भले ही ट्रंप ईरान को घुटनों पर लाने के लिए लगातार कोशिशें कर रहे हो लेकिन जिस तरह से ईरान खुली चुनौती देते हुए जंग की बड़ी तैयारी कर रहा है उससे साफ है कि वो किसी भी कीमत पर झुकने के मूड में नहीं है। अब ईरान ने अचानक ऐसा धमाका किया है कि जिसने पूरे अमेरिका में हड़कंप मचा दिया है। दरअसल खबर है कि ईरानी ड्रोन अमेरिका के यूएसएस अब्राहिम लिंकन के बिल्कुल नजदीक तक उड़ान भरकर सुरक्षित वापस आ गया। उसने बेहद नजदीकी से अमेरिकी बेड़ा के चित्र भी कैद कर लिए जो बताता है कि कैसे ड्रोन के जरिए ईरान अमेरिका के बेड़े की निगरानी रखने में सफल हो रहा है। दरअसल ईरान ने समंदर में ड्रोन करियर तैनात कर दिए हैं। यह ईरान का शाहिद बघेरी ड्रोन करियर है। जिसे ईरान ने फारस की खाड़ी में बंदर अब्बास पोर्ट से करीब 5 कि.मी. दक्षिण समुद्र में तैनात किया है। पहले यह एक साधारण कंटेनर जहाज था। लेकिन ईरान ने 2022 से 2024 के बीच इसे ड्रोन कैरियर में बदल दिया। इस जहाज पर इसकी जंप रैंप है जिससे ड्रोन उड़ाए जा सकते हैं। इससे ड्रोन और हेलीकॉप्टर दोनों चलाए जा सकते हैं। यानी यह कोई बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं बल्कि कम लागत वाला ऐसा युद्ध प्लेटफार्म है जो अमेरिका के लिए बड़ा खतरा बन गया है। यह कैरियर ईरान को समंदर से ड्रोन हमला करने की क्षमता देता है। जिससे दुश्मन पर मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ता है।
इसकी मदद से ईरान अमेरिका के युद्धपोतों पर एक साथ कई ड्रोंस से हमले कर सकता है। इसीलिए इस ईरानी कैरियर से अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के लिए नया खतरा पैदा हो गया है। क्योंकि एक साथ कई ड्रोन से हमला करके बड़े जहाजों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है। जब से चीन में जिनपिंग के तख्तापलट की तैयारी और उसके पीछे अमेरिका की साजिश की खबरें सामने आई है तब से चीन ने अमेरिका को घेरने के लिए तैयारियों को और तेज कर दिया है। अमेरिका को बड़ा झटका देने के लिए चीन ईरान के सपोर्ट में उतर आया है। चीन ने इसके लिए ईरान को समंदर का सबसे घातक हथियार सौंपा है। चीन ने ईरान को वो मिसाइल दे दी है जिसे कैरियर किलर कहा जाता है जो ईरान के आसपास मौजूद अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के लिए सबसे बड़ा खतरा है। चीन ने ईरान को डीएफ2 डीएटी शिप बैलस्टिक मिसाइल दी है। चीन ने इस मिसाइल को खासतौर पर अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर को निशाना बनाने के लिए तैयार किया है। यह मिसाइल सीधे एयरक्राफ्ट कैरियर फ्लाइट डेक को नष्ट करने में सक्षम है। फ्लाइट डेक वो जगह होती है जहां से कोई फाइटर जेट उड़ान भरता है।
चीन ने यह फैसला तब लिया है जब ट्रंप ने अमेरिका के दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स को ईरान को घेरने का आर्डर दे दिया है। कुछ घंटे पहले ही अमेरिका के राष्ट्रपति ने ईरान को सबसे बड़ी धमकी दी है। ट्रंप ने साफ-साफ कहा है कि जो बेड़ा ईरान में भेजा गया है, वह वेनेजुला भेजे गए बेड़े से भी बड़ा है और इसकी अगुवाई महान एयरक्राफ्ट करियर अब्राहिम लिंकन कर रहा है। जरूरत पड़ने पर यह तेजी के साथ घातक हमला करने के लिए तैयार है। ट्रंप ने आगे कहा है कि इसलिए ईरान परमाणु हथियारों को छोड़कर जल्दी से बातचीत के टेबल पर आ जाए। तो ट्रंप की इस धमकी का ईरानी विदेश मंत्री अब्बास ने तगड़ा जवाब देते हुए कहा है कि उनकी सेना तैयार है और देश पर किसी भी हमले का जोरदार जवाब देने के लिए ट्रिगर पर उंगली रखे हुए हैं। यानी कि ईरान ट्रंप को जंग की खुली चेतावनी दे रहा है। दावा किया जा रहा है कि ईरान के खलीफा ने परमाणु शक्ति हासिल कर ली है।
