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पाकिस्तान में रह रहे अफगान शरणार्थियों ने अफगानिस्तान लौटने के लिए तीन महीने का समय मांगा

काबुल, 29 जनवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान में रह रहे कई अफगान शरणार्थियों ने पाकिस्तानी सरकार और अफगान प्रशासन से बातचीत के जरिए मौजूदा समस्याओं का समाधान निकालने और उन्हें सम्मानपूर्वक तथा चरणबद्ध तरीके से अफगानिस्तान लौटने के लिए पर्याप्त समय देने की अपील की है। स्थानीय मीडिया ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

शरणार्थियों का कहना है कि तेजी से की जा रही निर्वासन कार्रवाई और बढ़ते दबाव के कारण अफगान नागरिकों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अफगान शरणार्थी हाजी नजर ने पाकिस्तानी सरकार से आग्रह किया कि उन्हें तीन महीने का समय दिया जाए, ताकि वे व्यवस्थित ढंग से अपने देश लौट सकें। अफगानिस्तान स्थित टोलो न्यूज ने यह रिपोर्ट दी।

हाजी नजर ने कहा, “पाकिस्तानी सरकार को हमें तीन महीने की समय-सीमा देनी चाहिए, ताकि शरणार्थी क्रमबद्ध और चरणबद्ध तरीके से अपने देश लौट सकें। इस समय अफगान नागरिक कई तरह की कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।”

शरणार्थी अधिकार कार्यकर्ता अल्लाह मीर मियाखाइल ने टोलो न्यूज से बातचीत में कहा, “सुरक्षा एजेंसियां हर जगह अफगान शरणार्थियों को गिरफ्तार कर निर्वासित कर रही हैं। अधिकांश शरणार्थियों को अपने व्यवसाय और निजी मामलों को समेटने के लिए समय चाहिए। कई परिवार प्रूफ ऑफ रजिस्ट्रेशन कार्ड के तहत पंजीकृत हैं, लेकिन अब ये कार्ड अमान्य हो गए हैं।”

शरणार्थी अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि वापसी की प्रक्रिया स्वैच्छिक और धीरे-धीरे होनी चाहिए तथा इसमें अंतरराष्ट्रीय संगठनों का सहयोग जरूरी है, ताकि अफगानिस्तान में एक नया मानवीय संकट पैदा न हो। एक अन्य कार्यकर्ता अली रजा करीमी ने कहा कि कई अफगान शरणार्थी बुनियादी मानवाधिकारों से वंचित हैं और वैध पहचान दस्तावेजों के अभाव में अनिश्चितता की स्थिति में जीवन गुजार रहे हैं।

इससे पहले इसी महीने तालिबान ने कहा था कि पाकिस्तान में अफगान शरणार्थियों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं और पाकिस्तानी सरकार को शरणार्थियों के अधिकारों का सम्मान करने के साथ ही उनकी गिरफ्तारी और उत्पीड़न बंद करना चाहिए।

तालिबान के उप प्रवक्ता हमदुल्लाह फ़ित्रत ने एक ऑडियो संदेश में कहा, “दुर्भाग्य से पाकिस्तान में अफगान शरणार्थियों को गिरफ्तार किया जा रहा है, उनके साथ उत्पीड़न और दुर्व्यवहार बढ़ रहा है, जिससे वे गंभीर मुश्किलों में फंस गए हैं।” यह बयान पझवोक अफगान न्यूज़ ने उद्धृत किया।

फ़ित्रत ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य संबंधित संगठनों से शरणार्थी संरक्षण के सिद्धांतों को लागू कराने और उन देशों में हस्तक्षेप करने की अपील की, जहां शरणार्थियों के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि अफगान शरणार्थियों की अफगानिस्तान वापसी के लिए आर्थिक सहयोग और समर्थन आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तानी सरकार को शरणार्थी अधिकारों का सम्मान करना चाहिए, अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी सिद्धांतों का पालन करना चाहिए और अफगान शरणार्थियों की गिरफ्तारी व उत्पीड़न बंद करना चाहिए।

--आईएएनएस

डीएससी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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बांग्लादेश की हड़ताल से सूरत के कपड़ा व्यापारियों के लिए सुनहरा मौका, कारोबार को लगेंगे पंख

