सिंधिया ने ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन के लिए 10,000 करोड़ रुपए के निवेश का लक्ष्य रखा
मुंबई, 3 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया मंगलवार को यहां एक इन्वेस्टर्स मीट और रोड शो आयोजित करेंगे। इसका मकसद भारत के पहले टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (टीएमजी) के लिए ज्यादा से ज्यादा इंडस्ट्री की भागीदारी और निवेश जुटाना है। इस जोन को पिछले हफ्ते मध्य प्रदेश के ग्वालियर में लॉन्च किया गया था।
बयान में कहा गया है कि भारत के पहले टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में निवेश के 10,000 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार करने की उम्मीद है।
टीएमजी के लॉन्च के बाद राष्ट्रीय राजधानी में पहली इन्वेस्टर्स राउंडटेबल बैठक हुई थी। सिंधिया ने घोषणा की कि 3,500 करोड़ रुपए के निवेश का वादा मिला है, जिससे लगभग 14,000 रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। यह भारत के बढ़ते टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में इंडस्ट्री के मजबूत भरोसे को दिखाता है।
मुंबई इन्वेस्टर्स मीट और रोड शो इस राष्ट्रीय पहल का अगला चरण है, जिसका मकसद भारत के पहले टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन के लिए ज्यादा से ज्यादा इंडस्ट्री की भागीदारी और निवेश जुटाना है। यह कार्यक्रम देश में वर्ल्ड-क्लास टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के विकास को तेजी देने के लिए प्रमुख टेलीकॉम मैन्युफैक्चरर्स, टेक्नोलॉजी कंपनियों, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स, कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स और इन्वेस्टर्स को एक साथ लाएगा।
इस मौके पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, टेलीकॉम विभाग के सचिव अमित अग्रवाल और मध्य प्रदेश सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज मंडलोई मौजूद रहेंगे।
बयान में कहा गया है कि भारत का पहला टीएमजी बनाना टेलीकॉम सेक्टर में आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम है। मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च और डेवलपमेंट, डिजाइन, टेस्टिंग और इनोवेशन के लिए एक इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम बनाकर, इसका मकसद घरेलू वैल्यू चेन को मजबूत करना, इंपोर्ट पर निर्भरता कम करना, स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना, एक्सपोर्ट बढ़ाना और भारत को टेलीकॉम प्रोडक्ट्स और अगली पीढ़ी की टेक्नोलॉजी के लिए एक भरोसेमंद ग्लोबल हब के तौर पर स्थापित करना है।
शुरुआती इन्वेस्टर्स राउंडटेबल में इंडस्ट्री से मिले जबरदस्त रिस्पॉन्स ने इस पहल की बड़ी संभावनाओं को उजागर किया। प्रमुख कंपनियों और टेलीकॉम इंडस्ट्री के कई दिग्गजों ने इस प्रोजेक्ट में बड़े निवेश का वादा किया, जिससे भारत के पॉलिसी फ्रेमवर्क और मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं में उनका भरोसा और मजबूत हुआ।
मुंबई इन्वेस्टर्स मीट से इंडस्ट्री की पार्टनरशिप और गहरी होने और नया निवेश आने की उम्मीद है। इससे ग्लोबल स्तर पर कॉम्पिटिटिव टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बनाने और भारत को टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन के लिए एक प्रमुख ग्लोबल डेस्टिनेशन में बदलने के सरकार के संकल्प को और बल मिलेगा।
--आईएएनए
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बांकीपुर, दतिया और मांजलपुर में उपचुनाव, भाजपा शासित राज्य में क्यों ऐसे परिणाम सामने आए?
तीन राज्यों की तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के परिणाम सामने आ चुके हैं. ये चुनाव नीट पेपर लीक पर युवाओं के आक्रोश के बीच हुए हैं. ऐसे में इसके राजनीतिक मायने दूरगामी हो सकते हैं. इसके परिणाम आने वाले दिनों में देखने को मिलेंगे. जिन तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए, वे सभी भाजपा शासित राज्य है. बिहार की पटना बांकीपुर सीट पर भाजपा का कब्जा था, लेकिन यहां से उसे करारी हार मिली है. मध्य प्रदेश की दतिया सीट अभी कांग्रेस के पास ही थी. उसने अपनी सीट बरकरार रखी है. वहीं गुजरात की मांजलपुर सीट हमेशा से भाजपा का गढ़ रहा है, यह गढ़ अभी भी मजबूती से कायम है, लेकिन किले में दरारें भी दिखने लगी हैं, इसे बहुत जल्द पाटने की नौबत आ सकती है.