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आसमान में लड़ाकू विमान बढ़ चुके हैं और अब एक ऐसा दावा सामने आया है जो पूरे मध्य पूर्व यानी कि मिडिल ईस्ट को हिला कर रख सकता है। सूत्रों के मुताबिक अमेरिका ने ईरान पर एक साथ 11 ठिकानों का तबाह करने का प्लान बना लिया है। अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत करते हुए अरब सागर और लाल सागर में विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन, यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट और कई मिसाइल विध्वंसक युद्धपोत तैनात किए हैं। साथ ही कतर, बहरीन, सऊदी अरब, इराक और जॉर्डन के सैन्य अड्डों से वायुसेना की सक्रियता बढ़ी है। अमेरिका अब ईरान के परमाणु ठिकानों, सैन्य अड्डों व कमांड सेंटरों पर समुद्र और आसमान दोनों से हमले की स्थिति में आ गया है। उधर, ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह जून, 2025 की तरह कतर के अमेरिकी ठिकानों और इजराइल पर मिसाइलें और ड्रोन दाग सकता है।
कुछ घंटों में हमला संभव
बता दें आपको कि इस प्लान के सेंटर में ईरान का परमाणु कार्यक्रम है क्योंकि अमेरिकी की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप साफ कह चुके हैं कि ईरान के पास बातचीत के लिए समय तेजी से खत्म हो रहा है। ट्रंप ने कहा है कि एक विशाल अमाडा पूरी ताकत और मकसद के साथ ईरान की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया है कि खाड़ी में तैनात अमेरिकी नौसैनिक बल उस बेड़े से भी बड़ा है जो वेनेजुला मिशन [संगीत] से पहले भेजा गया था। ट्रंप का संदेश सीधा है कि नो डील, नो न्यूक्लियर वेपन वरना अंजाम तय है। अब बात उन 11 ठिकानों की करते हैं जहां अमेरिका ईरान पर एक साथ हमला करने की फिराक में बैठा हुआ है।बता दें आपको कि डिफेंस और ओपन सोर्स इंटेलिजेंस से जुड़े कुछ विश्लेषकों का दावा है कि अमेरिका का संभावित प्लान सीमित नहीं बल्कि एक साथ कई ठिकानों पर हमला करने का है। तो वहीं कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक इस कथित प्लान में शामिल हो सकते हैं फडो नतांग्स और इफान जैसे एनरचमेंट सेंटर मिसाइल स्टोरेज साइट्स, ड्रोन और एयर डिफेंस बेसिस और साथ ही साथ नेवल सपोर्ट बेसिस। तो कुल मिलाकर 11 हाई वैल्यू टारगेट्स अमेरिका के निशाने पर हैं।
वार्ता संभव
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका को अब किसी अतिरिक्त जमावड़े की जरूरत नहीं पड़ेगी। यदि राजनीतिक आदेश मिलता है, तो कुछ ही घंटों में सीमित या बड़े पैमाने की सैन्य कार्रवाई संभव है। यही वजह है कि इसे हमले से पहले की स्थिति के तौर पर देखा जा रहा है। जंग की आहट के बीच सुलह की कोशिशें जारी हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची हमले को टालने के लिए अंकारा जा रहे हैं। तुर्किये के राष्ट्रपति एदोंगन ने ट्रम्प व ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच वीडियो वार्ता का प्रस्ताव रखा है। अराघची इस पर चर्चा करेंगे।
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