फ्रांस में सांसद कह रहे हैं नाटो छोड़ो ब्रिटेन अमेरिका की डिफेंस कंपनियों की जांच कर रहा है। यूरोप कह रहा है कि हमें यूएस की जरूरत ही क्या है? मतलब साफ है यूरोप अब अमेरिका की छाया से बाहर निकलना चाहता है। दरअसल फ्रांस के अंदर इस समय पार्लियामेंट लेवल पर खुली बहस चल रही है। मांग क्या है? मांग यह है कि एक ऐसा कानून लाया जाए जिससे फ्रांस नाटो से पूरी तरह पुल आउट कर सके। तर्क बेहद सीधा है। हमारी सुरक्षा, हमारी डिफेंस और हमारी रणनीति सब कुछ हम खुद तय करेंगे। अमेरिका नहीं। फ्रांस का कहना है कि हम डिफेंस के मामले में पूरी तरह स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी चाहते हैं। अब बात सिर्फ नाटो की नहीं रह गई। फ्रांस ने एक्शन लेना शुरू कर दिया है। फ्रांसीसी सेना और डिफेंस कॉम्प्लेक्स से अमेरिकी सॉफ्टवेयर हटाए गए। Microsoft और अन्य यूएस टेक कंपनियां सरकारी संस्थानों से बाहर कर दिए गए। उनकी जगह फ्रेंच इंडीजीनियस सॉफ्टवेयर लगाए गए। मतलब जो काम भारत डिजिटल संप्रभुता के नाम पर कर रहा था वही अब यूरोप भी कर रहा है। अब आइए ब्रिटेन व ब्रिटेन ने भी अमेरिका को सीधा संदेश दे दिया है। अमेरिकी डिफेंस सॉफ्टवेयर कंपनी पैेंटर जिसे हाल ही में बड़े कांटेक्ट मिले थे।
यूएस पार्लियामेंट की ऑल पार्टी कमेटी इन कांटेक्ट्स की जांच कर रही है। सिर्फ एक ही सॉफ्टवेयर नहीं अमेरिका से खरीदे गए हथियार, डिफेंस सिस्टम सब पर जांच शुरू हो चुकी है। रिपोर्ट कहती है कि आने वाले समय में कई कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल हो सकते हैं। अब सबसे बड़ा और सबसे खतरनाक मुद्दा पूरे यूरोप में चर्चा चल रही है। नाटो खत्म करो, यूरोपियन आर्मी बनाओ। तर्क क्या है? तर्क यह है कि फ्रांस के पास न्यूक्लियर वेपन है, ब्रिटेन के पास न्यूक्लियर वेपन है। इसके अलावा यूरोप के पास न्यूक्लियर सबमरींस है, एडवांस एयरफोर्स है और वर्ल्ड क्लास आर्म कंपनीज़ हैं। तो सवाल उठ रहा है कि हमें अमेरिका की जरूरत ही क्या है? यूरोप कह रहा है कि हम अपनी सुरक्षा खुद कर सकते हैं। अमेरिकी फौजों को अपने देश से बाहर करो। अमेरिका कितना घबराया गया है। नाटो चीफ मार्क रूटे का बयान आया। यूरोप अमेरिका के बिना कुछ नहीं कर सकता है। यूरोप अपनी सुरक्षा खुद तय कर सकता है।
मतलब 70 से 80 साल पुराना डर फिर से दिखाया जा रहा है। अमेरिका के बिना तुम असहाय हो। यह कहना है मार्क लूटे का। इसके अलावा उन्होंने कहा नाटो से बाहर मत निकलना। यूरोपियन आर्मी सिर्फ सपना है। और अब सुनिए फ्रांस का जवाब नाटो चीफ को। फ्रांस ने कहा यूरोप हजारों साल पुरानी सभ्यता है। नाटो कुछ दशकों पुरान संगठन है। फ्रांस ने नाटो को 1966 की याद दिलाई। 1966 से 2009 तक 43 साल फ्रांस नाटो से बाहर रहा। उस समय सोवरन यूनियन था। कोल्ड वॉर चरम पर थी। फिर भी फ्रांस ने अपनी सुरक्षा खुद की किसी अमेरिका की जरूरत नहीं पड़ी। फ्रांस ने साफ कहा हमने पहले भी किया है। आगे भी कर सकते हैं और इस बार पूरा यूरोप साथ है। इस पूरे घटनाक्रम की जड़ में एक ही नाम डोनाल्ड ट्रंप है। पिछले एक साल में नाटो को खुलेआम धमकाया ट्रंप ने।
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भारतीय स्पिनर युजवेंद्र चहल ने कहा कि मौजूदा भारत-न्यूजीलैंड टी20 सीरीज के चौथे मैच में एक बार फिर असफल बल्लेबाजी के लिए संजू सैमसन खुद को ही दोषी ठहराएंगे, क्योंकि सैमसन का प्रदर्शन 2026 टी20 विश्व कप से पहले उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। जियोस्टार पर बात करते हुए चहल ने यह भी कहा कि सैमसन जैसे अनुभवी खिलाड़ी के लिए दबाव कोई बहाना नहीं होना चाहिए। भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन बुधवार को विशाखापत्तनम के एसीए-वीडीसीए क्रिकेट स्टेडियम में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले गए चौथे टी20 मैच में एक बार फिर प्रभाव डालने में नाकाम रहे और 24 रन बनाकर आउट हो गए।
हालांकि उन्होंने अच्छी शुरुआत की, लेकिन 15 गेंदों में 24 रन बनाने के बाद सैमसन को मिशेल सेंटनर ने आउट कर दिया। पिछले पांच टी20 मैचों की पारियों में सैमसन का उच्चतम स्कोर 37 रन है, जो उन्होंने पिछले साल दिसंबर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बनाया था। न्यूजीलैंड सीरीज में अपने पिछले चार मैचों में सिर्फ 40 रन बनाने और तीसरे नंबर पर ईशान किशन के शानदार प्रदर्शन को देखते हुए, भारत की टी20 विश्व कप टीम में सैमसन की जगह अब सवालों के घेरे में है।
जियोस्टार पर बात करते हुए चहल ने कहा कि संजू सैमसन की लगातार असफलता को दबाव का नतीजा नहीं माना जा सकता, क्योंकि उनके पास काफी अनुभव है। उन्होंने कहा कि खुद को साबित करने के लिए चार मौके काफी थे और ईशान किशन अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और टीम में जगह बनाने के लिए तैयार हैं। चहल ने कहा कि सैमसन अपनी असफलता को स्वीकार करेंगे, लेकिन टी20 विश्व कप अभी दूर है, इसलिए घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
चहल ने जियोस्टार पर कहा कि संजू सैमसन कई सालों से क्रिकेट खेल रहे हैं। उन्होंने आईपीएल के मध्य क्रम से शुरुआत की, फिर सलामी बल्लेबाज बने। 10-12 साल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के बाद दबाव कोई बहाना नहीं होना चाहिए। उन्हें इस सीरीज में चार मौके मिले। मैं एक-दो मैचों में असफलता स्वीकार कर सकता हूं, लेकिन तीन-चार मैचों में नहीं। उन्हें पता है कि ईशान किशन जैसा खिलाड़ी बैकअप के तौर पर मौजूद है और नंबर तीन पर अच्छी बल्लेबाजी कर रहा है, वह उनका इंतजार कर रहा है। संजू खुद को दोषी ठहराएंगे। उन्हें चार मौके मिले लेकिन वे उनका फायदा नहीं उठा पाए।
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