ट्रंप ने कनाडा पर 50 प्रतिशत एयरक्राफ्ट टैरिफ लगाने की दी धमकी
वाशिंगटन, 30 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के खिलाफ व्यापारिक स्तर पर एक्शन लेने की चेतावनी दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कनाडा अमेरिकी कंपनी गल्फस्ट्रीम के विमानों को प्रमाणन (सर्टिफिकेशन) देने से गलत, गैरकानूनी और लगातार इनकार कर रहा है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि कनाडा ने गल्फस्ट्रीम 500, 600, 700 और 800 जेट विमानों को प्रमाणित नहीं किया है, जबकि ये दुनिया के सबसे बेहतरीन और अत्याधुनिक विमान हैं। उन्होंने इसे अमेरिकी कंपनी के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि अमेरिका भी जवाबी कदम उठाएगा।
राष्ट्रपति ने ऐलान किया कि अमेरिका कनाडा में बने बॉम्बार्डियर ग्लोबल एक्सप्रेस और कनाडा में निर्मित सभी विमानों का प्रमाणन रद्द करेगा। उन्होंने कहा कि यह फैसला तब तक लागू रहेगा, जब तक गल्फस्ट्रीम को पूरी तरह से प्रमाणन नहीं मिल जाता।
ट्रंप ने कनाडा पर यह भी आरोप लगाया कि वह अपनी नियामक प्रक्रिया के जरिए अमेरिकी विमानों की बिक्री को रोक रहा है। उन्होंने कहा कि इसी प्रक्रिया के कारण गल्फस्ट्रीम के उत्पादों को कनाडाई बाजार में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है।
ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर इस मुद्दे को ठीक नहीं किया गया तो टैरिफ लगाए जाएंगे। उन्होंने आगे कहा, अगर किसी भी वजह से इस स्थिति को तुरंत ठीक नहीं किया गया, तो मैं कनाडा से अमेरिका में बेचे जाने वाले सभी एयरक्राफ्ट पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाऊंगा।
इस बयान के बाद अमेरिका में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। न्यूयॉर्क से डेमोक्रेट सीनेटर किर्स्टन गिलिब्रांड ने ट्रंप की आलोचना करते हुए कहा कि राष्ट्रपति अपने करीबी सहयोगी देशों के खिलाफ लापरवाही से टैरिफ का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने ट्रंप से गैरकानूनी टैरिफ धमकियों को तुरंत रोकने की मांग की।
गिलिब्रांड ने दावा किया कि ट्रंप पहले भी कनाडाई सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ और दक्षिण कोरियाई उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दे चुके हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि ट्रंप ने नाटो देशों को 10 प्रतिशत टैरिफ की चेतावनी दी थी, जब तक कि अमेरिका को ग्रीनलैंड नहीं दिया जाता।
सीनेटर ने कहा कि अगर कनाडा के खिलाफ टैरिफ बढ़ाया गया, तो इसका सीधा असर न्यूयॉर्क और आसपास के इलाकों पर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि खाद, बिजली और कार के पुर्जों जैसे कई जरूरी उत्पादों के लिए लोग कनाडा पर निर्भर हैं। गिलिब्रांड के अनुसार, पहले लगाए गए टैरिफ के कारण न्यूयॉर्क के परिवारों पर करीब 4,200 डॉलर तक का अतिरिक्त बोझ पड़ा।
उन्होंने महंगाई बढ़ने की भी चेतावनी दी और कहा कि जब कीमतें पहले ही आसमान छू रही हैं, तब आम परिवारों पर और बोझ डालना गलत है।
कनाडा अमेरिका का एक बड़ा व्यापारिक साझेदार है और ऊर्जा, निर्माण और विमानन जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों की सप्लाई चेन आपस में जुड़ी हुई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि विमान प्रमाणन से जुड़े ऐसे विवाद न केवल व्यापार, बल्कि दोनों देशों के रिश्तों पर भी गहरा असर डाल सकते हैं।
--आईएएनएस
वीकेयू/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
पेट, त्वचा और जोड़ों के लिए फायदेमंद वरुण मुद्रा, जानें अभ्यास से क्या परिवर्तन आते हैं
