Delhi Court ने 2018 के Metro लूट और फायरिंग मामले में दो आरोपियों को किया बरी
नयी दिल्ली, दो अक्टूबर दिल्ली की एक अदालत ने 2018 में एक मेट्रो स्टेशन पर एक व्यक्ति से लूटपाट करने और गोली मारने के आरोपी दो लोगों को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष उनकी हमलावरों के रूप में पहचान स्थापित करने में विफल रहा और बरामद पिस्तौल को गोलीबारी से वैज्ञानिक तरीके से जोड़ नहीं सका। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ट्विंकल वाधवा ने दीपक उर्फ गोलू और शानू उर्फ फुरकान के खिलाफ मामले की सुनवाई की।
दोनों पर करावल नगर थाने में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। अदालत ने गत 28 सितंबर के आदेश में कहा कि चश्मदीद गवाह ने आरोपियों की पहचान नहीं की और अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपना मामला उचित संदेह से परे साबित नहीं कर पाया है। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता आस मोहम्मद ही घटना का एकमात्र चश्मदीद गवाह था और अभियोजन पक्ष के मामले की पुष्टि के लिए न तो कोई सीसीटीवी फुटेज थी और न ही कोई अन्य चश्मदीद गवाह था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 27 अप्रैल 2018 को आस मोहम्मद जवाहर नगर मेट्रो स्टेशन गया था, जहां तीन लड़कों ने उसका मोबाइल फोन छीनने की कथित तौर पर कोशिश की। उसके विरोध करने पर उनमें से एक ने देसी पिस्तौल से उस पर कथित तौर पर गोली चला दी, जिससे उसका दाहिने हाथ घायल हो गया। अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि पुलिस ने अगले दिन दीपक और शानू को पकड़ लिया और शिकायतकर्ता ने उनकी पहचान की।
इसके बाद पुलिस ने शानू की निशानदेही पर एक देसी पिस्तौल बरामद की। हालांकि, अदालत के समक्ष पेश होने पर शिकायतकर्ता ने इस बात से इनकार किया कि दोनों आरोपी हमलावर थे। उसने पहले उनकी पहचान किए जाने की बात से भी इनकार किया।
अदालत ने कहा, ‘‘क्योंकि आरोपियों को अपराध से जोड़ने वाला एकमात्र गवाह अभियोजन पक्ष के मामले के समर्थन में नहीं आया, इसलिए आरोपियों की हमलावरों के रूप में पहचान साबित नहीं हो सकी।’’ अदालत ने कहा कि चश्मदीद गवाह के अपने बयान से मुकर जाने, हथियार की संदिग्ध बरामदगी और फोरेंसिक साक्ष्य से कोई संबंध स्थापित नहीं होने के कारण अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपना मामला उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
CEC के खिलाफ Jantar Mantar पर प्रदर्शन, AAP नेताओं और छात्रों समेत 700 हिरासत में
नयी दिल्ली, दो अक्टूबर दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को जंतर-मंतर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं सौरभ भारद्वाज, संजीव झा, आतिशी और संजय सिंह के साथ-साथ कुछ छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं सहित 700 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। राजनीतिक दल और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) तथा अन्य छात्र संगठनों के सदस्य मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं और बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि स्थल पर किसी भी अनधिकृत जमावड़े को रोकने के लिए निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है और अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है।
पुलिस ने कहा कि उसने आप नेता और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह को नॉर्थ एवेन्यू में रोक दिया, जिससे वह प्रदर्शन स्थल की ओर नहीं बढ़ सके। भारद्वाज ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बावजूद उन्हें और झा को हिरासत में लिया गया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से आंदोलन जारी रखने और जंतर-मंतर पहुंचने का आग्रह किया।
