भारत का राजकोषीय घाटा अप्रैल-दिसंबर अवधि में बजट लक्ष्य का 54.5 प्रतिशत रहा
नई दिल्ली, 30 जनवरी (आईएएनएस)। भारत का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 26 के पहले नौ महीनों (अप्रैल-दिसंबर अवधि में) में 8.55 लाख करोड़ रुपए रहा है। यह बजट 2025 में चालू वित्त वर्ष के लिए निर्धारित किए गए लक्ष्य का 54.5 प्रतिशत है। यह जानकारी वित्त मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को जारी किए गए डेटा से प्राप्त हुई।
राजकोषीय घाटा पिछले साल इसी अवधि में पूरे वित्त वर्ष के लक्ष्य का 56.7 प्रतिशत था।
चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों के दौरान कुल प्राप्तियां 25.25 लाख करोड़ रुपए रहीं, जो पूरे वर्ष के लक्ष्य का 72.2 प्रतिशत है, जबकि अप्रैल से दिसंबर तक कुल व्यय 33.81 लाख करोड़ रुपए रहा, जो इस वित्त वर्ष के बजट लक्ष्य का 66.7 प्रतिशत है।
पिछले वर्ष की इसी अवधि में कुल प्राप्तियां अनुमानित लक्ष्य का 72.3 प्रतिशत थीं, जबकि व्यय 67 प्रतिशत था।
चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों के दौरान शुद्ध कर प्राप्तियां 19.4 लाख करोड़ रुपये रहीं, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में एकत्रित 18.4 लाख करोड़ रुपए से अधिक हैं।
गैर-कर राजस्व बढ़कर 5.4 लाख करोड़ रुपए हो गया, जो पिछले वित्तीय वर्ष की इसी अवधि में 4.5 लाख करोड़ रुपए था।
कुल सरकारी व्यय पिछले वर्ष की इसी अवधि के 32.3 लाख करोड़ रुपए की तुलना में बढ़कर 33.8 लाख करोड़ रुपए हो गया।
सरकार की ओर से अर्थव्यवस्था और रोजगार पर ध्यान केंद्रित करने के कारण राजमार्गों, बंदरगाहों और रेलवे जैसी अवसंरचनाओं पर पूंजीगत व्यय पिछले वर्ष की इसी अवधि के 6.9 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 7.9 लाख करोड़ रुपए हो गया।
वित्त मंत्रालय ने बताया कि इस अवधि के दौरान केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकारों को करों के हिस्से के हस्तांतरण के रूप में 10,38,164 करोड़ रुपए की राशि दी गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1,37,014 करोड़ रुपए अधिक है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2025-26 में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.4 प्रतिशत निर्धारित किया है, जो 15.7 लाख करोड़ रुपए बनता है। यह देश की राजकोषीय स्थिति को मजबूत करने के लिए घाटे में घटते क्रम को अपनाने की सरकार की प्रतिबद्धता का हिस्सा है। संशोधित अनुमान के अनुसार, 2024-25 के लिए भारत का राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.8 प्रतिशत था।
राजकोषीय घाटे में कमी से अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत होती है और मूल्य स्थिरता के साथ विकास का मार्ग प्रशस्त होता है। इससे सरकार द्वारा उधार लेने में कमी आती है, जिससे कॉरपोरेट और उपभोक्ताओं को ऋण देने के लिए बैंकिंग क्षेत्र में अधिक धन उपलब्ध होता है, जिसके परिणामस्वरूप उच्च आर्थिक विकास होता है।
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
पाकिस्तान में ईसाई व्यक्ति पर बर्बर हमला, अधिकार समूह ने की कड़ी निंदा
इस्लामाबाद, 30 जनवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक ईसाई व्यक्ति पर हुए बर्बर हमले को लेकर एक प्रमुख अल्पसंख्यक अधिकार संगठन ने गहरी चिंता जताई है। संगठन ने कहा कि यह घटना देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के सामने मौजूद खतरों और चुनौतियों को उजागर करती है।
वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी (वीओपीएम) के मुताबिक, पंजाब के बहावलपुर क्षेत्र में बंधुआ मजदूर और सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करने वाले ईसाई युवक जाहिद मसीह पर 21 जनवरी को उनके सहकर्मी मोहम्मद अली अजहर ने हमला किया। आरोप है कि अजहर लगातार जाहिद मसीह पर अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियां कर रहा था। जब मसीह ने इसका विरोध किया, तो आरोपी ने उनके चेहरे पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी।
अधिकार संगठन का कहना है कि हमलावर का इरादा जाहिद मसीह को जिंदा जलाने का था, लेकिन ईसाई समुदाय के लोगों की समय पर दखल से उनकी जान बच गई। घटना के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर ईसाई धर्म को लेकर घृणास्पद टिप्पणियां कीं और धार्मिक श्रेष्ठता का दावा किया।
वीओपीएम ने कहा कि इस हमले में जाहिद मसीह को गंभीर शारीरिक चोटें आई हैं और उन्हें गहरा मानसिक आघात भी पहुंचा है। इस घटना से पाकिस्तान के ईसाई समुदाय में भय और आक्रोश का माहौल है।
संगठन ने पाकिस्तान में ईसाई मजदूरों के खिलाफ बढ़ते भेदभाव और हिंसा पर चिंता जताते हुए कहा कि श्रम-प्रधान क्षेत्रों में काम करने वाले धार्मिक अल्पसंख्यक अक्सर उत्पीड़न, शोषण और दुर्व्यवहार का शिकार होते हैं। जाहिद मसीह की घटना उनकी असुरक्षित स्थिति की एक कड़वी मिसाल है।
कई मानवाधिकार संगठनों ने इस हमले की निंदा करते हुए अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा के लिए कड़े कानूनी कदम उठाने की मांग की है। वहीं, कानूनी विशेषज्ञों ने न्याय सुनिश्चित करने और धार्मिक असहिष्णुता पर रोक लगाने के लिए संस्थागत सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया है।
वीओपीएम के अनुसार, जाहिद मसीह का इलाज जारी है और उनकी मानसिक स्थिति से उबरने में लंबा समय लग सकता है। संगठन ने कहा कि यह घटना मौजूदा कानूनी सुरक्षा की कमियों को उजागर करती है और धार्मिक असहिष्णुता व भेदभाव के खिलाफ व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव की जरूरत को रेखांकित करती है।
अधिकार समूह ने कहा कि जाहिद मसीह पर हमला पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के सामने मौजूद गहरी जड़ें जमाए चुनौतियों की याद दिलाता है और सभी नागरिकों के लिए, धर्म की परवाह किए बिना, जीवन, स्वतंत्रता और धार्मिक आज़ादी के मूल अधिकारों की रक्षा के लिए व्यापक सुधारों की मांग करता है।
--आईएएनएस
डीएससी
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