नई दिल्ली, 30 जनवरी (आईएएनएस)। आज के समय में देर रात तक मोबाइल स्क्रीन, अनियमित खानपान, कम पानी पीने की आदत और तनाव ने लोगों के स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसका असर सबसे पहले त्वचा, पेट और जोड़ों पर दिखाई देता है। कभी स्किन जरूरत से ज्यादा रूखी हो जाती है, तो कभी पेट साफ नहीं रहता, गैस और एसिडिटी आम समस्या बन गई है।
ऐसे में आयुष मंत्रालय अपनी दिनचर्या में योग को शामिल करने की सलाह देता है, जो शरीर को संतुलन सिखाता है। हाथों से की जाने वाली योग मुद्राएं इसी संतुलन का आसान और असरदार तरीका हैं। इन्हीं में से एक है वरुण मुद्रा, जिसे जल तत्व से जुड़ी समस्याओं के लिए बेहद उपयोगी माना गया है।
आयुष मंत्रालय के योग शास्त्र के अनुसार, मानव शरीर पंच तत्वों से बना है, जिनमें जल तत्व का विशेष महत्व है। जब शरीर में जल तत्व असंतुलित हो जाता है, तो उसका असर त्वचा, पाचन और जोड़ों पर साफ दिखाई देने लगता है। वरुण मुद्रा को जल तत्व को संतुलित करने वाली मुद्रा माना जाता है। इसका नियमित अभ्यास शरीर में नमी बनाए रखने में मदद करता है और कई अंदरूनी समस्याओं को धीरे-धीरे कम करता है।
वरुण मुद्रा का सबसे बड़ा लाभ त्वचा से जुड़ा माना जाता है। आजकल कम पानी पीना और केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल त्वचा को रूखा बना देता है। वरुण मुद्रा के अभ्यास से शरीर के भीतर जल तत्व संतुलित होने लगता है, जिससे त्वचा को अंदर से नमी मिलती है। इसका असर यह है कि स्किन ड्राई और खिंची हुई महसूस नहीं होती, बल्कि धीरे-धीरे मुलायम और स्वस्थ नजर आने लगती है। आयुष मंत्रालय भी मानता है कि जब शरीर का जल संतुलन सही रहता है, तो त्वचा की कई समस्याएं अपने आप कम होने लगती हैं।
पेट की समस्याओं से परेशान लोगों के लिए भी वरुण मुद्रा काफी फायदेमंद मानी जाती है। बदलती जीवनशैली के कारण कब्ज, गैस और पेट भारी रहने की शिकायत आम हो गई है। वरुण मुद्रा के नियमित अभ्यास से पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करने लगता है। शरीर को जरूरी नमी मिलने से आंतों की गतिविधि सुधरती है और मल त्याग की प्रक्रिया आसान हो जाती है। इसका सीधा असर कब्ज की समस्या पर पड़ता है और पेट हल्का महसूस होता है।
जो लोग जोड़ों में दर्द या अकड़न की समस्या से जूझ रहे हैं, उनके लिए भी वरुण मुद्रा सहायक हो सकती है। शरीर में पानी की कमी होने पर जोड़ों के बीच घर्षण बढ़ जाता है, जिससे दर्द और सूजन महसूस होती है। वरुण मुद्रा जल तत्व को संतुलित कर जोड़ों में लचीलापन बनाए रखने में मदद करती है। नियमित अभ्यास से सूजन कम हो सकती है और चलने-फिरने में होने वाली तकलीफ धीरे-धीरे कम होने लगती है।
एसिडिटी और सीने में जलन जैसी समस्याएं भी आज के समय में आम हो चुकी हैं। गलत खानपान और तनाव के कारण पेट में अम्लता बढ़ जाती है। योग मुद्राएं पाचन अग्नि को संतुलित करने में मदद करती हैं। वरुण मुद्रा का अभ्यास पेट के अंदरूनी वातावरण को शांत करता है और एसिड के स्तर को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है। इससे सीने में जलन, खट्टी डकार और गैस जैसी समस्याओं में राहत महसूस होती है।
अपच भी जल तत्व की गड़बड़ी से जुड़ा माना जाता है। जब शरीर में नमी की कमी होती है, तो पाचन रस सही मात्रा में नहीं बन पाते। वरुण मुद्रा पाचन शक्ति को बेहतर बनाकर भोजन को ठीक से पचाने में मदद करती है।
वरुण मुद्रा करना बेहद सरल है। किसी शांत जगह पर आराम से बैठकर हाथों को घुटनों पर रखें और छोटी उंगली के सिरे को अंगूठे के सिरे से हल्के से मिलाएं। बाकी तीन उंगलियां सीधी रखें। आंखें बंद करके गहरी और सामान्य सांस लेते रहें। इस मुद्रा को रोज 15 से 20 मिनट तक किया जा सकता है।
--आईएएनएस
पीके/एएस
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