सूरत, 29 जनवरी (आईएएनएस)। गुजरात में सूरत के कपड़ा व्यापारियों के लिए मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात आपदा में अवसर बनकर सामने आए हैं और वे बड़े कारोबार की उम्मीद जता रहे हैं। बांग्लादेश की कपड़ा मिलों की शीर्ष संस्था बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (बीटीएमए) ने एक फरवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल और मिलें बंद करने का अल्टीमेटम दिया है।

इस संकट की मुख्य वजह भारत से बड़े पैमाने पर सस्ते और ड्यूटी-फ्री धागे (यार्न) का आयात बताया जा रहा है, जिससे बांग्लादेश की स्थानीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री बुरी तरह प्रभावित हुई है।

भारतीय यार्न की कम कीमत और बेहतर गुणवत्ता के चलते बांग्लादेशी मिलें प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रही हैं और कई इकाइयां बैंक लोन चुकाने में भी असमर्थ हो गई हैं। ऐसे हालात में सूरत के कपड़ा व्यापारियों को नए व्यापारिक अवसर नजर आ रहे हैं।

सूरत टेक्सटाइल्स एंड ट्रेड फेडरेशन एसोसिएशन के प्रमुख कैलाश हाकिम ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल और अनिश्चितता के माहौल के बीच यह स्थिति भारतीय उद्योग, खासकर सूरत के लिए एक बड़ा अवसर है।

उन्होंने कहा कि भारत गारमेंटिंग और एक्सपोर्ट के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ेगा और यह घटनाक्रम इस बात का प्रमाण है कि भारतीय धागा उच्च गुणवत्ता वाला है। बांग्लादेश में लोकल मैन्युफैक्चरिंग सीमित थी और वहां भारतीय कपड़े पर ही गारमेंटिंग की जाती थी। अब आने वाला समय भारत का है और सरकार व उद्यमी मिलकर स्किल डेवलपमेंट पर काम कर रहे हैं, ताकि भारतीय कपड़ा एक मजबूत ब्रांड के रूप में वैश्विक बाजार में उभर सके।

हाकिम ने बताया कि गारमेंटिंग सेक्टर में सस्ती लेबर और स्किल के कारण बांग्लादेश अब तक आगे रहा है, लेकिन भारत में भी अब क्लस्टर डेवलपमेंट और विभिन्न योजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है। देशभर में टेक्सटाइल और गारमेंट पार्क विकसित किए जा रहे हैं, जिन पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि सूरत में पार्ट्स और क्वालिटी डेवलपमेंट पर जोर दिया जा रहा है और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए ठोस रणनीति बनाई जा रही है। व्यापारियों की मांग है कि सूरत में बेहतर गारमेंटिंग और टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार एक रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) सेंटर की स्थापना करे।

उन्होंने बताया कि देश का लगभग 65 प्रतिशत पॉलिस्टर कपड़ा सूरत में तैयार होता है और बांग्लादेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को जो एडवांटेज अब तक मिला था, वह आगे चलकर सूरत के कारोबारियों को मिलने की उम्मीद है।

कपड़ा व्यापारी अक्षय राठौड़ ने इस घटनाक्रम को सूरतवासियों के लिए खुशी की लहर बताया। उन्होंने कहा कि भारत के कुल कपड़ा व्यापार का करीब 65 प्रतिशत हिस्सा सूरत से जुड़ा हुआ है और गारमेंट सेक्टर के लिए यह समय एक सुनहरा अवसर लेकर आया है।

अक्षय राठौड़ के अनुसार, बांग्लादेश सरकार की विफल नीतियों का सीधा फायदा सूरत के कपड़ा कारोबारियों को मिलने वाला है। सूरत में गारमेंटिंग को लेकर युवाओं में पहले से ही उत्साह है और कई संस्थान स्किल डेवलपमेंट पर फोकस कर रहे हैं। आने वाले समय में यदि सरकार उद्योग और आरएंडडी को ज्यादा समर्थन देती है, तो सूरत न केवल देश बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कपड़ा और गारमेंटिंग हब के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर सकता है।

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम

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