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Ajit Pawar Last Rites: 'दादा' से लिपट कर खूब रोईं सुप्रिया सुले |Sunetra Pawar | Plane Crash |Shinde

Ajit Pawar Last Rites: 'दादा' से लिपट कर खूब रोईं सुप्रिया सुले |Sunetra Pawar | Plane Crash |Shinde #ajitpawardeath #sharadpawar #planecrash #maharashtra #lastrites #sunetrapawar महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के न‍िधन की खबर ने उनके परिवार समेत पूरे महाराष्ट्र को स्तब्ध कर दिया है. आज अजित पवार के अंतिम संस्कार पर उनके समर्थकों का जनसैलाब पहुंचा है. वहीं, इस पल में उनका परिवार बेहद भावुक नज़र आ रहा है! देखिए... news18 live | aaj ka taaja khabar | आज की ताजा खबर | up live news | news18 up live news | up news live | aaj ke taaja khabar | hindi hews | latest news | news in hindi | hindi samachar | hindi khabar | n18oc_uttar_pradesh SUBSCRIBE to get the Latest News & Updates - http://bit.ly/News18UP News18 Mobile App - https://onelink.to/desc-youtube Follow Us on Social Media: Website: https://bit.ly/3auydBL Twitter: https://twitter.com/News18UP https://twitter.com/News18_UK Facebook: https://www.facebook.com/News18UP/ https://www.facebook.com/News18UK/ About Channel: News18 UP Uttarakhand is one of India's leading Hindi news channel and can be watched live on YouTube. News18 UP Uttarakhand news channel is a part of Network 18. Topics such as politics, education, health, environment, economy, business, sports, and entertainment are covered by this channel. The channel gives nationwide coverage. News18 UP Uttarakhand ,भारत का एक मात्र भरोसेमंद और लोकप्रिय न्यूज़ चैनल है। यह चैनल नेटवर्क १८ का हिस्सा है। यह चैनल उत्तरप्रदेश एवं उत्तराखंड के सभी क्षेत्रीय खबरों के साथ साथ सरकार, राजनीति, पर्यावरण , खेल-कूद से जुड़ी राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय खबरें प्रसारित करता है|

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एक्टर विशाल जेठवा की मां ने सैनेटरी पैड बेचे:घरों में बर्तन धोए; मर्दानी–2 का खूंखार विलेन होमबाउंड का हीरो बना, फिल्म ऑस्कर पहुंची

एक्टर विशाल जेठवा की नीरज घायवान के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘होमबाउंड’ भले ही ऑस्कर की रेस से बाहर हो गई हो। लेकिन इस फिल्म ने विशाल को इंटरनेशनल स्टार बना दिया। कान्स फिल्म फेस्टिवल सहित इस फिल्म की कई प्रमुख इंटरनेशनल फेस्टिवल में स्क्रीनिंग हुई। जहां पर फिल्म को खूब सराहा गया। इस फिल्म के जरिए विशाल जेठवा भले ही ग्लोबल मंच पर छा गए हों, लेकिन यहां तक पहुंचने की उनकी जर्नी इतनी भी आसान नहीं थी। एक्टर का बचपन बहुत ही गरीबी में मुंबई की चॉल में बीता। उनके पिता नरेश जेठवा नारियल पानी बेचते थे। विशाल जब 13 साल के थे, तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई। विशाल जेठवा की मां प्रीति जेठवा ने परिवार का पेट पालने के लिए घरों में सफाई का काम किया, यहां तक कि