प्रधानमंत्री मोदी की पोस्ट हटाने पर संसदीय समिति ने मेटा को फटकार लगाई
नई दिल्ली, 3 अगस्त (आईएएनएस)। संचार और सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति ने सोमवार को राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा (नीट) से जुड़ी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आधिकारिक फेसबुक पोस्ट को कुछ समय के लिए हटाए जाने पर गंभीर चिंता जताई। समिति ने इसे वैश्विक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के कामकाज और जवाबदेही पर महत्वपूर्ण सवाल उठाने वाला मामला बताया।
सूत्रों के मुताबिक, सोशल और डिजिटल प्लेटफॉर्म और उनके नियमन विषय की समीक्षा के लिए हुई बैठक में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली समिति ने मेटा, गूगल, यूट्यूब, स्नैपचैट, एक्स के प्रतिनिधियों के साथ-साथ गृह मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा।
सूत्रों के अनुसार, अध्यक्ष ने मंत्रालयों और सोशल मीडिया कंपनियों से कहा कि वे सवालों के लिखित जवाब 10 दिनों के भीतर सौंपें। उन्होंने कहा कि इससे समिति को पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता का भरोसा सुनिश्चित करते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म के नियमन पर रिपोर्ट तैयार करने में मदद मिलेगी।
अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री की आधिकारिक फेसबुक पोस्ट का कुछ समय के लिए गायब होना एक बेहद गंभीर मामला था, जिसे महज तकनीकी गड़बड़ी कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। समिति यह जानना चाहती है कि पोस्ट क्यों हटाई गई, वह कितने समय तक उपलब्ध नहीं रही, और भविष्य में सरकारी संचार को प्रभावित करने वाली ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या सुरक्षा उपाय मौजूद थे।
समिति ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री के आधिकारिक अकाउंट के साथ ऐसी घटना हो सकती है, तो इससे आम यूजर्स की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा होती है। समिति ने मेटा से कहा कि वह कंटेंट की रिपोर्टिंग से लेकर उसे वापस बहाल करने तक की पूरी ऑडिट ट्रेल दे, यह बताए कि कंटेंट को हटाना सिस्टम की खराबी की वजह से हुआ या जानबूझकर किया गया था, और अपने ऑटोमेटेड कंटेंट मॉडरेशन और रेकमेंडेशन सिस्टम की भूमिका के बारे में साफ-साफ बताए।
पैनल ने यह भी सवाल उठाया कि क्या डिजिटल इंटरमीडियरीज (मध्यस्थों) को नियंत्रित करने वाला भारत का मौजूदा कानूनी ढांचा पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए काफी है। समिति ने सरकार से पूछा कि क्या ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए ज्यादा मजबूत कानूनी प्रावधानों की जरूरत है और इस पर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और गृह मंत्रालय, दोनों की राय मांगी।
समिति ने मेटा के कंटेंट मॉडरेशन के तरीकों को लेकर भी व्यापक चिंताएं जताईं, जिनमें बिना वजह कंटेंट हटाना, अकाउंट पर पाबंदियां लगाना और भारत-समर्थक व सरकार-समर्थक पेजों की विजिबिलिटी (दृश्यता) कम करना शामिल है। समिति ने पूछा कि क्या कंपनी की बदमाशी (बुलिंग), उत्पीड़न, हेट स्पीच और सुनियोजित तरीके से दुर्व्यवहार से जुड़ी नीतियों को निष्पक्ष और बिना किसी भेदभाव के लागू किया जा रहा है?
