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बांग्लादेश की हड़ताल से सूरत के कपड़ा व्यापारियों के लिए सुनहरा मौका, कारोबार को लगेंगे पंख

सूरत, 29 जनवरी (आईएएनएस)। गुजरात में सूरत के कपड़ा व्यापारियों के लिए मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात आपदा में अवसर बनकर सामने आए हैं और वे बड़े कारोबार की उम्मीद जता रहे हैं। बांग्लादेश की कपड़ा मिलों की शीर्ष संस्था बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (बीटीएमए) ने एक फरवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल और मिलें बंद करने का अल्टीमेटम दिया है।

इस संकट की मुख्य वजह भारत से बड़े पैमाने पर सस्ते और ड्यूटी-फ्री धागे (यार्न) का आयात बताया जा रहा है, जिससे बांग्लादेश की स्थानीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री बुरी तरह प्रभावित हुई है।

भारतीय यार्न की कम कीमत और बेहतर गुणवत्ता के चलते बांग्लादेशी मिलें प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रही हैं और कई इकाइयां बैंक लोन चुकाने में भी असमर्थ हो गई हैं। ऐसे हालात में सूरत के कपड़ा व्यापारियों को नए व्यापारिक अवसर नजर आ रहे हैं।

सूरत टेक्सटाइल्स एंड ट्रेड फेडरेशन एसोसिएशन के प्रमुख कैलाश हाकिम ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल और अनिश्चितता के माहौल के बीच यह स्थिति भारतीय उद्योग, खासकर सूरत के लिए एक बड़ा अवसर है।

उन्होंने कहा कि भारत गारमेंटिंग और एक्सपोर्ट के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ेगा और यह घटनाक्रम इस बात का प्रमाण है कि भारतीय धागा उच्च गुणवत्ता वाला है। बांग्लादेश में लोकल मैन्युफैक्चरिंग सीमित थी और वहां भारतीय कपड़े पर ही गारमेंटिंग की जाती थी। अब आने वाला समय भारत का है और सरकार व उद्यमी मिलकर स्किल डेवलपमेंट पर काम कर रहे हैं, ताकि भारतीय कपड़ा एक मजबूत ब्रांड के रूप में वैश्विक बाजार में उभर सके।

हाकिम ने बताया कि गारमेंटिंग सेक्टर में सस्ती लेबर और स्किल के कारण बांग्लादेश अब तक आगे रहा है, लेकिन भारत में भी अब क्लस्टर डेवलपमेंट और विभिन्न योजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है। देशभर में टेक्सटाइल और गारमेंट पार्क विकसित किए जा रहे हैं, जिन पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि सूरत में पार्ट्स और क्वालिटी डेवलपमेंट पर जोर दिया जा रहा है और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए ठोस रणनीति बनाई जा रही है। व्यापारियों की मांग है कि सूरत में बेहतर गारमेंटिंग और टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार एक रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) सेंटर की स्थापना करे।

उन्होंने बताया कि देश का लगभग 65 प्रतिशत पॉलिस्टर कपड़ा सूरत में तैयार होता है और बांग्लादेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को जो एडवांटेज अब तक मिला था, वह आगे चलकर सूरत के कारोबारियों को मिलने की उम्मीद है।

कपड़ा व्यापारी अक्षय राठौड़ ने इस घटनाक्रम को सूरतवासियों के लिए खुशी की लहर बताया। उन्होंने कहा कि भारत के कुल कपड़ा व्यापार का करीब 65 प्रतिशत हिस्सा सूरत से जुड़ा हुआ है और गारमेंट सेक्टर के लिए यह समय एक सुनहरा अवसर लेकर आया है।

अक्षय राठौड़ के अनुसार, बांग्लादेश सरकार की विफल नीतियों का सीधा फायदा सूरत के कपड़ा कारोबारियों को मिलने वाला है। सूरत में गारमेंटिंग को लेकर युवाओं में पहले से ही उत्साह है और कई संस्थान स्किल डेवलपमेंट पर फोकस कर रहे हैं। आने वाले समय में यदि सरकार उद्योग और आरएंडडी को ज्यादा समर्थन देती है, तो सूरत न केवल देश बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कपड़ा और गारमेंटिंग हब के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर सकता है।

