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अदाणी पावर का तीसरी तिमाही में कर-पूर्व मुनाफा 5.3 प्रतिशत बढ़कर 2,800 करोड़ रुपए हुआ

अहमदाबाद, 29 जनवरी (आईएएनएस)। अदाणी पावर लिमिटेड ने गुरुवार को बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में कंपनी का टैक्स से पहले का मुनाफा यानी प्री-टैक्स प्रॉफिट (पीबीटी) 5.3 प्रतिशत बढ़ गया है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब देश में लंबा मानसून और ठंडा मौसम रहने के चलते बिजली की मांग ज्यादा नहीं रही।

एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनी ने बताया कि तीसरी तिमाही में प्री-टैक्स मुनाफा 2,800 करोड़ रुपए रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 2,659 करोड़ रुपए था। इसमें बढ़ोतरी का मुख्य कारण कर्ज से जुड़े खर्चों में कमी और बिजली संयंत्रों का स्थिर संचालन रहा।

अदाणी पावर लिमिटेड के सीईओ एस.बी. ख्यालिया ने कहा कि कंपनी लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही है और उसके पास पर्याप्त नकदी उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि कम लागत वाले बिजली संयंत्र और कंपनी की प्रतिस्पर्धी ताकत इसकी बड़ी वजह हैं।

सीईओ ने यह भी कहा कि कंपनी की सभी परियोजनाएं बहुत अच्छे ढंग से आगे बढ़ रही हैं और कई मामलों में तय लक्ष्यों से भी बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।

31 दिसंबर 2025 को खत्म हुई तिमाही में कंपनी का कुल राजस्व 12,717 करोड़ रुपए रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही के 13,434 करोड़ रुपए से थोड़ा कम है। इसकी वजह खुले बाजार में बिजली की कीमतों में नरमी बताई गई है।

हालांकि मांग कमजोर रहने के बावजूद कंपनी का परिचालन मुनाफा यानी ईबीआईटीडीए 4,636 करोड़ रुपए पर मजबूत बना रहा। यह दिखाता है कि मुश्किल हालात में भी कंपनी का संचालन मजबूत है।

तीसरी तिमाही के दौरान पूरे देश में बिजली की खपत लगभग 392 अरब यूनिट रही, जो पिछले साल के मुकाबले थोड़ी कम थी। यानी कुल मिलाकर बिजली की मांग लगभग स्थिर बनी रही।

बिजली की मांग में सुस्ती का कारण कई राज्यों में अक्टूबर तक चला लंबा मानसून और पिछले साल की तुलना में ठंडा मौसम रहा। वित्त वर्ष 2024-25 में तेज गर्मी और लू के कारण बिजली की मांग काफी बढ़ गई थी।

कम मांग के साथ-साथ सौर और पवन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते उत्पादन का असर खुले बाजार में बिजली की कीमतों पर भी पड़ा।

इस तिमाही में अदाणी पावर ने असम पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के साथ 3,200 मेगावाट बिजली की आपूर्ति के लिए एक नया दीर्घकालिक समझौता हासिल करके एक बड़ी उपलब्धि हासिल की।

इस नए करार के बाद कंपनी की करीब 90 प्रतिशत मौजूदा बिजली उत्पादन क्षमता अब लंबे और मध्यम अवधि के बिजली खरीद समझौतों के तहत आ गई है। इससे कंपनी की आमदनी को स्थिरता मिलेगी और शॉर्ट टर्म में बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम होगा।

कंपनी द्वारा नियामकीय रूप से दाखिल की गई जानकारी के अनुसार, अब कंपनी की कुल विस्तार क्षमता, जो बिजली खरीद समझौतों से जुड़ी है, बढ़कर 11.7 गीगावाट हो गई है।

दिसंबर 2025 को समाप्त नौ महीनों में कंपनी का प्री-टैक्स मुनाफा 9,896 करोड़ रुपए रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि के 10,679 करोड़ रुपए से कम है। इसकी वजह नए खरीदे गए बिजली संयंत्रों से जुड़ा ज्यादा मूल्यह्रास खर्च बताया गया है।

इन नौ महीनों में टैक्स के बाद का मुनाफा 8,700 करोड़ रुपए रहा। वहीं, बिजली बिक्री की मात्रा 3.4 प्रतिशत बढ़कर 71.8 अरब यूनिट हो गई, जो बढ़ी हुई उत्पादन क्षमता के कारण संभव हो पाई।

