शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स 1248 अंक टूटा, निफ्टी भी 384 अंक फिसला
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। बीमा क्षेत्र में कमीशन और वितरण भुगतान को लेकर प्रस्तावित बदलाव तथा कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से निवेशकों की चिंता बढ़ी। इसके साथ ही ईरान-अमेरिका तनाव ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया।
सेंसेक्स 73,580 पर बंद, निफ्टी 23,063 पर
गुरुवार को कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 1,247.71 अंक यानी 1.67 प्रतिशत गिरकर 73,580.54 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स 74,272.40 अंक पर खुला था।
वहीं निफ्टी 383.70 अंक यानी 1.64 प्रतिशत टूटकर 23,063.10 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी 23,221.80 अंक पर खुला था।
बाजार में गिरावट व्यापक रही। प्रमुख 16 क्षेत्रीय सूचकांकों में से 14 में गिरावट दर्ज की गई।
मझोली कंपनियों के प्रमुख सूचकांक में 1.41 प्रतिशत और छोटी कंपनियों के सूचकांक में 0.76 प्रतिशत की गिरावट रही।
बाजार में उतार-चढ़ाव का संकेत देने वाला अस्थिरता सूचकांक करीब 10 प्रतिशत बढ़कर 11.37 पर पहुंच गया।
बीमा क्षेत्र में प्रस्तावित बदलाव से वित्तीय कंपनियों पर दबाव
गुरुवार की गिरावट का तत्काल प्रमुख कारण बीमा क्षेत्र से जुड़ा प्रस्ताव रहा।
बीमा नियामक द्वारा कमीशन और वितरण भुगतान में बदलाव का प्रस्ताव सामने आने के बाद बीमा कारोबार से आय पाने वाली कंपनियों, बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के शेयरों में जोरदार बिकवाली हुई।
पॉलिसीबाजार की मूल कंपनी पीबी फिनटेक के शेयर करीब 30 प्रतिशत टूट गए, जबकि मैक्स फाइनेंशियल में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट रही।
बैंकों में एक्सिस बैंक के शेयर 3.66 प्रतिशत, एचडीएफसी बैंक के शेयर 1.39 प्रतिशत और बजाज फाइनेंस के शेयर 3.89 प्रतिशत नीचे रहे।
बजाज फिनसर्व में 2.98 प्रतिशत और कोटक महिंद्रा बैंक में 1.82 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
कमीशन घटाने का प्रस्ताव बना चिंता की वजह
बीमा नियामक ने बुधवार को जारी परामर्श पत्र में जीवन, स्वास्थ्य और मोटर बीमा उत्पादों पर कमीशन कम करने, कर्ज से जुड़े बीमा की बिक्री पर भुगतान की सीमा तय करने और बीमा कंपनियों के खर्च की सीमा को धीरे-धीरे सख्त करने का प्रस्ताव रखा है।
इन बदलावों का उद्देश्य बीमा पॉलिसियों की लागत कम करना और गलत तरीके से बीमा बेचने की घटनाओं पर रोक लगाना बताया गया है।
हालांकि, बाजार विश्लेषकों के अनुसार, इससे बीमा कंपनियों और उनके वितरण कारोबार के मौजूदा तरीके पर असर पड़ सकता है।
वित्तीय कंपनियों के शेयरों में जोरदार गिरावट
वित्तीय कंपनियों के शेयरों में गिरावट का असर सीधे सेंसेक्स और निफ्टी पर पड़ा। वित्तीय सेवा सूचकांक में 1.56 प्रतिशत, निजी बैंकों के सूचकांक में 1.76 प्रतिशत और बैंक रहित वित्तीय सेवा क्षेत्र के सूचकांक में 2.62 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
एचडीएफसी बैंक 1.39 प्रतिशत, भारतीय स्टेट बैंक 0.75 प्रतिशत और आईसीआईसीआई बैंक 0.64 प्रतिशत नीचे बंद हुए।
बाजार के प्रमुख सूचकांकों में वित्तीय कंपनियों का बड़ा हिस्सा होने के कारण इस क्षेत्र में हुई तेज बिकवाली का असर पूरे बाजार पर दिखाई दिया।
कच्चा तेल 100 डॉलर के पार पहुंचा
बाजार पर दूसरा बड़ा दबाव कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चा तेल 102.24 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल का भाव 91.43 डॉलर प्रति बैरल रहा।
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से भारत के लिए आयात बिल बढ़ सकता है। इसका असर महंगाई, रुपये की कीमत और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ने की चिंता बाजार में बनी हुई है।
ईरान-अमेरिका तनाव से बढ़ी चिंता
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। क्षेत्र में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो इससे महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमत और अमेरिकी बांड की ब्याज दरें भारतीय शेयर बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण कारक रहेंगी।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी चिंता
विदेशी निवेशकों की बाजार में गतिविधियां भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। हालांकि पिछले कारोबारी सत्र में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 1,617.45 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी। इसके बावजूद भारतीय बाजार में विदेशी पूंजी के व्यापक रुख को लेकर चिंता बनी हुई है।
