दतिया उपचुनाव में BJP को झटका, Congress के घनश्याम सिंह ने 6016 वोटों से हराया
(लैमुएल लाल) भोपाल, तीन अगस्त मध्यप्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव में छह बार के विधायक नरोत्तम मिश्रा की जगह नए चेहरे को उम्मीदवार बनाने का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का फैसला सफल नहीं रहा। कांग्रेस ने यह सीट बरकरार रखी, जिसके बाद सत्तारूढ़ दल ने केंद्रीय नेतृत्व के फैसले की अवहेलना करने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के संकेत दिए। उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने सोमवार को भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,016 मतों से हराया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 30 जुलाई को हुए इस उपचुनाव में भाजपा की हार केवल एक विधानसभा सीट का नुकसान नहीं है बल्कि यह मध्यप्रदेश में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे के लिए भी बड़ा झटका है। भाजपा ने दतिया सीट से मिश्रा की जगह तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। मिश्रा के टिकट नहीं मिलने के फैसले के बाद उनके गृह जिले में विरोध प्रदर्शन हुए थे।
मिश्रा अपने लंबे राजनीतिक करियर में डबरा (ग्वालियर) से तीन और दतिया से तीन बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। मिश्रा के सैकड़ों समर्थकों ने 10 और 11 जुलाई को दतिया में एक प्रमुख राजमार्ग को 12 घंटे से अधिक समय तक अवरुद्ध किया था। इस दौरान संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिस के साथ झड़प की घटनाएं भी सामने आई थीं, जिसमें जिला पुलिस अधीक्षक समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, मध्यप्रदेश में यह लंबे समय बाद पहला मौका था जब केंद्रीय नेतृत्व के उम्मीदवार चयन के खिलाफ खुला विरोध देखने को मिला। उन्होंने कहा कि राज्य इकाई ने मिश्रा का नाम केंद्रीय नेतृत्व को भेजा था, लेकिन आंतरिक सर्वेक्षण और फीडबैक के आधार पर तिवारी को उम्मीदवार बनाया गया। मिश्रा के समर्थक इस फैसले से नाराज थे क्योंकि वह कई सप्ताह से क्षेत्र में प्रचार कर रहे थे और दतिया सीट से फिर उम्मीदवार बनाए जाने की उम्मीद कर रहे थे।
वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में वह कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती से 7,000 से अधिक मतों से हार गए थे। हालांकि, विरोध के बाद मिश्रा ने अपने समर्थकों से पार्टी के फैसले को स्वीकार करने और भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में काम करने की अपील की थी। राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार राकेश दीक्षित ने कहा कि भाजपा की हार केवल एक सीट का नुकसान नहीं है, बल्कि यह पार्टी की चुनावी मशीनरी और कार्यकर्ताओं की भूमिका पर सवाल उठाती है।
उन्होंने कहा कि मिश्रा जैसे प्रभावशाली नेता को टिकट नहीं दिए जाने और उसके बाद हुए विरोध प्रदर्शन ने अनुशासित पार्टी के रूप में भाजपा की छवि को नुकसान पहुंचाया है। दीक्षित के अनुसार, विरोध शांत होने तक पार्टी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच चुका था। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं में एकजुटता का संदेश देने के लिए आयोजित सभा में मिश्रा की भावनात्मक अपील भी मतदाताओं को प्रभावित नहीं कर सकी।
इसका उदाहरण यह है कि कांग्रेस उम्मीदवार को मिश्रा के मतदान केंद्र पर भी भाजपा से अधिक मत मिले। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि पार्टी जनादेश की समीक्षा करेगी और निष्कर्षों के आधार पर अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा के लिए अनुशासन सर्वोपरि है।
प्रत्येक कार्यकर्ता से अपेक्षा की जाती है कि वह किसी भी पद पर रहते हुए पार्टी के अनुशासन के भीतर काम करे। यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।’’ इस जीत के बाद 230 सदस्यीय मध्यप्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायकों की संख्या बढ़कर 65 हो गई है। भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जबकि एक सीट भारतीय आदिवासी पार्टी के पास है।
मिश्रा ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में भाजपा के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं और उनका अपना समर्थक वर्ग है। भाजपा ने दिसंबर 2018 से मार्च 2020 के 15 महीने के अंतराल को छोड़कर वर्ष 2003 से लगातार मध्यप्रदेश में सरकार बनाई है।
