमालयन रेड फॉक्स अक्सर रात के अंधेरे में एक्टिव रहती है, इसलिए इसे दिन में देख पाना काफी मुश्किल होता है. लेकिन मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पहाड़ों पर हो रही भारी बर्फबारी और बदलता क्लाइमेट इन्हें निचले इलाकों की तरफ आने पर मजबूर कर रहा है. खाने की तलाश और ठंड से बचने के लिए ये जीव अब उन रास्तों पर भी नजर आने लगे हैं जहां इंसानों की आवाजाही होती है.
बर्फ के लिए खास बनावट
अगर इसकी तुलना गुजरात के रेगिस्तान में मिलने वाली लोमड़ी से करें, तो हिमालयन रेड फॉक्स काफी अलग दिखती है. ठंड से बचने के लिए इसके शरीर पर बहुत ही घना और गहरे नारंगी-राखी रंग का फर (बाल) होता है. यह मोटा फर इसे माइनस डिग्री तापमान और बर्फीली हवाओं से बचाता है, जो कुदरत का एक कमाल का करिश्मा है.
बचाव है बेहद जरूरी
हालांकि इन दुर्लभ लोमड़ियों का दिखना खुशी की बात है, लेकिन एक्सपर्ट्स इसे एक चेतावनी भी मान रहे हैं. पहाड़ों में बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप और मौसम में आ रहे बदलाव इन प्रजातियों के लिए खतरा बन सकते हैं. इन दुर्लभ जीवों को बचाने के लिए अब हमें हिमालय की बर्फीली वादियों और वहां के प्राकृतिक संतुलन को संभाल कर रखने की सख्त जरूरत है.
#WATCH | J&K: Himalayan red fox was sighted in the Zojila Pass, highlighting the rich and diverse wildlife of the area. pic.twitter.com/qwpd272GEp
— ANI (@ANI) January 30, 2026
उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने फ्रांसीसी परिवहन मंत्री से मुलाकात की, हवाई कनेक्टिविटी के द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा
नई दिल्ली, 30 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू ने फ्रांस के परिवहन मंत्री फिलिप टाबारोट के नेतृत्व में आए फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की।
यह बैठक फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत की आगामी राजकीय यात्रा से ठीक पहले हुई है। मंत्री राम मोहन नायडू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इस मुलाकात की जानकारी साझा की और इसे सम्मान की बात बताया।
राम मोहन नायडू ने लिखा, फ्रांस के राष्ट्रपति की राजकीय यात्रा से पहले, परिवहन मंत्री फिलिप टाबारोट के नेतृत्व में फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल से मिलकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं। हमने भारत और फ्रांस के बीच लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
नायडू ने लिखा, मैंने शहरीकरण की चुनौतियों और कनेक्टिविटी की तेजी से बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए एसएएफ (सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल) और उन्नत एयर मोबिलिटी जैसी भविष्य की तकनीकों के लिए द्विपक्षीय सहयोग पर विशेष रूप से जोर दिया।
उन्होंने पीएम मोदी के नेतृत्व की तारीफ करते हुए आगे लिखा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत एक मजबूत वैश्विक विमानन शक्ति बनने की आकांक्षा रखता है, इसलिए फ्रांस के साथ हमारी साझेदारी का एक प्रमुख स्तंभ एक मजबूत विमानन कौशल और प्रशिक्षण इकोसिस्टम का विकास होगा।
यह मुलाकात भारत-फ्रांस के बीच विमानन क्षेत्र में बढ़ते सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी दशकों पुरानी है, जिसमें राफेल लड़ाकू विमान, सिविल एविएशन और स्पेस तकनीक शामिल हैं।
हाल के वर्षों में भारत की नागरिक उड्डयन बाजार दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन गई है। 2026 में विंग्स इंडिया इवेंट में फ्रांस सहित 20 देशों के प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए, जहां हवाई कनेक्टिविटी, सस्टेनेबिलिटी और एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल) पर चर्चा हुई।
मंत्री ने विशेष जोर दिया कि सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (एसएएफ) और एडवांस्ड एयर मोबिलिटी (जैसे ई-वीटीओएल और ड्रोन-आधारित शहरी हवाई परिवहन) पर सहयोग से शहरीकरण की चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। एसएएफ जीवाश्म ईंधन का पर्यावरण-अनुकूल विकल्प है, जो विमानन उत्सर्जन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
--आईएएनएस
एससीएच
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