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क्या थरूर की नाराजगी हुई दूर? राहुल गांधी और खडगे से मुलाकात के बाद अटकलें तेज

कांग्रेस पार्टी में एक बार फिर अंदरूनी खींचतान की चर्चाएं तेज हो गई हैं. इसकी वजह बनी है वरिष्ठ नेता शशि थरूर की वह बंद कमरे में हुई मुलाकात, जो उन्होंने संसद परिसर में राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ की. हालांकि इस बैठक को लेकर ये दावा भी किया जा रहा है कि शशि थरूर की आलाकमान को लेकर चल रही नाराजगी खत्म हो गई है. बता दें कि बैठक राहुल गांधी के कार्यालय में हुई, दरवाजे बंद रहे और बाहर मीडिया लंबा इंतजार करता रहा. करीब आधे घंटे चली इस मीटिंग के बाद कोई आधिकारिक बयान नहीं आया, लेकिन चुप्पी ने सियासी अटकलों को और हवा दे दी. हालांकि बाद में शशि थरूर की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई. 

क्या बोले शशि थरूर

शशि थरूर ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से मुलाकात के बाद प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि ये मुलाकात काफी अच्छी, रचनात्मक, सकारात्मक रही. उन्होंने कि दोनों नेताओं के साथ बातचीत हुई. यही नहीं शशि थरूर ने ये भी साफ किया कि उन्हें  किसी भी तरह का उम्मीदवार बनने में दिलचस्पी नहीं है. थरूर ने साफ कहा कि उन्हें सिर्फ अपने संसदीय क्षेत्र तिरुवनंतपुरम के वोटर्स के हितों का ध्यान रखना है. 

क्यों अहम मानी जा रही है यह मुलाकात

कांग्रेस इस समय संगठनात्मक चुनौतियों, चुनावी दबाव और नेतृत्व संतुलन के बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रही है. ऐसे में शशि थरूर जैसे अनुभवी और चर्चित नेता की शीर्ष नेतृत्व के साथ ‘पावर मीटिंग’ को सामान्य नहीं माना जा रहा. यह बातचीत ऐसे वक्त पर हुई है, जब बजट सत्र शुरू होने वाला है और केरल में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज होती दिख रही हैं.

थरूर और कांग्रेस नेतृत्व के बीच बढ़ी दूरी?

बीते कुछ महीनों में शशि थरूर लगातार सुर्खियों में रहे हैं. कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ को लेकर, तो कभी पार्टी बैठकों से दूरी को लेकर. केरल कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में भी उनका रुख चर्चा में रहा है. हाल ही में केरल चुनाव रणनीति पर हुई अहम बैठक में उनकी गैरमौजूदगी और सोनिया गांधी के आवास पर बुलाई गई बैठक में शामिल न होना सवालों के घेरे में आया. आधिकारिक वजह यात्रा बताई गई, लेकिन पार्टी के भीतर नाराजगी की चर्चाएं भी सामने आईं.

खड़गे की मौजूदगी का क्या मतलब

इस बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे की मौजूदगी इसे और गंभीर बनाती है. वे सिर्फ पार्टी अध्यक्ष नहीं, बल्कि संगठनात्मक संतुलन के अहम स्तंभ माने जाते हैं. राहुल गांधी के साथ उनकी संयुक्त मौजूदगी यह संकेत देती है कि कांग्रेस नेतृत्व मतभेदों को टालने के बजाय सीधे संवाद के जरिए सुलझाना चाहता है.

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रील बनाना थाना प्रभारी को पड़ा भारी, पत्नी संग वीडियो वायरल होने पर लाइन हाजिर

सोशल मीडिया के दौर में रील कल्चर इस कदर हावी हो गया है कि आम लोगों के साथ-साथ जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी भी इसकी चपेट में आ रहे हैं. हर किसी में वायरल होने की होड़ मची हुई है. इसी कड़ी में झारखंड के पलामू जिले से एक मामला सामने आया है, जिसने पुलिस विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

थाना परिसर के बाहर बना डांस रील

दरअसल, सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें हुसैनाबाद थाना के थाना प्रभारी सोनू चौधरी अपनी पत्नी के साथ थाना परिसर के बाहर रील बनाते नजर आ रहे हैं. वीडियो में देखा जा सकता है कि थाना प्रभारी वर्दी में पत्नी के साथ डांस कर रहे हैं. वीडियो सामने आते ही यह तेजी से वायरल हो गया और लोगों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए.

वायरल होते ही मची हलचल

वीडियो के वायरल होने के बाद झारखंड पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. सोशल मीडिया पर लोग यह सवाल उठाने लगे कि क्या ड्यूटी के दौरान इस तरह का आचरण एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी को शोभा देता है. मामले की गंभीरता को देखते हुए पलामू पुलिस अधीक्षक ने तत्काल संज्ञान लिया.

थाना प्रभारी लाइन हाजिर

पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर थाना प्रभारी सोनू चौधरी को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया. यह कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है. साथ ही जिले में प्रशासनिक फेरबदल भी किया गया है.

नया थाना प्रभारी नियुक्त

प्रशासनिक बदलाव के तहत पुलिस अंचल निरीक्षक चंदन कुमार को हुसैनाबाद थाना का नया प्रभारी नियुक्त किया गया है. इस निर्णय के बाद जिले के पुलिस महकमे में हलचल देखी जा रही है और अन्य अधिकारियों को भी सतर्क रहने का संदेश दिया गया है.

जांच की जिम्मेदारी एसडीपीओ को

मामले की जांच के लिए पुलिस अधीक्षक ने मोहम्मद याकूब को जिम्मेदारी सौंपी थी. जांच में प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि थाना परिसर और ड्यूटी के दौरान रील बनाना सेवा नियमों का उल्लंघन है. जांच पूरी होने के बाद सोनू चौधरी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई.

बार-बार सामने आ रहे ऐसे मामले

गौरतलब है कि यह कोई पहला मामला नहीं है. आए दिन देश के अलग-अलग हिस्सों से सरकारी दफ्तरों, थानों और अस्पतालों में रील बनाने के वीडियो सामने आते रहते हैं. ऐसे मामलों में कार्रवाई के बावजूद रील कल्चर का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जो प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है.

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