काफिले के लिए एम्बुलेंस रुकने पर Himanta Biswa Sarma ने मांगी माफी, 4 पुलिसकर्मी निलंबित
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने उनके काफिले को रास्ता देने के लिए एक एम्बुलेंस को रोके जाने पर उसमें मौजूद मरीज और उनके परिवार से बुधवार को माफी मांगी, जिसके बाद लापरवाही के आरोप में चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया। शर्मा ने कहा कि आपातकालीन देखभाल की जरूरत वाले किसी मरीज की जान से बढ़कर किसी भी मुख्यमंत्री का काफिला नहीं हो सकता। उन्होंने इस बात की जांच के आदेश दिए कि इस संबंध में उनके निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, आज सिलचर में मेरे काफिले को रास्ता देने के लिए एक एम्बुलेंस को रोक दिया गया। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है और मैं मरीज तथा उनके परिवार से माफी मांगता हूं। उन्होंने कहा, ‘‘आपातकालीन चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता वाले किसी भी जीवन से बढ़कर मुख्यमंत्री का काफिला कभी नहीं हो सकता।’’ शर्मा ने कहा कि उनके निर्देश बहुत स्पष्ट हैं कि अति विशिष्ट व्यक्तियों (वीआईपी) की आवाजाही से आम नागरिकों को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए, लेकिन इसका लागू न होना बेहद चिंताजनक है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने संबंधित अधिकारियों से जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और इस मामले की जांच कराने के लिए कहा है।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि इसे एक स्पष्ट चेतावनी माना जाए कि मुख्यमंत्री के काफिले से जुड़े निर्देशों का अक्षरशः पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘इसका उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।’’ शर्मा बराक घाटी के प्रमुख शहर सिलचर में तीन अक्टूबर को होने वाले नगर निकाय चुनावों के प्रचार के सिलसिले में वहां गए थे। घटना के बाद, कछाड़ के पुलिस अधीक्षक (एसपी) पार्थ प्रतिम दास ने सिचरुकंदी प्वाइंट से श्रीकोना स्थित बराक घाटी सचिवालय तक ट्रैफिक लाइन ड्यूटी के दौरान कथित लापरवाही बरतने के आरोप में चार पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
एम्बुलेंस को मुख्यमंत्री के काफिले को निकालने के लिए इसी मार्ग पर रोका गया था। एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, निलंबित पुलिसकर्मियों में सिलचर पुलिस थाने के अंतर्गत श्रीकोना पुलिस चौकी के प्रभारी उप-निरीक्षक (एसआई) विजय गोस्वामी और राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) चौकी के एसआई शिवशंकर दास शामिल हैं। निलंबित किए गए दो अन्य पुलिसकर्मियों में काटीगोड़ा पुलिस थाने के लांस नायक जहरुल इस्लाम और सिलचर यातायात शाखा के लांस नायक कौसर अहमद लश्कर (बरभुइया) शामिल हैं।
एसपी ने निलंबित पुलिसकर्मियों को सिलचर स्थित पुलिस रिजर्व में रिपोर्ट करने और सरकार द्वारा प्रदान की गई अपनी किट जमा करने का आदेश दिया है। उन्हें दैनिक हाजिरी में उपस्थित रहने और बिना पूर्व अनुमति के मुख्यालय न छोड़ने का निर्देश दिया गया है। निलंबित कर्मियों को नियमानुसार जीवन-निर्वाह भत्ता मिलता रहेगा।
वे अगले आदेश तक निलंबन के तहत ही रहेंगे। इससे पहले एम्बुलेंस के चालक ने बताया था कि मुख्यमंत्री का काफिला गुजरने के दौरान उसे केवल कुछ मिनटों के लिए रोका गया था। वहीं, घटना पर पर्दा डालने के स्पष्ट प्रयास के तहत पुलिस ने दावा किया था कि एम्बुलेंस में कोई मरीज नहीं था।
IIT Bombay छात्र Sahil Wakode की मौत पर अनशन जारी, माता-पिता ने की प्रोफेसर और निदेशक की गिरफ्तारी की मांग
(फोटो के साथ) मुंबई, 30 सितंबर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-मुंबई के छात्र साहिल वाकोडे के माता-पिता ने बुधवार को एक बार फिर संस्थान के प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला और निदेशक शिरीष केदारे की गिरफ्तारी की मांग दोहराई। न्याय की मांग को लेकर उनका अनशन बुधवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में जारी प्रदर्शन में मुंबई युवा कांग्रेस और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के कुछ कार्यकर्ता भी शामिल हुए।
