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ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन, मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

विपक्षी पार्टियों और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग की. इस मामले में सीजेपी ने दो अक्तूबर से जेल भरो आंदोलन की चेतावनी दी है.

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नहीं रहे ‘वेलकम’ फिल्म के बल्लू… 56 साल की उम्र में मुश्ताक खान ने ली आखिरी सांस, मध्य प्रदेश से था खास नाता

बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता मुश्ताक खान का गुरूवार को 56 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने शाम करीब 7 बजे अपने जीवन की अंतिम सांस ली। दरअसल कुछ समय पहले उनका लंग कैंसर का इलाज सफल रहा था लेकिन करीब आठ दिन पहले बीमारी दोबारा लौट आई। हालत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक मुश्ताक खान पहले लंग कैंसर से उबर चुके थे। इसके बाद उनकी तबीयत सामान्य हो गई थी लेकिन हाल ही में कैंसर दोबारा लौट आया। बीमारी आखिरी चरण में पहुंचने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि डॉक्टरों की निगरानी में इलाज चलता रहा लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

वेलकम फिल्म से बनाई खास पहचान

वहीं मुश्ताक खान के निधन की खबर सामने आते ही फिल्म इंडस्ट्री और उनके चाहने वालों में शोक का माहौल बन गया। उन्होंने लंबे समय तक हिंदी सिनेमा और टीवी इंडस्ट्री में काम किया और अपने अलग अंदाज के अभिनय से पहचान बनाई। उनके कई किरदार आज भी दर्शकों को याद हैं। बता दें कि मुश्ताक खान ने अपने करियर में कई फिल्मों में सपोर्टिंग किरदार निभाए लेकिन फिल्म ‘वेलकम’ में निभाया गया बल्लू का किरदार उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गया। इस फिल्म में उनका मशहूर डायलॉग “मेरी एक टांग नकली है, मैं हॉकी का बहुत बड़ा खिलाड़ी था…” दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ और बाद में सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा में रहा।

इन फिल्मों में भी किया काम

दरअसल ‘वेलकम’ के अलावा उन्होंने ‘आशिकी’, ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘मुझसे शादी करोगी’, ‘गदर 2’, ‘बधाई 2’ और ‘स्त्री 2’ जैसी फिल्मों में भी काम किया। फिल्मों के साथ उन्होंने टीवी सीरियल ‘कुछ रंग प्यार के ऐसे भी’ में भी अभिनय किया। अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर उन्होंने अपने अभिनय की अलग पहचान बनाई और लंबे समय तक मनोरंजन जगत में सक्रिय रहे। बता दें कि उनका जन्म 31 दिसंबर 1969 को मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर में हुआ था।

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  Sports

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लवलीना ने एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. वह दो एशियन गेम्स फाइनल में पहुंचने वाली भारत की पहली महिला मुक्केबाज बन गईं और इनमें से एक फाइनल जीतकर उन्होंने स्वर्ण पदक भी अपने नाम किया. महान मुक्केबाज मैरी कॉम भी अपने करियर में दो एशियन गेम्स फाइनल तक नहीं पहुंच सकी थीं. ऐसे में लवलीना की यह उपलब्धि भारतीय बॉक्सिंग के लिए बेहद खास है. Fri, 2 Oct 2026 13:43:04 +0530

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