पुलिस के एक सूत्र ने बताया कि एसएफआई के करीब 700 कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश की और उन्हें अशोका रोड गोलचक्कर पर रोक दिया गया, जिनमें से कई लोगों को हिरासत में ले लिया गया। एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि आप नेताओं, आइसा, एसएफआई और अन्य छात्र संगठनों सहित लगभग 700 प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर और उसके आसपास से हिरासत में लिया गया। पहले एक अन्य अधिकारी ने बताया था कि करीब 150 लोगों को हिरासत में लिया गया।
प्रदर्शन स्थल और आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवाएं भी निलंबित कर दी गई हैं। पुलिस ने जंतर-मंतर और उसके आसपास सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं, अतिरिक्त कर्मियों को तैनात किया गया है और प्रदर्शनकारियों को स्थल तक पहुंचने से रोकने के लिए विभिन्न बिंदुओं पर बैरिकेड लगाए गए हैं। दिल्ली पुलिस के जवान भी बार-बार सार्वजनिक घोषणा कर रहे थे और लोगों से जंतर-मंतर पर इकट्ठा न होने के लिए कह रहे थे क्योंकि विरोध स्थल पर किसी भी सभा की अनुमति नहीं दी गई थी।
एसएफआई की महासचिव आइशी घोष ने कहा कि डीवाईएफआई और एसएफआई के कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है। घोष ने कहा, ‘‘दिल्ली पुलिस राजधानी में अपराधों को रोकने में सक्षम नहीं है, लेकिन जब ज्ञानेश कुमार जैसे किसी व्यक्ति की सुरक्षा की बात आती है, तो वे सड़कों पर उतर आते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह लोकतंत्र नहीं है। अगर पुलिस को लगता है कि वे हमें हिरासत में लेकर आंदोलन को रोक सकते हैं, तो हम उन्हें बताना चाहते हैं कि यह तो सिर्फ शुरुआत है।’’ आइसा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने हिरासत के दौरान महिलाओं सहित प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया।
जंतर-मंतर के पास हिरासत में लिए जाने के दौरान संगठन के एक सदस्य ने कहा, चाहे आप कितनी भी लाठियां बरसाओ या हममें से कितने लोगों को जेल में डाल दो, ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना ही होगा। एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ समेत कई कार्यकर्ताओं को भी मौके से हिरासत में लिया गया। जाखड़ को संगठन के कार्यालय से जंतर-मंतर की ओर पैदल मार्च के दौरान हिरासत में लिया गया।
उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में, आरोप लगाया कि एनएसयूआई के कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है। उन्होंने दावा किया कि मार्च के दौरान कार्यकर्ताओं पर पुलिस कार्रवाई की गई थी। जाखड़ ने कहा, लोगों के वोटों की आवाज को किसी भी ताकत से दबाया नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि संगठन का लोकतंत्र के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रहेगा। प्रदर्शन स्थल से एनएसयूआई के भी कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शनकारियों को फिरोजशाह रोड पर बैरिकेड लांघते हुए भी देखा गया।
एक वीडियो संदेश में भारद्वाज ने कहा कि पुलिस ने उन्हें बताया कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी, लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि जब जंतर-मंतर एक निर्धारित प्रदर्शन स्थल है तो लोकतंत्र में प्रदर्शन करने के लिए अनुमति की क्या आवश्यकता है। भारद्वाज ने यह भी कहा कि पार्टी ने करीब एक हफ्ते पहले प्रदर्शन की अनुमति मांगने के लिए पत्र सौंपे थे। भारद्वाज ने कहा, ‘‘हम अपनी चिंताओं को उठाने के लिए अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर के पास के कई मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए हैं।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे निकटतम खुले मेट्रो स्टेशन तक यात्रा करें और यदि संभव हो तो पैदल चलकर प्रदर्शन स्थल तक पहुंचे। दिल्ली मेट्रो ने राजीव चौक, केंद्रीय सचिवालय और जंतर-मंतर सहित 12 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद कर दिए हैं। पुलिस ने कहा कि इलाके में अनधिकृत सभा को रोकने के लिए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
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