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History of Yemen | सऊदी अरब-UAE से ईरान, यमन कैसे बना जंग का मैदान?|Globmaster

साल 2008 में 19 साल की एक लड़की केरला से लगभग 3000 किमी दूर एक दूसरे मुल्क पहुंचती है कुछ दिनों बाद वह भारत में अपनी मां के पास फोन करती है कहती है मां मुझे नौकरी मिल गई है अब हमारे बुरे दिन खत्म होने वाले हैं दरअसल कुछ ही दिनों में उस लड़की को एक सरकारी अस्पताल में काम मिल गया था फिर वहां रहते-रहते लड़की में आत्मविश्वास बढ़ा 2014 में उसने खुद का क्लिनिक खोलने की तरफ पहला कदम बढ़ा या घड़ी के साथ समय का कांटा बदला लगभग एक दशक बाद आज वो लड़की मिडिल ईस्ट के देश की जेल में बंद पाईं गईं और वहां के राष्ट्रपति ने उसे मौत की सजा सुना दी। निमिषा प्रिया को 16 जुलाई को फांसी दी जानी थी। उससे ठीक तीन दिन पहले मामला देश की सर्वोच्च अदालत के पास भी पहुंचा। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि  केरल की नर्स निमिशा प्रिया की फांसी को रोकने के लिए वह कुछ खास नहीं कर सकती। ये देश दुनिया के किसी भी अन्य हिस्से जैसा नहीं है। वो  दुनिया के सबसे बड़े मानवीय संकटों में से एक का सामना कर रहा है। यहां हूती का दबदबा चलता है। ये नाम अच्छे से याद कर लीजिए क्योंकि पूरी कहानी में इसका जिक्र बारमबार होने वाला है। एक तरफ फांसी की तैयारी चल रही थी तो दूसरी तरफ दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट में इसे रुकवाने के प्रयास लगभग छिन्न होते जा रहे थे। 16 जुलाई को निमिषा को फांसी होनी थी लेकिन आखिर समय पर ये टल गई। जिसके बाद कहा जाने लगा कि जो हूती नियंत्रित शासन अमेरिका तक की नहीं सुनता वहां एक मौलाना ने इसे रुकवा दिया। केरल की नर्स निमिषा प्रिया की सजा-ए-मौत टाल दिए जाने के पीछे केरल के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबु बकर अहमद की भूमिका की भी खूब चर्चा हुई। आज के ग्लोबमास्टर में आपको मिडिल ईस्ट के एक और देश लिए चलते हैं। जिसके उत्तर में सऊदी अरब है और पूर्व में ओमान की सीमा है। बाकी दिशाओं में फैला है विशाल समुद्र। ये देश यमन है।

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यमन का इतिहास

इसकी शुरुआत 628 ईस्वी से करते हैं, जब यहां इस्लाम आया। इससे पहले तक इस क्षेत्र में यहूदी और ईसाइयों का गहरा प्रभाव था। हालांति 628 ईस्वी में पैगम्बर मोहम्मद साहब के समय यहां इस्लाम पहुंचा और यह क्षेत्र बिना किसी बड़े युद्ध के इस्लामी शासन का हिस्सा बन गया। इसके बाद यहां अलग-अलग खिलाफत और इमामत का शासन रहा। उस्मानी साम्राज्य ने भी यहां पर दो बार हुकूमत की है। एक समय में यमन को 'अरबिया फेलिक्स' भी कहा जाता है था, जिसका मतलब खुशहाल होता है। 1990 से पहले यमन दो हिस्सों में बंटा हुआ था। इससे पहले यह देश उत्तर यमन और दक्षिण यमन में बंटा हुआ था। हालांकि 22 मई 1990 को यह देश एक बार फिर से एकजुट हो गया। इसके बाद यहां हूतियों की एंट्री होती है।

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शिया मुस्लिम गुट जो अमेरिका से भी नहीं डरता

