नई दिल्ली। केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज सदन में भारतीय डाक विभाग की राष्ट्रीय उपलब्धियों, डिजिटल परिवर्तन और सेवा विस्तार से जुड़े कई महत्वपूर्ण आँकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि इंडिया पोस्ट आज न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व की सबसे व्यापक और प्रभावी वितरण प्रणाली के रूप में कार्य कर रहा है, जो डाक और पार्सल के साथ-साथ नागरिकों तक सरकार और निजी क्षेत्र की लगभग हर सेवा पहुँचाने में सक्षम है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश के साढ़े छह लाख से अधिक गाँवों में फैले 1,65,000 डाक केंद्रों के माध्यम से इंडिया पोस्ट देश का सबसे बड़ा सेवा नेटवर्क संचालित कर रहा है, जिसमें से लगभग 90 प्रतिशत केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं। केन्द्रीय मंत्री ने साथ ही बताया कि डाक विभाग आईटी 2.0 और एपीटी के साथ तेजी से डिजिटल समावेशन कर रहा है और साथ ही इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक भी तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है।
वित्तीय समावेशन में डाक विभाग की ऐतिहासिक प्रगति
सिंधिया ने बताया कि डाक विभाग में वित्तीय समावेशन में ऐतिहासिक प्रगति की है। सुकन्या समृद्धि योजना के तहत देशभर में लगभग 3.75 करोड़ खाते खोले जा चुके हैं। पोस्ट ऑफिस सेविंग्स बैंक के अंतर्गत करीब 38 करोड़ खाते सक्रिय हैं, जिनमें लगभग ₹22 लाख करोड़ का डिपॉजिट है, जो पिछले दस वर्षों में ₹6 लाख करोड़ से बढ़कर साढ़े तीन गुना हो चुका है। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB), जिसकी शुरुआत 2018 में हुई थी, आज 13 करोड़ खाताधारकों तक पहुँच चुका है और इसके माध्यम से अब तक लगभग ₹1,37,000 करोड़ की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर राशि वितरित की जा चुकी है। पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस के अंतर्गत लगभग 1.25 करोड़ खाते हैं, जिनमें ₹2 लाख करोड़ से अधिक का डिपॉजिट है।
पासपोर्ट, आधार और नागरिक सेवाओं में उल्लेखनीय योगदान दे रहा डाक विभाग
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देशभर में 452 पासपोर्ट सेवा केंद्र डाक विभाग के माध्यम से संचालित हो रहे हैं, जिनके जरिए अब तक 2 करोड़ से अधिक पासपोर्ट जारी किए जा चुके हैं। वहीं आधार नामांकन और अद्यतन के क्षेत्र में 13,352 पोस्ट ऑफिसों के माध्यम से 14 करोड़ नागरिकों के आधार अपडेट किए गए हैं। यह आंकड़े दिखाते हैं कि भारतीय डाक विभाग सिर्फ डाक ही नहीं बल्कि पासपोर्ट और आधार जैसी नागरिक सेवाएं भी देशवासियों तक पहुंचा रहा है।
एमएसएमई को वैश्विक बाज़ार से जोड़ने का माध्यम डाक निर्यात केंद्र: सिंधिया
सिंधिया ने एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि ‘Whole of Government Approach’ के तहत वाणिज्य और वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर डाक विभाग ने देशभर में 1,013 डाक निर्यात केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से अब तक लगभग 12.75 लाख शिपमेंट्स हुए हैं, जिनकी कुल मूल्य राशि करीब ₹300 करोड़ है, और 28,000 से अधिक निर्यातक इस प्रणाली से जुड़े हैं। इस सुविधा से सर्वाधिक लाभ एमएमसएमई को हुआ है और उन्हें वैश्विक बाजार तक पहुंचने का एक नया और मजबूत माध्यम मिला है।
राजस्व में हुई बड़ी वृद्धि
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि 2022-23 और 2023-24 में डाक विभाग का कुल राजस्व ₹12,800 करोड़ था, जो 2024-25 में बढ़कर ₹13,218 करोड़ हुआ। जहां पिछले वित्तीय वर्ष में केवल 3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई थी, वहीं इस वर्ष के केवल नौ महीनों में ही 10 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की गई है। साथ ही उन्होंने बताया कि सिटिजन-सेंट्रिक सर्विसेज में 95 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है जो ₹328 करोड़ से बढ़कर ₹650 करोड़ तक पहुँच गई है और पार्सल सेवाओं में 12 प्रतिशत और पीएलआई/आरपीएलआई में 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी महीनों में डाक विभाग और भी बेहतर आंकड़े सदन के समक्ष प्रस्तुत करेगा।
APT और IT 2.0 के साथ डिजिटल क्रांति की ओर अग्रसर है डाक विभाग : केन्द्रीय मंत्री