सैनिटरी पैड्स बेचे। लेकिन बेटे के सपने को कभी टूटने नहीं दिया। मां के ही सपोर्ट से विशाल एक्टर बने। शुरुआत में उन्हें काफी रिजेक्शन का समाना करना पड़ा, लेकिन कभी हिम्मत नहीं हारी। आज की सक्सेस स्टोरी में जानेंगे, विशाल जेठवा के करियर और उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास किस्से उन्हीं की जुबानी.. मेरे पिता ने नारियल पानी भी बेचा है मैं लोअर मिडिल क्लास फैमिली से आता हूं। आप इसे गरीब परिवार भी कह सकते हैं। मेरे पिता ने नारियल पानी भी बेचा है। बियर बार के लिए सींग-चने के पैकेट भी बनाए हैं। मैं खुद बियर बार के सींग-चने के पैकेट बनाने में उनकी मदद करता था। मैं 13 साल का था, जब पिता की मृत्य हो गई। यह 2008 की बात है। वह सबसे बुरा दौर था। उस समय हम लोग मलाड के चॉल वाले घर पर रहते थे। घर में पंखा और एसी तक नहीं था। बहुत सारा कर्ज हो गया था। उस कर्ज को चुकाने के लिए हमें अपना घर बेचना पड़ा, फिर भी हम सिर्फ 20 प्रतिशत ही कर्ज उतार पाए थे। हम लोग मलाड से मीरा रोड किराए के घर पर शिफ्ट हो गए थे। गुजराती मीडियम स्कूल से पढ़ाई की मैंने मलाड में गुजराती मीडियम स्कूल से छठी क्लास तक पढ़ाई की। उसके बाद मीरा रोड शिफ्ट हो गए। आगे की पढ़ाई भायंदर के अभिनव विद्या मंदिर से की। उसके बाद कांदीवली के ठाकुर कॉलेज में बी.कॉम में एडमिशन लिया, लेकिन ग्रेजुएशन पूरा नहीं कर पाया। पिता की मौत के बाद मेरी मां को बहुत संघर्ष करना पड़ा। परिवार का पेट पालने के लिए मां ने घरों में झाड़ू-पोछा लगाया, यहां तक कि सैनिटरी पैड्स भी बेचे। मां ने हर कदम पर मेरा साथ दिया। कड़ा संघर्ष, भूख और गरीबी बहुत देखी ग्रेजुएशन बीच में इस लिए छोड़ दिया ताकि मैं भी कुछ काम कर सकूं। मैंने कड़ा संघर्ष देखा, भूख और गरीबी बहुत देखी। कुछ ना कुछ काम करके घर का सहारा बनाना चाह रहा था। बैकग्राउंड डांसर से करियर की शुरुआत 2009 में मैं बैकग्राउंड डांसर बन गया था। मैं ‘सा रे गा मा पा लिल चैंप्स’ में बैकग्राउंड डांसर था। उसके ग्रैंड फिनाले में सलमान खान सर, अजय देवगन सर और असीन मैम अपनी फिल्म ‘लंदन ड्रीम्स’ के प्रमोशन के लिए आए थे। सलमान से मिलने का मौका हाथ से निकल गया मैं भी उन्हीं डांसर्स में से एक था, जिन्हें उनके पीछे परफॉर्म करना था। बैकस्टेज में हमें साफ हिदायत दी गई थी कि डांस खत्म होने के बाद कोई भी सलमान सर के पास नहीं जाएगा और उन्हें परेशान नहीं करेगा। मैं एक गुड बॉय की तरह वहीं खड़ा रहा। लेकिन जैसे ही डांस खत्म हुआ, बाकी सभी लोग सलमान सर के पास चले गए। उस वक्त मुझे बहुत लेफ्ट-आउट महसूस हुआ। लगा कि मौका हाथ से निकल गया। एक दिन एक्टिंग क्लास देखी, तो लगा डांस मेरे लिए नहीं है। क्लास जॉइन की, तो एक्टिंग मेरी हॉबी बन गई। एक्टिंग क्लास जॉइन की जब मुझे एक्टिंग क्लास जॉइन करनी थी, तब हमारी फाइनेंशियल कंडीशन ज्यादा अच्छी नहीं थी। ऐसे में मम्मी ने ही बहुत जुगाड़ करके बात की। कहीं इंस्टॉलमेंट में फीस भरवाई, कहीं कम पैसे करवाए, कहीं डिस्काउंट दिलवाया। अलग-अलग तरीकों से उन्होंने सब अरेंज किया और मुझे एक्टिंग क्लास में डाला। दरअसल, उन्हें भी इस फील्ड का शौक था। शायद उनके बचपन के कुछ सपने