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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Railway Rules: ट्रेन में सफर करने से पहले जान लें ये नियम, नहीं तो जाना पड़ सकता है जेल

देश के अधिकांश लोग रेल यात्रा को आसान और सुरक्षित मानते हैं. लेकिन ट्रेन में की आपकी एक छोटी सी गलती आपको भारी पड़ सकती है. रेलवे के नियम सिर्फ कागजों तक ही सीमित नहीं है. इनका उल्लंघन करने की वजह से जुर्माना, जेल और गिरफ्तारी तक हो सकती है. इस वजह से ट्रेन में चढ़ने से पहले आपको कुछ बातों को जानना बहुत जरूरी है.  

ट्रेन में अगर आप ज्वलनशील सामान लेकर चलते हैं तो ये गुनाह है क्योंकि ट्रेन में ज्वलशील पदार्थ पूरी तरह से बैन है. पेट्रोल, डीजल, पटाखे, मिट्टी का तेल और गैस सिलेंडर जैसी चीजें ज्वलनशील पदार्थों का उदाहरण है. आप अगर ऐसे किसी समान के साथ पकड़े जाते हैं तो आपको एक हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है या फिर तीन साल की जेल या फिर दोनों सजा एक साथ. 

ट्रेन में बिना टिकट के सफर करना बहुत आम हो गया है लेकिन ये बहुत ही खतरनाक आदतों में से एक है. कुछ लोगों को लगता है कि उन्हें थोड़ी दूर जाना है तो कोई कुछ नहीं कहेगा. लेकिन अगर आपको रेलवे पुलिस या फिर टीटीई बिना टिकट के पकड़ता है तो आपको जुर्माना हो सकता है. अगर आपने जुर्माना नहीं भरा तो आपको जेल जाना पड़ सकता है. 

ट्रेन में मोबाइल स्पीकर पर तेज आवाज में बात करना या फिर फुल वॉल्यूम में गाना चालाना भी आपको पेरशानी में डाल सकता है. इसे पब्लिक डिस्टर्बेंस माना जाता है. किसी यात्री ने अगर आपकी शिकायत कर दी तो जीआरपी आपके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है और आपका चालाना कट सकता है. 

ऐसे कानूनी झंझट से बच सकते हैं

आपको हमेशा ध्यान देना चाहिए कि ट्रेन में चलते वक्त आपको नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए. आप नियमों को मानते हैं तो हर प्रकार के कानूनी झंझट से बच सकते हैं. अगली बार आप जब भी ट्रेन में बैठते हैं तो आपको इन बातों का खास ख्याल रखना है. 

 

 

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  Sports

क्रिकेट स्टंप्स की लंबाई कितनी होती है? आईसीसी ने कब दी थी एलईडी स्टंप्स और विकेट को मंजूरी, कितनी होती है इसकी कीमत

Cricket Stumps height Price: क्रिकेट में आए दिन नए नए नियम लागू होते रहते हैं. पहले क्रिकेट के स्टंप्स और बेल्स लकड़ी के होते थे. लेकिन अब इसका कायाकल्प हो चुका है. मौजूदा समय में स्टंप्स और बेल्स में एलईडी लाइट लगी रहती हैं. रात के समय लिमटेड ओवर के क्रिकेट में विकेट पर या बेल्स पर गेंद लगने के बाद वह चमकने लगती है. इनमें लाइट लगने से अंपायर्स के लिए फैसला लेना आसान हो गया कि बेल्स गेंद से या हवा से गिरी है. एक जोड़ी स्टंप्स और बेल्स की कीमत लगभग 30 से 35 लाख रुपये होती है. Thu, 29 Jan 2026 22:03:49 +0530

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