समिति ने बढ़ते साइबर अपराधों पर भी चर्चा की और बताया कि 2025 में साइबर अपराध की लगभग 28.15 लाख शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें करीब 22,495 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। समिति ने सवाल उठाया कि प्लेटफॉर्म की कंप्लायंस रिपोर्ट में ऑनलाइन धोखाधड़ी को एक अलग कैटेगरी के तौर पर क्यों नहीं दिखाया गया और एक जैसे रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड्स की मांग की।
समिति ने बीबीसी-आई की उस जांच पर भी चिंता जताई जिसमें आरोप लगाया गया था कि इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट वाले विज्ञापन दिखाए गए, साथ ही एआई से बनी गलत जानकारी और डीपफेक के प्रसार और सोशल मीडिया पर नकली इन्वेस्टमेंट स्कैम के मामलों पर भी चिंता जाहिर की।
--आईएएनएस
एमएस/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
सिंधिया ने ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन के लिए 10,000 करोड़ रुपए के निवेश का लक्ष्य रखा
मुंबई, 3 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया मंगलवार को यहां एक इन्वेस्टर्स मीट और रोड शो आयोजित करेंगे। इसका मकसद भारत के पहले टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (टीएमजी) के लिए ज्यादा से ज्यादा इंडस्ट्री की भागीदारी और निवेश जुटाना है। इस जोन को पिछले हफ्ते मध्य प्रदेश के ग्वालियर में लॉन्च किया गया था।
बयान में कहा गया है कि भारत के पहले टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में निवेश के 10,000 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार करने की उम्मीद है।
टीएमजी के लॉन्च के बाद राष्ट्रीय राजधानी में पहली इन्वेस्टर्स राउंडटेबल बैठक हुई थी। सिंधिया ने घोषणा की कि 3,500 करोड़ रुपए के निवेश का वादा मिला है, जिससे लगभग 14,000 रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। यह भारत के बढ़ते टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में इंडस्ट्री के मजबूत भरोसे को दिखाता है।
मुंबई इन्वेस्टर्स मीट और रोड शो इस राष्ट्रीय पहल का अगला चरण है, जिसका मकसद भारत के पहले टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन के लिए ज्यादा से ज्यादा इंडस्ट्री की भागीदारी और निवेश जुटाना है। यह कार्यक्रम देश में वर्ल्ड-क्लास टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के विकास को तेजी देने के लिए प्रमुख टेलीकॉम मैन्युफैक्चरर्स, टेक्नोलॉजी कंपनियों, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स, कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स और इन्वेस्टर्स को एक साथ लाएगा।
इस मौके पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, टेलीकॉम विभाग के सचिव अमित अग्रवाल और मध्य प्रदेश सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज मंडलोई मौजूद रहेंगे।
बयान में कहा गया है कि भारत का पहला टीएमजी बनाना टेलीकॉम सेक्टर में आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम है। मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च और डेवलपमेंट, डिजाइन, टेस्टिंग और इनोवेशन के लिए एक इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम बनाकर, इसका मकसद घरेलू वैल्यू चेन को मजबूत करना, इंपोर्ट पर निर्भरता कम करना, स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना, एक्सपोर्ट बढ़ाना और भारत को टेलीकॉम प्रोडक्ट्स और अगली पीढ़ी की टेक्नोलॉजी के लिए एक भरोसेमंद ग्लोबल हब के तौर पर स्थापित करना है।
शुरुआती इन्वेस्टर्स राउंडटेबल में इंडस्ट्री से मिले जबरदस्त रिस्पॉन्स ने इस पहल की बड़ी संभावनाओं को उजागर किया। प्रमुख कंपनियों और टेलीकॉम इंडस्ट्री के कई दिग्गजों ने इस प्रोजेक्ट में बड़े निवेश का वादा किया, जिससे भारत के पॉलिसी फ्रेमवर्क और मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं में उनका भरोसा और मजबूत हुआ।
मुंबई इन्वेस्टर्स मीट से इंडस्ट्री की पार्टनरशिप और गहरी होने और नया निवेश आने की उम्मीद है। इससे ग्लोबल स्तर पर कॉम्पिटिटिव टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बनाने और भारत को टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन के लिए एक प्रमुख ग्लोबल डेस्टिनेशन में बदलने के सरकार के संकल्प को और बल मिलेगा।
--आईएएनए
एमएस/
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