पटना की बांकीपुर सीट पर बड़ा उलटफेर
सबसे बड़ा उलटफेर बिहार में राजधानी पटना की अहम सीट बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुआ है. यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे की वजह से खाली हो गई थी. ये राज्यसभा के लिए चुने गए हैं. 1995 से भाजपा इस सीट से भी नहीं हारी. नितिन नवीन के लिए यह निजी प्रतिष्ठा का सवाल था. इसकी वजह है कि 2006 में पिता नवीन किशोर सिन्हा की विरासत संभालने के बाद से वह लगातार पांच बार यहां का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.
भाजपा की रणनीति को झटका
पांच राज्यों में हुए हालिया विधानसभा चुनावों में भाजपा कहां इस बात से गदगद थी कि नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी ने पश्चिम बंगाल में भी बड़ी जीत दर्ज कर ली. लेकिन, हकीकत ये है कि नितिन नवीन अपनी सीट पर ही पार्टी के उम्मीदवार को उपचुनाव नहीं जिता सके. बकीपुर की हार सिर्फ बीजेपी की हार नहीं है.
इसको लेकर नितिन नवीन की नेतृत्व क्षमता पर सीधे सवालिया निशान लगेंगे. उन्हें पार्टी के तमाम धुरंधरों को दरकिनार कर राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर बिठाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परोक्ष फैसले को लेकर भी प्रश्न पूछे जाएंगे. यही नहीं, बिहार में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भाजपा ने सम्राट चौधरी के रूप में पहली बार अपना सीएम दिया है. यह उस राजनीति के लिए भी बड़ा झटका है.
भाजपा समर्थक 'अंध भक्त' नहीं हैं!
मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर भी कांग्रेस की जीत एक तरह से भाजपा के लिए मायूसी वाले रिजल्ट है. प्रदेश में मोटे तौर पर दो दशकों से अधिक से बीजेपी की सरकारें हैं. 2023 में यह सीट कांग्रेस के हाथों में जरूर थी, लेकिन उससे पहले तीन-तीन बार भाजपा यहां से लगातार जीत चुकी है. यही नहीं, इस बार कांग्रेस प्रत्याशी ने यहां जीत का मार्जिन भी बढ़ाया है. इस तरह से बांकीपुर से दतिया तक मतदाताओं ने विपक्ष के हाथों में यह नैरेटिव जरूर थमा दिया है कि भाजपा के खिलाफ लोग अब खड़े होने लगे हैं.
पीएम मोदी ने अपना पहला संसदीय चुनाव जीता
गुजरात की मांजलपुर विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी को बड़ी जीत हासिल किया है. 2008 में परिसीमन के बाद वडोदरा जिले में यह सीट बनी और पहली बार 2012 में हुए चुनाव से लेकर 2026 के उपचुनाव नाव तक में भाजपा यहां कभी नहीं हारी. यह बड़ी जीत दर्ज करती रही. मांजलपुर सीट का भाजपा के लिए अहमियत इसी से समझा जा सकता है कि यह वडोदरा लोकसभा के अंदर आती है. यहां से 2014 में वाराणसी के अलावा पीएम मोदी ने अपना पहला संसदीय चुनाव जीता था. लेकिन, अगर 2022 के विधानसभा चुनाव और मौजूदा उपचुनाव के परिणामों की तुलना करें तो अभी बीजेपी प्रत्याशी को 67% से ज्यादा वोट जरूर मिले हैं, लेकिन 2022 के 75.85% वोट शेयर से इसमें काफी गिरावट आ चुकी है. गुजरात में 2027 के आखिर में विधानसभा चुनाव हैं और मांजलपुर के वोटरों ने बीजेपी को अभी से संभल जाने का संदेश दे दिया.
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