दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच संयुक्त फैक्ट शीट व वीजा सहयोग पर चर्चा
सियोल, 29 जनवरी (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया और अमेरिका के वरिष्ठ राजनयिकों ने गुरुवार को शिखर सम्मेलनों में हुए संयुक्त समझौतों के क्रियान्वयन और दक्षिण कोरियाई कामगारों के लिए अमेरिकी वीजा मामलों में सहयोग मजबूत करने पर चर्चा की। यह जानकारी दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने दी।
मंत्रालय के अनुसार, ये वार्ता दक्षिण कोरिया के आर्थिक मामलों के उप विदेश मंत्री पार्क जोंग-हान और पूर्वी एशिया एवं प्रशांत मामलों के लिए अमेरिकी विदेश विभाग के प्रधान उप सहायक सचिव जोनाथन फ्रिट्ज के बीच हुई। योनहाप समाचार एजेंसी ने मंत्रालय के हवाले से यह जानकारी दी।
फ्रिट्ज इस सप्ताह सियोल के दौरे पर हैं, जहां वे अमेरिकी वीजा सुधार से जुड़े अनुवर्ती संवाद कर रहे हैं। यह सुधार कार्य समूह उस घटना के बाद गठित किया गया था जब पिछले वर्ष जॉर्जिया में अमेरिकी इमिग्रेशन कार्रवाई के दौरान 300 से अधिक दक्षिण कोरियाई कामगारों को गिरफ्तार कर हिरासत में लिया गया था।
गुरुवार की यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब सियोल अमेरिका को यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहा है कि वह अमेरिका में 350 अरब डॉलर के निवेश के प्रति प्रतिबद्ध है। यह प्रयास तब तेज हुआ, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेशनल असेंबली में विधायी प्रगति की कमी का हवाला देते हुए दक्षिण कोरिया पर शुल्क बढ़ाने की चेतावनी दी थी।
विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, “उप मंत्री पार्क ने दक्षिण कोरिया-अमेरिका शिखर सम्मेलनों से जुड़े अनुवर्ती कदमों को ईमानदारी से लागू करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और सुझाव दिया कि दोनों देश अपने-अपने कूटनीतिक अधिकारियों के बीच घनिष्ठ संवाद बनाए रखें।”
पार्क ने अमेरिका में निवेश कर रही दक्षिण कोरियाई कंपनियों के लिए सुचारु व्यावसायिक आदान-प्रदान सुनिश्चित करने हेतु वाशिंगटन से निरंतर सहयोग का भी आग्रह किया।
बुधवार को हुई वीजा कार्य समूह की बैठक में अमेरिका ने कहा कि उसने अल्पकालिक बी-1 बिजनेस वीजा आवेदनों के लिए “विशेषीकृत प्रशिक्षकों” (स्पेशलाइज्ड ट्रेनर्स) की एक नई श्रेणी तय की है। इससे वीजा पात्रता को लेकर स्पष्टता आने की उम्मीद है।
दक्षिण कोरियाई कंपनियों का कहना है कि अमेरिकी वीजा नियमों की अस्पष्टता के कारण उनके कर्मचारियों को व्यावसायिक यात्राओं के दौरान भ्रम का सामना करना पड़ता है।
दोनों पक्षों ने जहाज निर्माण और अन्य रणनीतिक उद्योगों सहित विभिन्न क्षेत्रों में यह सुनिश्चित करने पर भी चर्चा की कि दक्षिण कोरियाई निवेशक अमेरिका में अपने निवेश कार्यों को सुचारु रूप से आगे बढ़ा सकें।
--आईएएनएस
डीएससी
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क्या थरूर की नाराजगी हुई दूर? राहुल गांधी और खडगे से मुलाकात के बाद अटकलें तेज
कांग्रेस पार्टी में एक बार फिर अंदरूनी खींचतान की चर्चाएं तेज हो गई हैं. इसकी वजह बनी है वरिष्ठ नेता शशि थरूर की वह बंद कमरे में हुई मुलाकात, जो उन्होंने संसद परिसर में राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ की. हालांकि इस बैठक को लेकर ये दावा भी किया जा रहा है कि शशि थरूर की आलाकमान को लेकर चल रही नाराजगी खत्म हो गई है. बता दें कि बैठक राहुल गांधी के कार्यालय में हुई, दरवाजे बंद रहे और बाहर मीडिया लंबा इंतजार करता रहा. करीब आधे घंटे चली इस मीटिंग के बाद कोई आधिकारिक बयान नहीं आया, लेकिन चुप्पी ने सियासी अटकलों को और हवा दे दी. हालांकि बाद में शशि थरूर की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई.
क्या बोले शशि थरूर
शशि थरूर ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से मुलाकात के बाद प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि ये मुलाकात काफी अच्छी, रचनात्मक, सकारात्मक रही. उन्होंने कि दोनों नेताओं के साथ बातचीत हुई. यही नहीं शशि थरूर ने ये भी साफ किया कि उन्हें किसी भी तरह का उम्मीदवार बनने में दिलचस्पी नहीं है. थरूर ने साफ कहा कि उन्हें सिर्फ अपने संसदीय क्षेत्र तिरुवनंतपुरम के वोटर्स के हितों का ध्यान रखना है.
क्यों अहम मानी जा रही है यह मुलाकात
कांग्रेस इस समय संगठनात्मक चुनौतियों, चुनावी दबाव और नेतृत्व संतुलन के बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रही है. ऐसे में शशि थरूर जैसे अनुभवी और चर्चित नेता की शीर्ष नेतृत्व के साथ ‘पावर मीटिंग’ को सामान्य नहीं माना जा रहा. यह बातचीत ऐसे वक्त पर हुई है, जब बजट सत्र शुरू होने वाला है और केरल में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज होती दिख रही हैं.
थरूर और कांग्रेस नेतृत्व के बीच बढ़ी दूरी?
बीते कुछ महीनों में शशि थरूर लगातार सुर्खियों में रहे हैं. कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ को लेकर, तो कभी पार्टी बैठकों से दूरी को लेकर. केरल कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में भी उनका रुख चर्चा में रहा है. हाल ही में केरल चुनाव रणनीति पर हुई अहम बैठक में उनकी गैरमौजूदगी और सोनिया गांधी के आवास पर बुलाई गई बैठक में शामिल न होना सवालों के घेरे में आया. आधिकारिक वजह यात्रा बताई गई, लेकिन पार्टी के भीतर नाराजगी की चर्चाएं भी सामने आईं.
खड़गे की मौजूदगी का क्या मतलब
इस बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे की मौजूदगी इसे और गंभीर बनाती है. वे सिर्फ पार्टी अध्यक्ष नहीं, बल्कि संगठनात्मक संतुलन के अहम स्तंभ माने जाते हैं. राहुल गांधी के साथ उनकी संयुक्त मौजूदगी यह संकेत देती है कि कांग्रेस नेतृत्व मतभेदों को टालने के बजाय सीधे संवाद के जरिए सुलझाना चाहता है.
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