कर्नाटक मंत्रिमंडल विस्तार: Siddaramaiah सरकार में 19 नए मंत्री शामिल
बेंगलुरु, तीन अगस्त कर्नाटक मंत्रिमंडल का बहुप्रतीक्षित विस्तार आखिरकार सोमवार को हो गया, जिसके तहत वरिष्ठ नेताओं और नए चेहरों समेत 19 नए मंत्रियों को इसमें शामिल किया गया। मंत्रिमंडल में इस बार भी किसी महिला को शामिल नहीं किया गया। इन 19 मंत्रियों में से सात मंत्री पहले सिद्धरमैया मंत्रिमंडल में शामिल थे , जबकि सात को पहली बार मंत्री बनाया गया है।
पहली बार मंत्री बनने वालों में के. एस. बसवंतप्पा (मायकोंडा), टी. रघुमूर्ति (चल्लकेरे), रिजवान अरशद (शिवाजीनगर), अजय सिंह (जेवरगी), के. एम. शिवलिंगे गौड़ा (अरसीकेरे), एच. सी. बालकृष्ण (मगडी) और विजयानंद काशप्पनावर (बागलकोट) शामिल हैं। सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री रह चुके नेताओं में शिवराज तंगडगी (कनकगिरी), बी. नागेंद्र (बेल्लारी ग्रामीण), बी. जेड. जहीर अहमद खान (चामराजपेट), संतोष लाड (कलघटगी) और एन. चलुवराया स्वामी (नागमंगला) शामिल हैं। एमएलसी गायत्री शांतिगौड़ा का नाम आखिरी समय में हटा दिया गया।
फिलहाल राज्य मंत्रिमंडल में एक भी महिला मंत्री नहीं है। शांतिगौड़ा का नाम कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व द्वारा मंजूर अंतिम सूची में शामिल था। गत 28 मई को मुख्यमंत्री पद से सिद्धरमैया के इस्तीफा देने के बाद शिवकुमार ने तीन जून को 13 मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
कर्नाटक मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री समेत कुल 34 पद स्वीकृत हैं। सोमवार के विस्तार के बाद अब मंत्रिमंडल में केवल एक पद खाली है। उन्नीस नए सदस्यों के शामिल होने के बाद मंत्रिमंडल में सबसे अधिक प्रतिनिधित्व लिंगायत और अनुसूचित जाति समुदाय का है, जिनके सात-सात मंत्री हैं।
इसके बाद वोक्कालिगा समुदाय के पांच, मुस्लिम और अनुसूचित जनजाति समुदाय के तीन-तीन, कुरुबा समुदाय के दो तथा एडीगा, मराठा, राजपूत, रेड्डी, ईसाई व उप्पार समुदाय के एक-एक मंत्री हैं। क्षेत्रवार प्रतिनिधित्व की बात करें तो सबसे अधिक छह मंत्री बेंगलुरु से हैं, जबकि कलबुर्गी से तीन मंत्री बनाए गए हैं। इसके अलावा दावणगेरे, मैसूर और धारवाड़ समेत विभिन्न क्षेत्रों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है।
इस बीच कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक टी. बी. जयचंद्र को विधानसभा का कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त किया। जयचंद्र तब तक इस पद पर रहेंगे, जब तक विधानसभा स्थायी अध्यक्ष का चुनाव नहीं कर लेती। फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों के पद खाली हैं।
आगामी 13 अगस्त से शुरू होने वाले कर्नाटक विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान दोनों पदों के लिए चुनाव होने की संभावना है। विधानसभा के बुलेटिन में कहा गया है, माननीय सदस्यों को सूचित किया जाता है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 180(1) के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए कर्नाटक के माननीय राज्यपाल ने विधायक श्री टी. बी. जयचंद्र को तीन अगस्त 2026 से कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष के पद के कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए नियुक्त किया है। वह तब तक इस जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे, जब तक विधानसभा द्वारा विधिवत रूप से अध्यक्ष का चुनाव नहीं कर लिया जाता।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बी. नागेंद्र को मंत्री बनाए जाने को लेकर कांग्रेस सरकार की आलोचना की। पार्टी ने आरोप लगाया कि वाल्मीकि निगम घोटाले में कथित संलिप्तता के बावजूद उन्हें इनाम के तौर पर मंत्री बनाया गया है। भाजपा ने नए मंत्रिमंडल में किसी भी महिला को जगह नहीं दिए जाने को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कांग्रेस सरकार पर हमला बोलते हुए दावा किया कि वाल्मीकि विकास निगम घोटाले में 187 करोड़ रुपये की कथित लूट के बावजूद किसी को भी जवाबदेह नहीं ठहराया गया है।
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