शनिवार को केंद्रीय मंत्री शाह उज्जैन को देंगे 255 करोड़ के अत्याधुनिक डेयरी प्लांट की सौगात, पैक्ड मिल्क से घी तक का होगा उत्पादन
केन्द्रीय सहकारिता एवं गृह मंत्री अमित शाह 2 एवं 3 अक्टूबर को भोपाल प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान वे कई कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इस मौके पर वे डिजिटल भूमि-पूजन कर उज्जैन को 255 करोड़ रुपये के अत्याधुनिक डेयरी प्लांट की सौगात भी देंगे। प्लांट की शुरूआत 3 लाख लीटर प्रतिदिन की क्षमता से होगी, भविष्य में इसे 5 लाख लीटर तक विस्तार करने का लक्ष्य है।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता के विस्तार और डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में लगातार प्रयास किया जा रहा है। उज्जैन व आसपास के क्षेत्रों में दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता के विस्तार और डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ द्वारा 255 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक डेयरी प्लांट स्थापित किया जा रहा है।
इसी क्रम में केंद्रीय सहकारिता एवं गृह मंत्री अमित शाह शनिवार को भोपाल से इस प्लांट का डिजिटल भूमि-पूजन करेंगे। यह परियोजना आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाओं के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों से प्राप्त दूध के बेहतर उपयोग और मूल्यवर्धन को बढ़ावा देगी। साथ ही क्षेत्र में डेयरी गतिविधियों के विस्तार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने तथा उपभोक्ताओं तक उच्च गुणवत्ता वाले डेयरी उत्पाद पहुंचाने की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।
परियोजना को दो वर्ष में पूर्ण करने का लक्ष्य
उज्जैन में स्थापित होने वाला यह अत्याधुनिक डेयरी प्लांट क्षेत्र में दुग्ध प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और विभिन्न डेयरी उत्पादों के उत्पादन को नई गति देगा। परियोजना की कुल लागत में से 170 करोड़ रुपये राज्य शासन द्वारा अनुदान के रूप में प्रदान किए जाएंगे, जबकि शेष 85 करोड़ रुपये दुग्ध संघ द्वारा ऋण के माध्यम से जुटाए जाएंगे।
प्रस्तावित प्लांट की शुरुआत 3 लाख लीटर प्रतिदिन दूध प्रसंस्करण क्षमता के साथ होगी। भविष्य में इसकी क्षमता को बढ़ाकर 5 लाख लीटर प्रतिदिन तक किया जा सकेगा। इससे उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती दुग्ध उपलब्धता के साथ प्रसंस्करण क्षमता का विस्तार संभव होगा। परियोजना को अगले दो वर्ष में पूर्ण करने का लक्ष्य है।
पैक्ड मिल्क से घी तक का उत्पादन
- प्लांट में आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाओं के साथ विभिन्न प्रकार के डेयरी उत्पादों का उत्पादन किया जाएगा।
- इसमें 1.50 लाख लीटर प्रतिदिन पैक्ड मिल्क, 25 हजार लीटर प्रतिदिन दही तथा 10 हजार लीटर प्रतिदिन लस्सी/छाछ के उत्पादन की क्षमता होगी।
- 10 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता का घी प्लांट भी स्थापित किया जाएगा।
केन्द्रीय सहकारिता एवं गृह मंत्री श्री शाह उज्जैन को देंगे 255 करोड़ रूपये के अत्याधुनिक डेयरी प्लांट की सौगात
केंद्रीय सहकारिता मंत्री 3 अक्टूबर को करेंगे डेयरी प्लांट का डिजिटल भूमि-पूजन
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— Animal Husbandry Department, MP (@mp_husbandry) October 1, 2026
दाल-चावल के दानों से उकेरी बापू की तस्वीर, गांधी जयंती पर उज्जैन के कलाकार ने दी अनूठी श्रद्धांजलि
गांधी जयंती के अवसर पर उज्जैन के कलाकार रवि आकोदिया ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को एक अनोखे अंदाज में श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने कैनवास पर बापू का रेखाचित्र उकेरने के बाद दाल, चावल और विभिन्न अनाजों के दानों को सहेजकर उनका आकर्षक पोर्ट्रेट तैयार किया। अपनी इस अनूठी कलाकृति के माध्यम से रवि ने गांधी जी के सत्य-अहिंसा के आदर्शों को याद करने के साथ-साथ आम जनता को अन्न का आदर करने का एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया है।
फेविकोल से चिपकाया एक-एक दाना
इस खास पोर्ट्रेट को तैयार करने की प्रक्रिया बेहद धैर्य और बारीकी भरी रही। रवि ने सबसे पहले कैनवास बोर्ड पर बापू का स्केच बनाया, फिर गोंद की मदद से अलग-अलग प्रकार की दालों और चावल के दानों को एक-एक कर चिपकाया। लगभग 4 से 5 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद यह कलाकृति बनकर तैयार हुई। इसमें करीब 5 से 6 प्रकार के घरेलू अनाजों का उपयोग किया गया, जिसमें कुल मिलाकर लगभग एक से डेढ़ किलोग्राम अनाज लगा।
बीते 10 सालों से दे रहे अनूठी श्रद्धांजलि
पंजाब नेशनल बैंक में कार्यरत रवि पिछले 10 वर्षों से हर गांधी जयंती पर अलग-अलग माध्यमों से बापू की तस्वीर बनाकर उन्हें नमन करते आ रहे हैं। इससे पहले वे ड्राइंग, स्केचिंग, पेंटिंग और कैनवास पर पोर्ट्रेट बना चुके हैं। वर्ष 2025 में उन्होंने जमीन पर बालू-रेत के इस्तेमाल से गांधी जी की आकृति उकेरी थी। इस बार उन्होंने बाजार से कोई महंगा सामान खरीदे बिना घर में रोज इस्तेमाल होने वाली दाल-चावल को ही माध्यम चुना।
कम बारिश के बीच दिया अन्न बचाने का संदेश
रवि ने बताया कि इस साल प्रदेश में बारिश कम हुई है ऐसे में किसानों की मेहनत और अनाज की महत्ता को रेखांकित करने के लिए उन्होंने यह विचार चुना। बैंक की व्यस्त नौकरी के बावजूद वे कला के लिए समय निकालते हैं। उनका कहना है कि वे किसी पुरस्कार या प्रचार के लिए नहीं, बल्कि आत्मसंतुष्टि के लिए यह काम करते हैं। गांधी जी को केवल याद करने के बजाय उनके विचारों और अन्न का सम्मान करना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
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