गहरी बर्फ, कटीली ढलानें और मौत से सटा सन्नाटा। यही वह मंजर था जिसमें जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के दूरदराज गुंडना इलाके के ग्रामीणों ने वह कर दिखाया जो अक्सर सरकारी तंत्र और आधुनिक साधनों से भी नहीं हो पाता। हम आपको बता दें कि गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर इन ग्रामीणों ने लगभग पंद्रह किलोमीटर पैदल चलकर करीब ग्यारह हजार फीट की ऊंचाई पर फंसे बीस से अधिक सेना के जवानों की जान बचाई। यह कोई औपचारिक अभियान नहीं था, न कोई तमगा पाने की चाह। यह इंसानियत और जिम्मेदारी की सीधी लड़ाई थी, जिसे इन पहाड़ी लोगों ने जीत लिया।
भारी बर्फबारी के कारण डोडा और किश्तवाड़ जिलों की सीमा के पास मोरचा टॉप पूरी तरह सफेद कब्र में बदल गया था। पांच से छह फीट मोटी बर्फ ने हर रास्ता बंद कर दिया था। हम आपको बता दें कि सेना के जवान आतंक विरोधी तलाशी अभियान ऑपरेशन त्राशी एक के तहत इलाके में तैनात थे। यह अभियान घने जंगलों में पिछले करीब दो हफ्तों से चल रहा था। मौसम ने अचानक करवट बदली और तेज बर्फबारी ने जवानों को वहीं जकड़ लिया। संपर्क सीमित था, आवाजाही नामुमकिन और खतरा हर सांस में मौजूद था।
इस तैनाती के पीछे वजह भी बेहद गंभीर थी। अठारह जनवरी को चतरू के सिंहपोरा इलाके में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान विशेष बल के हवलदार गजेंद्र सिंह शहीद हो गए थे और सात अन्य जवान घायल हुए थे। इसके बाद सुरक्षा बलों ने डोडा जिले में आतंकियों की घुसपैठ रोकने के लिए मोरचा टॉप जैसे दुर्गम इलाकों में दबाव बढ़ाया था। लेकिन कुदरत ने यहां अपनी अलग ही परीक्षा ले ली।
चौबीस जनवरी की शाम सेना की चौकी से संदेश गया कि जवान फंसे हुए हैं। न हेलिकाप्टर उड़ सकता था, न मशीनें आगे बढ़ सकती थीं। तब गुंडना के ग्रामीणों से मदद मांगी गई। अगले ही दिन सुबह साढ़े आठ बजे, गांव के लोग फावड़े उठाकर निकल पड़े। सेना ने उन्हें जूते, दस्ताने और खाने के पैकेट दिए, लेकिन हौसला और जिद उनकी अपनी थी।
करीब पांच घंटे तक ये लोग खड़ी ढलानों और जमी हुई बर्फ को काटते हुए आगे बढ़ते रहे। हर कदम फिसलन भरा था, हर सांस ठंडी हवा से लड़ रही थी। दोपहर करीब डेढ़ बजे वे मोरचा टॉप पहुंचे, जहां जवान थके हुए लेकिन अडिग खड़े थे। ग्रामीणों ने रास्ता बनाया, हाथ थामे और शाम तक सभी जवानों को सुरक्षित नीचे उतार लाए। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल सुनील बरतवाल ने भी पुष्टि की कि अत्यंत कठिन परिस्थितियों में नागरिकों ने सेना के साथ मिलकर रास्ता तैयार किया।
इस प्रकार की भी रिपोर्टें हैं कि उसी दिन सीमा सड़क संगठन ने चतरगला टॉप पर एक और बचाव अभियान चलाया। भदेरवाह चंबा अंतरराज्यीय सड़क पर ग्यारह हजार पांच सौ फीट की ऊंचाई पर फंसे चालीस सेना कर्मियों और करीब बीस नागरिकों को भी सुरक्षित निकाला गया। यह अभियान छब्बीस जनवरी की तड़के तक चला। बहरहाल, गुंडना के इन ग्रामीणों ने देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
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कोलकाता के पास 26 जनवरी को लगी आग में मरने वालों की संख्या 21 हो गई है, जले हुए भवनों से 13 और शव बरामद किए गए हैं। 28 अन्य लोग अभी भी लापता हैं, और आशंका है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। पुलिस ने इलाके में सार्वजनिक आवाजाही पर प्रतिबंध लगाते हुए निषेधाज्ञा भी लागू कर दी है। तड़के दक्षिण 24 परगना जिले के आनंदपुर में लगी भीषण आग दो गोदामों और एक मोमो कंपनी की निर्माण इकाई तक फैल गई। मृतकों की संख्या अब बढ़कर 21 हो गई है, जिनमें से 13 से अधिक शव इमारतों से बरामद किए गए हैं। घटना की प्रकृति और क्षति की सीमा को देखते हुए, मरने वालों की संख्या बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
इस बीच, भाजपा के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी ने गुरुवार को आग से प्रभावित नाजिराबाद क्षेत्र का दौरा किया, जहां बीएनएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू थी, लेकिन उन्होंने वास्तविक घटनास्थल में प्रवेश करने से परहेज किया और कहा कि वह कानून का पालन करेंगे। आधी रात से इलाके में बीएनएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई। अधिकारी ने सरकार पर 'लापरवाही' बरतने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि दमकल सेवाएं घटनास्थल पर देर से पहुंचीं। उन्होंने दावा किया, "इस घटना के बाद भी टीएमसी सरकार सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रही है। भाजपा नेता ने यह भी सवाल उठाया कि जब सरकार विपक्षी नेता को घटनास्थल पर जाने से रोकने के लिए इतनी सक्रिय है, तो मंत्रियों और टीएमसी नेताओं को वहां जाने की अनुमति क्यों दी गई? भाजपा नेता के हवाले से यह बात कही गई है।
सोमवार को लगी भीषण आग ने गोदामों और एक विनिर्माण इकाई को पूरी तरह से नष्ट कर दिया, जिससे जली हुई इमारतें और श्रमिकों के शव ही बचे। इससे पहले, अधिकारियों ने बताया कि बरामद किए गए 21 शवों या शरीर के अंगों की पहचान स्थापित करने के लिए गुरुवार से डीएनए मैपिंग शुरू होने की संभावना है। पुलिस ने इस मामले में यथासंभव अधिक से अधिक शवों की पहचान करना अत्यावश्यक बताया।
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