जो पूरे नहीं हो पाए, वो मुझमें देख रही थीं। उस समय डेडिकेशन इतना था कि बारिश में साइकिल से भीगते हुए क्लास जाता था। गुरुजी कहते, "विशाल, तुम गीले हो गए हो , फिर भी आ गए?" लेकिन एक्टिंग से मुझे प्यार इतना था कि कुछ भी मुश्किल नहीं लगता था। नुक्कड़ नाटक में छोटे रोल्स में भी लोग तालियां बजाते थे। मेरे जोक्स पर हंसते थे। मुझे लगने लगा कि अब रास्ते खुद बनने लगे हैं। पहली बार एक्टिंग की क्लास बोरिंग लगी हालांकि पहली बार एक्टिंग की क्लास बोरिंग लगी थी। सोचा था कि शाहरुख खान वाले जैसे बड़े डायलॉग मिलेंगे। गुरुजी ने कहा था कि इंडस्ट्री में आए हो? सेल्फ ब्रेक मत लो, कभी हार मत मानो। एक्टर बनने से पहले अच्छा इंसान बनो। सेट पर जो कपड़े मिलें, बिना शिकायत के पहनो। डायरेक्टर जो कहे, वैसा करो। मैं रोज ऑडिशन में फेल हो रहा था मैंने एक्टिंग के लिए ऑडिशन देना शुरू किया। हर रोज ऑडिशन में फेल होकर घर आता था। बहुत कोशिश के बाद भी कोई रिजल्ट सामने नहीं आ रहा था। मुझे दुखी देखकर मां बहुत चिंतित होती थीं। इसी चिंता में वो कहती थीं कि नहीं हो रहा है तो छोड़ दे। लेकिन फिर एक्टिंग क्लास की एक कविता याद आती थी। "लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।’’ इसे गुरु जी कहते थे कि रोज पढ़कर आना है। उससे सीख मिली कि जिंदगी ट्राई करते रहने का नाम है। रिजल्ट न मिले तो भी जारी रखो। ट्राई बंद करना ही सबसे बड़ा फेलियर है। छोटे पर्दे पर शुरुआत महाराणा प्रताप से हुई छोटे पर्दे पर मेरी शुरुआत सोनी टीवी के शो ‘भारत का वीर पुत्र- महाराणा प्रताप’ से हुई। इसमें मैंने युवा अकबर का रोल निभाया था। इसमें काम मिलने की कहानी बहुत ही दिलचस्प है। मैं असल में इस शो के लिए मेरा भाई ऑडिशन देने गया था। मैं भी उसके साथ चला गया। वहां मैंने देखा कि ज्यादातर लड़के पतले-दुबले थे। तभी उन्होंने मुझसे कहा कि आप भी ऑडिशन दे दीजिए, जबकि असल में टेस्ट मेरे भाई का था। मैंने भी ऑडिशन दे दिया। उन्हें मेरा ऑडिशन पसंद आया और उन्होंने मुझे दोबारा बुलाया। मैंने एक-दो बार और ऑडिशन दिए, और हर बार उन्हें मेरा काम अच्छा लगा। उस समय अकबर के रोल के लिए तीन बार कास्टिंग बदली गई थी। दो अकबर बदल चुके थे, और मैं तीसरा था। पहले मैं शॉर्टलिस्ट हुआ, लेकिन मेरा फाइनल सिलेक्शन नहीं हुआ। मुझे बहुत बुरा लगा। पहली बार बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट (मेल) अवॉर्ड मिला बाद में जब मैंने टीवी पर देखा, तो कोई और लड़का वह रोल कर रहा था। लेकिन वह लड़का भी एक-दो एपिसोड या एक-दो दिन काम करने के बाद कुछ हेल्थ इश्यूज की वजह से शो छोड़कर चला गया। फिर दूसरा लड़का आया, वह भी एक-दो दिन काम करने के बाद किसी वजह से निकल गया। तीसरी बार नंबर लग गया। सीरियल में रिप्लेसमेंट तो आम है। दो एपिसोड ये अकबर, फिर निकालो। फिर मेरा टर्न आया। सबने एक्सेप्ट किया, लोगों को मजा आया। बस, जिंदगी बन गई। इस शो के लिए मुझे इंडियन टेली अवॉर्ड्स 2015 में बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट (मेल) का अवॉर्ड मिला था। मुझे अकबर के बारे में ज्यादा नहीं पता था हालांकि ‘भारत का वीर पुत्र- महाराणा प्रताप’ करते वक्त मुझे