सिंधिया ने बताया कि डाक विभाग ने IT 2.0 के तहत Advanced Postal Technology (APT) सॉफ्टवेयर को सफलतापूर्वक लागू किया है, जो मेघराज 2.0 क्लाउड और ओपन API आर्किटेक्चर पर आधारित है। यह प्रणाली पूरी तरह स्वदेशी है और भारतीय डाक की अपनी सॉफ्टवेयर इकाई CEPT द्वारा विकसित की गई है। उन्होंने कहा कि आज देश के सभी 1,65,000 पोस्ट ऑफिस और 23 पोस्टल सर्किल एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम कर रहे हैं। विभाग ने पहली बार एक चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (CTO) और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) की नियुक्ति भी की है, जिससे डाक विभाग को एक विश्वस्तरीय लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जा सके।
25 हजार करोड़ तक पहुंचा इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक का बैलेंस
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि IPPB की पहुँच देश के सभी सरकारी और निजी बैंकों की संयुक्त पहुँच से ढाई गुना अधिक हो चुकी है। आज IPPB के पास 13 करोड़ ग्राहक हैं, जिनके कुल बैलेंस ₹25,000 करोड़ से अधिक हैं, और इसके माध्यम से ₹19 लाख करोड़ से अधिक के वित्तीय लेन-देन संभव हो पाए हैं। उन्होंने कहा कि IPPB विशेष रूप से उन नागरिकों को सेवा देता है, जिन्हें अन्य बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं, यही प्रधानमंत्री मोदी की समावेशी विकास की सोच का साकार रूप है।
केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि डाक विभाग का हर कर्मचारी दिन-रात देश सेवा में समर्पित है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इंडिया पोस्ट को विश्व का सबसे सुदृढ़, आधुनिक और नागरिक-केंद्रित डाक एवं लॉजिस्टिक्स तंत्र बनाने की दिशा में सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है।
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गहरी बर्फ, कटीली ढलानें और मौत से सटा सन्नाटा। यही वह मंजर था जिसमें जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के दूरदराज गुंडना इलाके के ग्रामीणों ने वह कर दिखाया जो अक्सर सरकारी तंत्र और आधुनिक साधनों से भी नहीं हो पाता। हम आपको बता दें कि गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर इन ग्रामीणों ने लगभग पंद्रह किलोमीटर पैदल चलकर करीब ग्यारह हजार फीट की ऊंचाई पर फंसे बीस से अधिक सेना के जवानों की जान बचाई। यह कोई औपचारिक अभियान नहीं था, न कोई तमगा पाने की चाह। यह इंसानियत और जिम्मेदारी की सीधी लड़ाई थी, जिसे इन पहाड़ी लोगों ने जीत लिया।
भारी बर्फबारी के कारण डोडा और किश्तवाड़ जिलों की सीमा के पास मोरचा टॉप पूरी तरह सफेद कब्र में बदल गया था। पांच से छह फीट मोटी बर्फ ने हर रास्ता बंद कर दिया था। हम आपको बता दें कि सेना के जवान आतंक विरोधी तलाशी अभियान ऑपरेशन त्राशी एक के तहत इलाके में तैनात थे। यह अभियान घने जंगलों में पिछले करीब दो हफ्तों से चल रहा था। मौसम ने अचानक करवट बदली और तेज बर्फबारी ने जवानों को वहीं जकड़ लिया। संपर्क सीमित था, आवाजाही नामुमकिन और खतरा हर सांस में मौजूद था।
इस तैनाती के पीछे वजह भी बेहद गंभीर थी। अठारह जनवरी को चतरू के सिंहपोरा इलाके में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान विशेष बल के हवलदार गजेंद्र सिंह शहीद हो गए थे और सात अन्य जवान घायल हुए थे। इसके बाद सुरक्षा बलों ने डोडा जिले में आतंकियों की घुसपैठ रोकने के लिए मोरचा टॉप जैसे दुर्गम इलाकों में दबाव बढ़ाया था। लेकिन कुदरत ने यहां अपनी अलग ही परीक्षा ले ली।
चौबीस जनवरी की शाम सेना की चौकी से संदेश गया कि जवान फंसे हुए हैं। न हेलिकाप्टर उड़ सकता था, न मशीनें आगे बढ़ सकती थीं। तब गुंडना के ग्रामीणों से मदद मांगी गई। अगले ही दिन सुबह साढ़े आठ बजे, गांव के लोग फावड़े उठाकर निकल पड़े। सेना ने उन्हें जूते, दस्ताने और खाने के पैकेट दिए, लेकिन हौसला और जिद उनकी अपनी थी।
करीब पांच घंटे तक ये लोग खड़ी ढलानों और जमी हुई बर्फ को काटते हुए आगे बढ़ते रहे। हर कदम फिसलन भरा था, हर सांस ठंडी हवा से लड़ रही थी। दोपहर करीब डेढ़ बजे वे मोरचा टॉप पहुंचे, जहां जवान थके हुए लेकिन अडिग खड़े थे। ग्रामीणों ने रास्ता बनाया, हाथ थामे और शाम तक सभी जवानों को सुरक्षित नीचे उतार लाए। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल सुनील बरतवाल ने भी पुष्टि की कि अत्यंत कठिन परिस्थितियों में नागरिकों ने सेना के साथ मिलकर रास्ता तैयार किया।
इस प्रकार की भी रिपोर्टें हैं कि उसी दिन सीमा सड़क संगठन ने चतरगला टॉप पर एक और बचाव अभियान चलाया। भदेरवाह चंबा अंतरराज्यीय सड़क पर ग्यारह हजार पांच सौ फीट की ऊंचाई पर फंसे चालीस सेना कर्मियों और करीब बीस नागरिकों को भी सुरक्षित निकाला गया। यह अभियान छब्बीस जनवरी की तड़के तक चला। बहरहाल, गुंडना के इन ग्रामीणों ने देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
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