Canada: उत्तरी क्यूबेक में गोलीबारी, दो लोगों की मौत
कनाडा के उत्तरी क्यूबेक में मूल निवासियों के लिए आरक्षित क्षेत्र ‘फर्स्ट नेशन रिजर्व’ में हुई गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
क्यूबेक प्रांतीय पुलिस के सार्जेंट ह्यूग्स बोलियू ने बताया कि बुधवार रात को हुई हत्याएं संगठित अपराध से जुड़ी हुई प्रतीत होती हैं। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र में कोई सक्रिय शूटर नहीं है।
प्रांतीय पुलिस ने बताया कि मृतक करीब 30 वर्ष के पुरुष हैं। उसने बताया कि दोनों स्थानीय निवासी थे और उन्हें रात लगभग नौ बजे एक वाहन के अंदर गोली मारी गई। इससे पहले, मिस्टिसिनी के क्री नेशन इलाके के प्रशासन ने कहा था कि एक घातक गोलीबारी के बाद समुदाय के लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है और कई लोग हताहत हुए हैं।
समुदाय के प्रमुख माइकल पेटावाबानो ने एक बयान में कहा कि लोगों की आवाजाही पर तब तक रोक लागू रहेगी, जब तक कानून प्रवर्तन एजेंसियां यह पुष्टि नहीं कर देतीं कि सामान्य गतिविधियों को फिर से शुरू करना सुरक्षित है। मिस्टिसिनी एक समुदाय है, जो क्यूबेक शहर से लगभग 600 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में, मिस्टिसिनी झील के किनारे निवास करता है।
वेब सीरीज रिव्यू– ‘दलदल’:एसीपी के रोल में भूमि पेडनेकर की सधी हुई एक्टिंग, जानिए कैसी है सीरियल किलर की कहानी वाली यह सीरीज
अपराध कथाएं जब सिर्फ रहस्य सुलझाने तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि इंसान के मन के अंदर झांकने की कोशिश करती हैं, तब वे अलग असर छोड़ती हैं। दलदल भी ऐसी ही एक सीरीज है। यह यह समझने की कोशिश करती है कि अपराध किन हालात में पैदा होता है। यह डराने से ज्यादा बेचैन करती है और कई सवाल छोड़ जाती है। सीरीज की कहानी 7 एपिसोड की इस वेब सीरीज की कहानी मुंबई की एसीपी रीता फरेरा के आसपास घूमती है। वह एक सीरियल किलर की जांच कर रही है। यह जांच उसे सिर्फ अपराध की जगहों तक नहीं ले जाती, बल्कि उसके अपने अतीत के दबे हुए जख्मों से भी सामना कराती है। बचपन का दर्द, दफ्तर में खुद को बार-बार साबित करने का दबाव और खुद पर शक कहानी के मुख्य हिस्से हैं। कहानी का विचार मजबूत है, लेकिन कई जगह भावनात्मक पकड़ कमजोर हो जाती है। कुछ सीन में तर्क पूरी तरह संतोष नहीं देता। सीरीज में एक्टिंग भूमि पेडनेकर ने एसीपी रीता फरेरा के किरदार को गंभीरता और संयम के साथ निभाया है। उनका सख्त चेहरा, कम संवाद और अंदर की बेचैनी को छिपाकर रखने का तरीका किरदार के स्वभाव से मेल खाता है। कई दृश्यों में उनका अभिनय असर छोड़ता है। समारा तिजोरी अपने किरदार में गहरी छाप छोड़ती हैं। उनके अभिनय में दर्द और कड़वाहट साफ दिखती है, जो कहानी को भावनात्मक ताकत देती है। आदित्य रावल ने भी अपने किरदार को ईमानदारी से निभाया है। सहायक भूमिकाओं में गीता शर्मा का काम कहानी को संतुलन देता है। सीरीज में निर्देशन और तकनीकी पक्ष निर्देशक अमृत राज गुप्ता ने कहानी को शोरगुल से दूर, धीमी और गंभीर गति में आगे बढ़ाया है। उन्होंने अपराध को दिखाने से ज़्यादा उसके असर और पात्रों की मानसिक हालत पर ध्यान दिया है। मुंबई को अंधेरी, भारी और दबाव से भरी जगह के रूप में दिखाया गया है। सीमित रोशनी और रंग माहौल बनाने में मदद करते हैं। पृष्ठसंगीत तनाव बढ़ाता है और सीन का बदलाव सहज है। सीरीज को लेकर फाइनल वर्डिक्ट दलदल एक महत्वाकांक्षी सीरी है, जो अपराध को बाहरी घटना नहीं, बल्कि अंदर की टूटन के रूप में देखने की कोशिश करती है। भूमि पेडनेकर का अभिनय मजबूत है, जबकि समारा तिजोरी की मौजूदगी सबसे ज्यादा असर छोड़ती है। कमियों के बावजूद यह सीरी गंभीर और सोचने पर मजबूर करने वाला अनुभव देती है।
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