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UP विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव का इस बड़ी पार्टी को बिग नो! गठबंधन पर कह दी ये बड़ी बात
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन को लेकर चल रही अटकलों पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने बड़ा बयान देकर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है. उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के साथ किसी भी तरह के गठबंधन से सीधे इनकार कर दिया है.
अखिलेश यादव ने यह बयान कहां दिया?
लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान जब पत्रकारों ने अखिलेश यादव से AIMIM के साथ संभावित गठबंधन को लेकर सवाल किया तो उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के इसकी संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया.
अखिलेश यादव ने गठबंधन को लेकर क्या साफ किया?
अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी आगे भी इंडिया गठबंधन के साथ ही आगे बढ़ेगी।. उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी अपने मौजूदा गठबंधन सहयोगियों के साथ ही 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है और इसमें AIMIM के लिए कोई जगह नहीं है.
#WATCH | Lucknow | On being asked about an alliance with AIMIM, Samajwadi Party President Akhilesh Yadav says, "The existing alliance that defeated the BJP will, we will work to carry forward that very alliance of the Samajwadi Party." pic.twitter.com/dK3Tp9uqwY
— ANI (@ANI) October 2, 2026
यह सवाल उठा ही क्यों था?
दरअसल, पिछले कुछ महीनों से उत्तर प्रदेश में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की सक्रियता काफी बढ़ गई थी. उन्होंने राज्य के कई हिस्सों में दौरे किए और सार्वजनिक मंचों से सपा, बसपा और कांग्रेस के सामने भाजपा के खिलाफ साथ आने का खुला प्रस्ताव रखा था. ओवैसी का कहना था कि उनकी पार्टी का एकमात्र मकसद राज्य में भाजपा को सत्ता से दूर रखना है.
सपा ने इससे पहले भी ओवैसी के प्रस्ताव पर क्या कहा था?
मुरादाबाद में ओवैसी के गठबंधन प्रस्ताव के बाद समाजवादी पार्टी की तरफ से भी यह साफ संकेत दिया गया था कि AIMIM के साथ गठबंधन करना मुश्किल है. यानी पार्टी नेतृत्व का यह रुख नया नहीं है, बल्कि अब अखिलेश यादव ने खुद मुखर होकर इस पर मुहर लगा दी है।
क्या सिर्फ सपा ही AIMIM से दूरी बना रही है?
बसपा प्रमुख मायावती भी पहले साफ कर चुकी हैं कि उनकी पार्टी किसी भी सूरत में AIMIM के साथ गठबंधन नहीं करेगी. इसके अलावा कांग्रेस भी ओवैसी की पार्टी से दूरी बनाए रखने के पक्ष में नजर आई है. यानी उत्तर प्रदेश के तीनों बड़े विपक्षी दल एक सुर में AIMIM को गठबंधन से बाहर रखने के पक्ष में खड़े दिखते हैं.
आखिर सपा, बसपा और कांग्रेस AIMIM से इतनी दूरी क्यों बना रहे हैं?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे दो बड़ी वजहें हैं। पहली, विपक्षी दलों को डर है कि AIMIM को साथ लेने से मुस्लिम-यादव या अन्य सामाजिक समीकरणों का ध्रुवीकरण हो सकता है, जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है। दूसरी, सपा के कई वरिष्ठ नेता मानते हैं कि अगर ओवैसी वाकई भाजपा को रोकना चाहते हैं, तो उन्हें अलग से चुनाव लड़ने के बजाय सीधे सपा को समर्थन देना चाहिए, न कि गठबंधन में हिस्सेदारी मांगनी चाहिए।
क्या AIMIM को 'बी-टीम' कहे जाने का डर भी एक वजह है?
विपक्षी खेमे के कई नेता मानते हैं कि AIMIM का कोई बहुत मजबूत जमीनी कैडर नहीं है और पार्टी ज्यादातर तीखे बयानों से चर्चा में बने रहने की कोशिश करती है. ऐसे में कहीं न कहीं यह आशंका भी बनी रहती है कि AIMIM के साथ आने से विपक्षी एकता की बजाय वोटों का बंटवारा ज्यादा हो सकता है, जिसका परोक्ष फायदा भाजपा को मिल सकता है.
क्या अतीत में AIMIM और यूपी के विपक्षी दलों के बीच कोई तालमेल रहा है?
2022 के विधानसभा चुनाव में AIMIM ने ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और कुछ छोटे दलों के साथ मिलकर यूपी में 100 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया था. हालांकि उस चुनाव में पार्टी को खास सफलता नहीं मिल पाई थी, जिसके बाद से सपा, बसपा और कांग्रेस तीनों ही AIMIM के साथ औपचारिक गठबंधन से दूरी बनाए रखने में ही अपनी भलाई देख रहे हैं.
अब इस पूरे घटनाक्रम के बाद AIMIM की आगे की रणनीति क्या हो सकती है?
अखिलेश यादव के इस साफ इनकार के बाद माना जा रहा है कि AIMIM को उत्तर प्रदेश में फिर अकेले ही मैदान में उतरना पड़ सकता है. हालांकि ओवैसी अब तक लगातार दावा करते रहे हैं कि उनकी पार्टी का मकसद सिर्फ भाजपा को हराना है, ऐसे में आने वाले दिनों में वे अपनी रणनीति में कोई और बदलाव कर सकते हैं या छोटे दलों के साथ नया गठबंधन बनाने की कोशिश कर सकते हैं.
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