--आईएएनएस

डीबीपी/एबीएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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भारत-ईयू एफटीए से वापी के व्यापारियों में उत्साह, कहा- निर्यात को मिलेगी नई ताकत

वापी, 29 जनवरी (आईएएनएस)। यूरोपीय यूनियन और भारत के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को लेकर गुजरात की औद्योगिक नगरी वापी में उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है। खासतौर पर अमेरिकी टैरिफ के चलते बीते कुछ समय से कठिन दौर से गुजर रहे वापी के उद्योगों के लिए यूरोपीय यूनियन के साथ हुआ यह समझौता बेहद अहम माना जा रहा है।

उद्योग जगत का मानना है कि इस डील से न केवल नए अंतरराष्ट्रीय बाजार खुलेंगे, बल्कि निर्यात को भी मजबूती मिलेगी और अमेरिकी बाजार में हुए नुकसान की भरपाई का रास्ता साफ होगा।

औद्योगिक नगरी वापी और आसपास के क्षेत्रों में छोटे-बड़े करीब 10 हजार से अधिक उद्योग-धंधे हैं। यह क्षेत्र स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज का हब माना जाता है। औद्योगिक क्षेत्र में केमिकल, फार्मा, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और पेपर उद्योग बड़े पैमाने पर विकसित हुए हैं। यहां की कई बड़ी कंपनियों के दुनिया के कई देशों के साथ व्यापारिक संबंध हैं। विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाले ये उद्योग पिछले कुछ समय से ट्रंप टैरिफ के कारण मुश्किल दौर से गुजर रहे थे।

अमेरिका के विकल्प के रूप में अन्य देशों में बाजार तलाशे जा रहे थे। ऐसे समय में अब भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हुए इस ट्रेड एग्रीमेंट से यहां के उद्योगों को नया बाजार मिलने की उम्मीद है। अमेरिका के विकल्प के रूप में अब यूरोपीय देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को आसानी से बढ़ाया जा सकेगा और इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट में भी लाभ होने की संभावना जताई जा रही है।

मंगलम ड्रग्स कंपनी के डायरेक्टर डॉ. कमल वसी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि इस समझौते के बाद फार्मा सेक्टर के लिए यूरोप के सभी देशों का बाजार खुल गया है। वापी और आसपास के क्षेत्रों की फार्मा इंडस्ट्री अमेरिकी टैरिफ की वजह से गंभीर समस्याओं का सामना कर रही थी, लेकिन एफटीए के बाद बाजार में सकारात्मक संदेश गया है।

डॉ. वसी ने कहा कि यूरोपीय देशों के साथ कारोबार अब और तेजी से बढ़ेगा, क्योंकि वहां टैरिफ नहीं लगेगा। भारत दुनिया का सबसे बड़ा जेनेरिक दवाओं का उत्पादक है और अब बिना टैरिफ के यूरोप में भारतीय दवाओं की पहुंच बढ़ेगी, जिससे उद्योग को बड़ा फायदा होगा।

अग्रणी उद्योगपति शरद ठाकर ने भी इस डील को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुआ यह समझौता अब तक का सबसे फायदेमंद ट्रेड एग्रीमेंट है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी टैरिफ की वजह से भारतीय कारोबारियों को जो नुकसान उठाना पड़ा, उसकी भरपाई के लिए नए बाजारों की सख्त जरूरत थी। यूरोपीय यूनियन के साथ हुई इस डील से यूरोपीय देशों में कारोबार करना आसान होगा और भारतीय उद्योगों को स्थिरता मिलेगी।

वापी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश पटेल ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि औद्योगिक नगरी वापी और आसपास के क्षेत्रों में छोटे-बड़े मिलाकर करीब 10 हजार से अधिक उद्योग कार्यरत हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा किया गया यह “मदर ऑफ ऑल डील” फार्मा, पेस्टीसाइड्स समेत कई सेक्टरों के लिए बेहद लाभकारी साबित होगा, क्योंकि यूरोप के देशों में सीधे कारोबार के अवसर मिलेंगे। अमेरिकी टैरिफ के चलते उद्योगों को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई नए यूरोपीय बाजारों से की जा सकती है।

सतीश पटेल के अनुसार, यह समझौता वापी के उद्योगों के लिए एक माइलस्टोन साबित होगा और ‘विकसित भारत’ के विजन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। इस एफटीए से भारतीय उद्योगों को इंपोर्ट और एक्सपोर्ट दोनों के लिए व्यापक बाजार मिलेगा, जिससे औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम

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