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दिमाग खाने वाला अमीबा: पानी से नाक के रास्ते सूक्ष्म जीव ऐसे बनता है मौत का कारण, जाने बचने का तरीका
बीते साल केरल में 19 लोगों की जान लेने वाले सूक्ष्म जीव नेगलरिया फाउलेरी (Naegleria fowleri) ने पूरी दुनिया में कहर मचा रखा है. पानी से ये नाक के रास्ते लोगों के दिमाग तक पहुंच रहे हैं. जिसमें शख्स की कुछ ही दिनों में मौत हो जाती है. अगर ये जीव एक बार दिमाग तक पहुंच गया तो इससे बचाना बहुत की कठिन है.
इस माइक्रोऑर्गेनिज्म को आम बोलचाल में 'ब्रेन-ईटिंग' यानी दिमाग खाने वाला वाला अमीबा कहा जाता है. यह सूक्ष्म जीव किस तरह से काम करता है और यह पूरी दुनिया के लिए क्यों नई चिंता का विषय बन गया है, इसे जानने की कोशिश करते हैं.
दूषित पानी में पनपता है ये सूक्ष्म जीव
यह खतरनाक अमीबा मुख्य रूप से गर्म पानी की झीलों, झरनों और उन स्विमिंग पूल्स में पाया जाता है, जिनकी साफ-सफाई नहीं होती है. जब कोई ऐसे पानी में नहाता है तो यह अमीबा पानी के साथ नाक के रास्ते शरीर में प्रवेश करता है. नाक से घुसने के बाद यह जीव बेहद तेजी से दिमाग की ओर बढ़ता है. यें यहां की टिश्यूज की ओर बढ़ता है. उन्हें नष्ट करने की कोशिश करता है.
इस संक्रमण की रफ्तार काफी तेज होती है. पानी के संपर्क में आने के कुछ ही दिनों अंदर इंसान की मौत हो सकती है. बताया जा रहा है कि दुनिया भर में इससे पीड़ित लोगों में 97 प्रतिशत की मौत हो चुकी है.
इंसान अपनी पहचना तक भुला देता है
नेगलेरिया फाउलेरी से होने वाले इस जानलेवा दिमागी संक्रमण को मेडिकल भाषा में प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस का नाम दिया जाता है. इसका सबसे खतरनाक पहलू यह है कि यह इंसान के के विचारों और उसकी पहचान तक को खत्म कर सकता है.
क्या हैं इसके लक्ष्ण
शुरुआत में मरीज को तेज सिरदर्द और उल्टियां होने लगती है. डॉक्टर अक्सर इसे 'मेनिनजाइटिस' समझते हैं. इस वजह है दोनों के शुरुआती लक्षण बिल्कुल एक होना है. जैसे-जैसे संक्रमण तेजी से बढ़ते हैं, दिमाग में गंभीर सूजन देखने को मिलती है. मरीज को अजीबोगरीब चीजें दिखने लगती हैं, जैसे छत पर रेंगना, याददाश्त कमजोर होना आदि. इसके बाद मैरीज हालत बिगड़ती चली जाती है. वह अपने परिवार वालों को पहचानना बंद कर देता है. यहां तक कि अपनी खुद की पहचान भी भूला देता है. इसके बाद मरीज को दौरे पड़ने लगते हैं और आखिरकार उसकी मौत हो जाती है.दुनियाभर में मौत का सिलसिला जारी
यह अमीबा इतना खतरनाक है कि इसका अंदाजा इस बात से लगाताया जा सकता है कि साल 1962 से 2023 के बीच दुनिया भर में इसके 488 मामले सामने आए हैं. इसमें करीब 97 फीसदी मरीजों की मौत हो गई.
अब यह संक्रमण भारत के लिए एक बड़े अलर्ट की तरह है. आपको बता दें कि बीते साल भारत में इस अमीबा संक्रमण के 200 से ज्यादा मामले सामने आए. यह पूरी दुनिया में बड़े आउटब्रेक की तरह देखा जा रहा है. इससे पहले पूरी दुनिया का कुल आंकड़ा 500 से कम था. मगर भारत में अब भी नए मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.
गर्म इलाकों से ठंडे देशों तक पहुंचा खतरा
पारंपरिक रूप से यह सूक्ष्म जीव अमेरिका के दक्षिणी राज्यों, पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया जैसी जगहों पर होता था. मगर अब यह अपना दायरे को बढ़ा रहा है. बीते दो दशकों में यह इटली, बेल्जियम, अमेरिका के मिनेसोटा जैसे ठंडे राज्यों और स्लोवाकिया तक पहुंच चुका है. साल 2023 में ताइवान की एक इनडोर सर्फिंग फैसेलिटी और अमेरिका में एक दूषित 'स्प्लैश पैड' के कॉन्टैक्ट में आने से भी मौते के मामले सामने आए हैं.
बचाव के लिए जरूरी बातें
यह ब्रेन इंटिंग अमीबा काफी खतकनाक है. मगर इससे घबराने की जरूरत नहीं है. इसके लिए अगर ऐहतियात बरती जाए तो इससे बचा जा सकता है. गंदे पानी में नहाने से बचें.
इन बातों का ध्यान रखें
बेशक ब्रेन-ईटिंग' अमीबा का संक्रमण बेहद जानलेवा है, लेकिन आपको इससे घबराने या पैनिक करने की जरूरत नहीं है. इसके बजाय, बढ़ते जोखिम के प्रति सतर्क रहकर इससे बचा जा सकता है. चूंकि यह अमीबा पानी के जरिए नाक से शरीर में घुसता है, इसलिए आप इन बातों का ध्यान रख सकते हैं.उन स्विमिंग पूल्स में जाने से बचें जो बेकार पड़े हैं. इनकी नियमित साफ-सफाई नहीं होती है, जिसमें यह सूक्ष्म जीव पनपते हैं. दूषित 'स्प्लैश पैड' और इनडोर सर्फिंग फैसेलिटीज का इस्तेमाल करते समय सतर्क रहें. प्राकृतिक गर्म पानी के झरनों, झीलों और तालाबों में नहाते वक्त सतर्क रहें. वैज्ञानिक बताते हैं कि जब पानी गर्म होता है तो तो यह अमीबा बहुत सक्रिय होता जाता है. हमेशा यह ध्यान रखें कि पानी में जाते समय पानी तेजी से आपकी नाक में न जाए. इससे अमीबा के शरीर में प्रवेश करने और दिमाग तक पहुंचने का रास्ता मिल जाता है.
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