उन्होंने साहिल की तस्वीरें हाथ में लेकर 22-वर्षीय छात्र के लिए न्याय की मांग की। साहिल के पिता रवींद्र वाकोडे ने मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया, जबकि परिवार के वकील ने कहा कि उनकी मांगों पर सरकार की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। इस बीच, पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि कथित आत्महत्या मामले की जांच कर रही मुंबई अपराध शाखा ने अब तक साहिल वाकोडे के माता-पिता, साथी छात्रों और आईआईटी के छात्रावास कर्मचारियों समेत 40 लोगों के बयान दर्ज किए हैं।
उन्होंने बताया कि हालांकि प्रोफेसर डूला का बयान अभी दर्ज नहीं किया गया है। उनके खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। जांचकर्ताओं ने साहिल के दो मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और एक टैबलेट को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को खोलने और उनमें मौजूद जानकारी हासिल करने के लिए कलीना स्थित फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भेजा है।
पुलिस को उम्मीद है कि डिजिटल सामग्री मिलने के बाद महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आ सकते हैं, जिससे बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र की मौत से पहले घटनाओं के सही क्रम को स्थापित करने में मदद मिलेगी। संस्थान के द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे (22) का शव 18 सितंबर की शाम उसके छात्रावास के कमरे में फंदे से लटका हुआ मिला। यह घटना मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान वाकोडे के कथित तौर पर चैटजीपीटी का इस्तेमाल करने के लिए मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए पकड़े जाने के कुछ घंटों बाद हुई।
उसके माता-पिता ने प्रतिष्ठित संस्थान में बेटे के साथ जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया है और वे प्रोफेसर डूला तथा आईआईटी मुंबई के निदेशक शिरीष केदारे की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। साहिल के माता-पिता ने कहा है कि वे तब तक अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे, जब तक उनके बेटे को न्याय नहीं मिल जाता और उसकी मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। रवींद्र वाकोडे ने इससे पहले कहा था, ‘‘जब तक दोनों प्रोफेसरों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, हमारा अनशन जारी रहेगा।’’ परिवार के वकील ने बताया कि आजाद मैदान पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति दे दी है और परिवार अधिकारियों की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार आंदोलन जारी रखेगा।
उन्होंने कहा कि परिवार ने निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच तथा दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की मांग दोहराई है। वकील ने बताया कि महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री राजकुमार बडोले, विधायक अमीन पटेल, जयदीप कवाड़े और महादेव जानकर बुधवार को प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और साहिल के माता-पिता से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने परिवार की मांगों और न्याय के लिए जारी संघर्ष के प्रति समर्थन और एकजुटता व्यक्त की।
वकील ने कहा, ‘‘जनप्रतिनिधियों और नेताओं की ओर से लगातार मिल रहे समर्थन से परिवार का न्याय पाने का संकल्प मजबूत हुआ है और वह कानूनी एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी लड़ाई जारी रखेगा।’’ साहिल के पिता की शिकायत के आधार पर पवई पुलिस ने पहले ही प्रोफेसर डूला के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। पुलिस को दिए बयान में साहिल के पिता ने आरोप लगाया था कि आखिरी मुलाकात के दौरान उनके बेटे ने कहा था कि प्रोफेसर डूला पिछले तीन महीने से आईआईटी मुंबई के निदेशक शिरीष केदारे के कहने पर उसके साथ जातिसूचक दुर्व्यवहार कर रहे थे और उसे झूठे मामले में फंसाए जाने का डर था। मुंबई पुलिस की अपराध शाखा 18 सितंबर की घटनाओं का क्रम पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।
जांचकर्ताओं ने यह पता लगाने के लिए छात्रों, शिक्षकों और प्रशासनिक कर्मचारियों से पूछताछ की है कि साहिल के परीक्षा कक्ष से निकलने के बाद क्या हुआ था। आईआईटी-मुंबई के बोर्ड ने पहले ही छात्र की मौत से जुड़े हालात की जांच के लिए 10-सदस्यीय समिति गठित की थी। कांग्रेस की मुंबई इकाई की अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने सोमवार को आजाद मैदान में प्रदर्शन कर रहे वाकोडे परिवार से मुलाकात कर उन्हें समर्थन दिया था।
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