मझोली और छोटी कंपनियों के शेयर भी गिरे
गुरुवार को गिरावट का असर केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा। मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी दबाव देखने को मिला।
मझोली कंपनियों के प्रमुख सूचकांक में 1.41 प्रतिशत, मझोली कंपनियों के व्यापक सूचकांक में 1.19 प्रतिशत और छोटी कंपनियों के सूचकांक में 0.76 प्रतिशत की गिरावट रही। बाजार में अस्थिरता बढ़ने का संकेत देने वाला सूचकांक भी करीब 10 प्रतिशत उछल गया।
राष्ट्रीय शेयर बाजार की सूचीबद्धता पर भी नजर
गुरुवार को राष्ट्रीय शेयर बाजार की सूचीबद्धता भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रही। इसके सार्वजनिक निर्गम को तीन दिन की बोली प्रक्रिया में 5.71 गुना अभिदान मिला था। निर्गम का मूल्य 1,785 रुपये तय किया गया था।
हालांकि व्यापक बाजार में बीमा क्षेत्र के प्रस्तावित बदलाव, कच्चे तेल की कीमत, विदेशी निवेश और ईरान-अमेरिका तनाव जैसे मुद्दे निवेशकों के लिए प्रमुख चिंता बने रहे।
बाजार गिरने की बड़ी वजहें
- गुरुवार की बाजार गिरावट के पीछे घरेलू और वैश्विक दोनों कारण रहे। बीमा क्षेत्र में कमीशन और वितरण भुगतान से जुड़े प्रस्ताव ने वित्तीय कंपनियों के शेयरों पर तत्काल
- दबाव बनाया। वहीं कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर के पार जाने और ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ने से महंगाई तथा आयात बिल को लेकर चिंता बढ़ी।
- इसके अलावा अमेरिकी बांड की ऊंची ब्याज दरें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की धारणा को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक रहे।
Trump Administration Media Row: व्हाइट हाउस में फिर मिलेगी पत्रकारों को एंट्री, कोर्ट ने रद्द किया ट्रम्प का आदेश
अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन और प्रमुख मीडिया संस्थानों के बीच चल रही खींचतान में गुरुवार को एक नया और अहम मोड़ आ गया है। अमेरिकी संघीय न्यायाधीश टिमोथी केली ने ट्रंप प्रशासन को कड़ा निर्देश देते हुए सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको के पत्रकारों को व्हाइट हाउस में दोबारा प्रवेश देने का आदेश जारी किया है।
अदालत ने अपने शुरुआती फैसले में माना कि इन तीनों मीडिया संस्थानों के पत्रकारों की पहुंच रोकना अमेरिकी संविधान के प्रथम संशोधन के तहत मिले प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है। यह पूरा मामला पिछले सप्ताह ट्रंप प्रशासन द्वारा अचानक इन संस्थानों के पत्रकारों के हार्ड प्रेस बैज निष्क्रिय करने और उनकी व्हाइट हाउस में एंट्री बैन करने के फैसले से जुड़ा हुआ है।
18 सितंबर को ट्रंप ने की थी बैन की घोषणा, बिना प्रक्रिया कार्रवाई का आरोप
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर को सोशल मीडिया के माध्यम से सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको पर व्हाइट हाउस से प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया था। ट्रंप का आरोप था कि ये संस्थान गलत और झूठी रिपोर्टिंग कर रहे हैं। इस घोषणा के तुरंत बाद इन संस्थानों के पत्रकारों के प्रेस पास निष्क्रिय कर दिए गए।
इसके खिलाफ सीएनएन, एमएस नाउ और पॉलिटिको ने संघीय अदालत में मुकदमा दायर करते हुए दलील दी कि प्रशासन ने उनका प्रेस पास छीनने से पहले किसी भी उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया और यह कार्रवाई पूरी तरह भेदभावपूर्ण है।
न्यायाधीश टिमोथी केली के सवाल और वकीलों की तीखी बहस
बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान न्यायाधीश टिमोथी केली ने प्रशासन की इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि क्या पत्रकारों के पास रद्द करने से पहले नियमानुसार कोई उचित प्रक्रिया अपनाई गई थी या नहीं।
सुनवाई के दौरान ही जज ने संकेत दे दिया था कि प्रशासन ने उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया है। मीडिया संस्थानों के वकील थियोडोर बुट्रॉस ने अदालत में तुरंत प्रेस पास बहाल करने की मांग करते हुए कहा कि यह सब वैचारिक मतभेदों और आलोचनात्मक रिपोर्टिंग से बौखलाकर किया गया है। वहीं, दूसरी ओर न्याय विभाग ने अदालत में दलील दी कि व्हाइट हाउस में प्रवेश बिना शर्त का कोई असीमित अधिकार नहीं है।
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