कोई बगावत करता है और समूह में करता है तो विद्रोही गुट के नाम से पहचाना जाता है। लेकिन अगर कोई बगावत गुट को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया जाए तो क्या हो, तेल, परमाणु हथियार, शिया-सुन्नी, अरब सागर जद और भी हैं, पहलू और भी हैं। हूती कौन हैं और आख़िर ये क्या चाहते हैं। यमन के उत्तर पश्चिम में सैना नामक शहर है। 1990 के दशक में यहां पर द बिलिविंग यूथ नाम से एक छात्र आंदोलन शुरू हुआ। इसके फाउंडर का नाम बेद्दीन हुसैन अल हूती था। इस संगठन का मतलब जैदी इस्लाम का पुनर्जागरण था। दरअसल, ज़ैदी या ज़ैदिय्या शिया इस्लाम के एक संप्रदाय को कहते हैं जो मुख्यतः अधिकांश यमन मे एवं ईराक, ईरान, भारत, पाकिस्तान में थोडा जनसंख्या में मौजूद है। भारत मे यह मुख्यतः मुज़्जफरनगर जिले के आस पास सादात ए बाहरा के गांवों में मौजूद है। ये सम्प्रदाय चौथे इमाम हज़रत जै़नुलआबेदीन के पुत्र हज़रत ज़ैद की औलाद में से है। यमन में एक हजार सालों तक जैदी राजाओं का शासन रहा। 1962 में आखिरी जैदी सुल्तान इमाम अहमद की हत्या हुई और इसके बाद सिविल व़ॉर शुरू हुआ। इसके बाद यमन दो हिस्सों में बंट गया। फिर कुछ समय के लिए साउथ यमन में सोवियत संघ की हवा भी चली। फिर 1978 में उत्तरी यमन में एक आर्मी के अफसर अली अब्दुल्ला सालेह को राष्ट्रपति बनाया गया। उनके दौर में उत्तरी और दक्षिणी यमन के बीच फिर से लड़ाई हुई। जिसमें हजारों लोग मारे गए। 1980 का दशक आया तो सोवियत संघ कमजोर पड़ने लगा औऱ उसके गुट में शामिल देश बगावत करने लगे। यूटोपिया का सपना चकनाचूड़ हो चुका था और इसका असर यमन में भी नजर आया। उत्तरी और दक्षिणी यमन एक हो गए और ये रिपब्लिक ऑफ यमन कहलाया। अली अब्दुल्ला सालेह की सत्ता पर कोई आंच नहीं आई थी। इस सत्ता में सालेह को सऊदी और अमेरिका का भरपूर साथ मिला। 

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IRGC पर एक्शन से भड़का Iran, European Union को दी सीधी चेतावनी, भुगतने होंगे परिणाम

ईरान ने आईआरजीसी को आतंकवादी समूह घोषित किए जाने के बाद यूरोपीय संघ पर करारा जवाब दिया। करारा जवाब देते हुए ईरान ने कहा है कि वह उन यूरोपीय संघ के देशों की सेनाओं को आतंकवादी संगठन की सूची में शामिल करेगा, जिन्होंने आईआरजीसी को आतंकवादी समूह घोषित किया है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यूरोपीय संघ निश्चित रूप से जानता है कि इस्लामी सलाहकार सभा के प्रस्ताव के अनुसार, उन देशों की सेनाओं को आतंकवादी संगठन माना जाता है जिन्होंने इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड कोर के खिलाफ यूरोपीय संघ के हालिया प्रस्ताव में भाग लिया है। इसलिए, इसके परिणाम उन यूरोपीय देशों को भुगतने होंगे जिन्होंने ऐसा कदम उठाया है। ईरान ने कहा है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) को आतंकवादी संगठन घोषित किए जाने के बाद यूरोप को मूर्खतापूर्ण कृत्य के परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

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दिल्ली दौरे पर आए फिलिस्तीनी विदेश मंत्री वर्सेन अघाबेकियन शाहिन ने कहा कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्थिरता सभी के लिए चिंता का विषय है। फिलिस्तीनी मंत्री अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव और गाजा शांति के विषय पर बोल रहे थे। इजरायली मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को अमेरिकी नौसेना का एक विध्वंसक पोत इजरायल के इलात बंदरगाह पर पहुंचा। रिपोर्ट में सैन्य सूत्रों का हवाला देते हुए यह जानकारी दी गई है। यह घटनाक्रम वाशिंगटन और ईरान के बीच तनाव के बीच हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मिस्र और जॉर्डन के साथ इजरायल की सीमाओं के पास, अकाबा की खाड़ी पर स्थित दक्षिणी बंदरगाह पर विध्वंसक पोत का आगमन पूर्व नियोजित था और अमेरिकी और इजरायली सेनाओं के बीच चल रहे सहयोग का हिस्सा है।
तुर्की के राष्ट्रपति तैय्यप एर्दोगन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान से कहा कि तुर्की ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने को तैयार है।

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राष्ट्रपति एर्दोगन ने इस बात पर जोर दिया कि तुर्की ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव कम करने और मुद्दों को सुलझाने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने को तैयार है। 

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  Sports

टी20 वर्ल्ड कप में चौथी बार अंपायरिंग करेंगे नितिन मेनन, अनंत पद्मनाभन करेंगे डेब्यू, यहां देखें पूरी लिस्ट

T20 World Cup 2026 Full list of umpires for Group Stage: टी20 वर्ल्ड कप में ग्रुप स्टेज पर कौन अंपायर होगा, उसकी लिस्ट जारी कर दी गई है. नितिन मेनन चौथी बार टी20 वर्ल्ड कप में अंपायर के रूप में उतरेंगे वहीं भारतीय अंपायर अनंत पद्मनाभन पहली बार फटाफट क्रिकेट के वर्ल्ड कप में अंपायर के तौर पर डेब्यू करेंगे. Fri, 30 Jan 2026 20:50:41 +0530

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