अकबर के बारे में ज्यादा नहीं पता था। लगा कि राजा है, रॉयलिटी जैसा चलेगा, बात करेगा। सोचा प्रताप हीरो है तो अकबर उसका दोस्त होगा। उस समय बेवकूफी भरी सोच थी, लेकिन उसी में काम किया। करते-करते सब सीख गया। एक्टिंग छोड़ने का मन बना लिया था जिंदगी में कई बार गिव अप करने का मन आया है। एक बार तो ऐसा समय भी था जब मैं लगातार सीरियल्स कर रहा था और मुझे लगने लगा था कि शायद मेरे अंदर अब कुछ नया बचा ही नहीं है। वही टाइप के रोल आने लगे थे। मन में सवाल उठने लगे कि अब मैं लोगों को क्या नया दिखाऊं? जो भी कला थी, क्या वो खत्म हो चुकी है? शायद लोग बस वही देखना चाहते हैं, और शायद मेरे अंदर भी अब वही बचा है। तब ऐसा लगा कि छोड़ देना चाहिए, बहुत हो गया। मम्मी के सामने फूट-फूट कर रोया उस वक्त मैंने मम्मी से बात की। मैं सच में रो रहा था। अंदर से पूरी तरह टूटा हुआ। आंसू रुक ही नहीं रहे थे। मम्मी ने मुझे समझाया, हौसला दिया। भले ही मैंने गिव अप नहीं किया, लेकिन मन में ये ख्याल जरूर था कि अब बस, छोड़ देता हूं। हालांकि टीवी कभी नहीं छोड़ा। काम मिलता रहा, लेकिन अंदर का एक्टर पूछता रहा कि इससे आगे क्या? बेहतर क्या? लगा कि मनचाहा काम नहीं मिल रहा। एक दिन का रोल भी करता। फिर सोचा कि अब कुछ बचा नहीं। ‘मर्दानी 2’ ने सेल्फ डाउट से बाहर निकाला फिर मेरी जिंदगी में ‘मर्दानी 2’ आई। इसमें यशराज फिल्म्स की कास्टिंग डायरेक्टर शानू शर्मा मैम का बहुत बड़ा हाथ है। उन्होंने मुझे सेल्फ डाउट से बाहर निकाला। आज मैं खुद पर शक नहीं करता। कभी-कभी मौके सही समय पर नहीं मिलते, थोड़ा वक्त लग जाता है, लेकिन खुद पर डाउट करना सबसे गलत चीज है। एक बार शानू मैम ने मुझे फोन पर बताया कि उन्हें मेरा ऑडिशन पसंद आया है। तब मैं सोचने लगा कि जो इंसान बॉलीवुड में इतने बड़े-बड़े स्टार्स नहीं, बल्कि पर्सनैलिटीज बनाती है, जिसने बेहतरीन से बेहतरीन एक्टिंग देखी है, उसे मेरे काम में क्या अच्छा लगा होगा? वो मुझे फोन करके बात क्यों कर रही हैं? तभी मुझे एहसास हुआ कि अगर कोई मुझमें इतना कॉन्फिडेंस देख पा रहा है, तो वो कॉन्फिडेंस मेरे अंदर पहले से ही था। और फिर मैं ‘मर्दानी 2’ में सिलेक्ट हुआ। उसके बाद मेरी जिंदगी सच में बदल गई। एक साल तक ‘मर्दानी 2’ के किरदार से बाहर नहीं निकल पाया मर्दानी 2 का सनी का किरदार मेरे लिए सबसे मुश्किल अनुभवों में से एक था। मैं करीब एक साल तक उस किरदार से बाहर नहीं निकल पाया। शूटिंग खत्म हो चुकी थी, लेकिन मन में यही चलता रहता था कि कहीं पैचवर्क का कॉल आ गया तो? अगर मैंने किरदार छोड़ दिया, तो वापस उसमें कैसे जाऊंगा?” अपने कपड़े पहनता था तो अनकंफर्टेबल लगता था। फिर धीरे-धीरे मैंने खुद को वापस लाने के लिए पुराने दोस्तों से मिलना शुरू किया, म्यूजिक सुना, फैमिली के साथ वक्त बिताया और खुद से कहा कि अब फिल्म खत्म हो गई है, इस किरदार को जाने देना ठीक है।” सलमान सर के साथ शूट में बहुत नर्वस था सलमान खान की फिल्म ‘टाइगर 3’ में मेरा किरदार बहुत छोटा था। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान मैं बहुत नर्वेस था। जब मैं टाइगर के शूट पर पहुंचा, तो मुझसे डायलॉग ही नहीं निकल रहे थे। लगातार फम्बल हो रहे थे। सभी लोग हैरान थे कि आज मुझे क्या हो गया है। जबकि उसी सेट पर मैंने मर्दानी 2 फिल्म की शूटिंग पूरी की थी, वो भी बिना एक भी फम्बल के, क्योंकि मैं पूरी तरह तैयार होकर गया था। तब मैंने साफ-साफ बता दिया कि मैं पहली बार सलमान सर के साथ शूट कर रहा हूं और बहुत नर्वस हूं। यह बात कहने के बाद मैं थोड़ा रिलैक्स हो गया। सेट पर कभी सुनता कि ‘एसके सर आ रहे हैं’, कभी उन्हें लोगों से मिलते, हंसते, कभी साइकिल पर सेट पर आते देखता था। एक कलाकार के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऑडियंस की तरह सलमान खान को देखना मुझे बेहद अच्छा लग रहा था। ‘होमबाउंड’ रोल के लिए चोट के बावजूद ऑडिशन दिया होमबाउंड मुझे ऑडिशन के जरिए मिली थी। उस वक्त मेरे पैर में गंभीर चोट लगी थी। पैर में प्लास्टर और टांके लगे थे। लेकिन मैंने कास्टिंग डायरेक्टर्स से कहा कि प्रोड्यूसर या डायरेक्टर को मत बताना, वरना वो सोचेंगे कि मैं शूट नहीं कर पाऊंगा। क्योंकि मुझे ये रोल किसी भी हालत में छोड़ना नहीं था। मेरे कई राउंड ऑडिशन हुए। फाइनल राउंड ऑडिशन ईशान खट्टर के साथ हुआ। ताकि पता चल सके कि फिल्म में हमारी केमिस्ट्री कैसे दिखेगी। फिल्म देखने के बाद मम्मी रो रहीं थीं एक पार्टी में एक दोस्त ने सच में मेरे पैर छुए। पहले मुझे लगा मजाक कर रहा है, लेकिन वो बिल्कुल सीरियस था। तब समझ आया कि हमारा काम लोगों को कितनी गहराई से छू सकता है। कान्स फिल्म फेस्टिवल में मम्मी ने पहली बार फिल्म देखी थी। वहां 9 मिनट का स्टैंडिंग ओवेशन मिला। मम्मी रो रही थीं। मैं उन्हें पहली बार इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में लेकर गया था, वो पल हमेशा याद रहेगा। मुझे पिताजी की बहुत याद आती है। उन्होंने ये सब देखा ही नहीं। काश आज पापा जिंदा होते मुझे अपने बुरे दिनों से ज्यादा अच्छे दिनों में उनकी बहुत याद आती है। क्योंकि उन्हें कभी अच्छी चीजे नसीब नहीं हुईं। वो चाहते थे कि घर में सोफा हो, हमारे पास एक बाइक हो, एसी वाले कमरे में मैं सोऊं। यही उनकी छोटी-छोटी इच्छाएं थीं। आज जब पीछे मुड़कर देखता हूं, तो लगता है जिंदगी बहुत बदल गई है। घर में एसी है, सोफा है, ठीक-ठाक घर है, अच्छी गाड़ी में सफर कर पाता हूं। तब मन में ख्याल आता है कि काश वो होते। उन्हें ब्लेजर पहनाता, अपने साथ इवेंट्स में ले जाता, काम पर साथ ले जाता, वो मेरे लिए गाड़ी चलाते। ये सब सोचकर दिल भर आता है। जिंदगी में जो चला गया, वो वापस नहीं आता। अब उसे स्वीकार करना ही जीवन है। __________________________________________ पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़िए... रानी मुखर्जी की कद-काठी, रंग और आवाज का उड़ा मजाक:लोगों ने कहा- हीरोइन बनने के लायक नहीं, 8 फिल्मफेयर और नेशनल अवॉर्ड मिले बॉलीवुड में अक्सर यह माना जाता है कि फिल्मी परिवार से आने वाले कलाकारों के लिए रास्ते आसान होते हैं, लेकिन रानी मुखर्जी की कहानी इस धारणा को पूरी तरह तोड़ देती है। पिता के सख्त विरोध, इंडस्ट्री में मजाक, आर्थिक परेशानियों और उनके आत्मविश्वास पर लगातार हमले किए गए।पूरी खबर पढ़ें..

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