CM पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने रचा इतिहास, UCC के एक वर्ष में दिखी समानता से समरसता की नई तस्वीर
Uttarakhand News: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना, जिसने यूसीसी को धरातल पर उतारकर न केवल संविधान की भावना को साकार किया, बल्कि समानता से समरसता की दिशा में पूरे देश को एक नई राह दिखाई है. यह एक वर्ष केवल कानून के क्रियान्वयन का नहीं बल्कि समाज में विश्वास, सम्मान और न्याय की नई संस्कृति के निर्माण का साक्षी रहा है.
समरसता और समानता का एक वर्ष
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवभूमि की जनता से उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू करने का संकल्प लिया था. जनता के आशीर्वाद और समर्थन से सत्ता में आने के बाद, उन्होंने पहली ही कैबिनेट बैठक में इस संकल्प को निर्णय में बदल दिया. इसके बाद व्यापक जनसंवाद, विशेषज्ञों की समिति, विधायी प्रक्रिया और संवैधानिक औपचारिकताओं के माध्यम से 7 फरवरी 2024 को यूसीसी विधेयक को विधानसभा में पारित किया गया. 11 मार्च 2024 को राष्ट्रपति महोदया की स्वीकृति मिलने के बाद, सभी नियमावली और प्रक्रियाएं पूरी कर 27 जनवरी 2025 को उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता को विधिवत लागू कर दिया गया.
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UCC लागू होने के बाद उत्तराखंड में बीते एक साल में हलाला, बहुविवाह का एक भी केस नहीं
यह ऐतिहासिक पहल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 की उस भावना को साकार करती है, जिसकी परिकल्पना बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित संविधान निर्माताओं ने की थी. साथ ही, यह डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की राष्ट्रीय एकात्मता की सोच और पं. श्री दीनदयाल उपाध्याय जी के सिद्धांतों को व्यवहार में उतारने का सशक्त प्रयास है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' के संकल्प से प्रेरित होकर उत्तराखंड ने यह सिद्ध किया है कि मजबूत फैसले देश को तोड़ते नहीं, बल्कि जोड़ते हैं.
समान नागरिक संहिता का सबसे बड़ा प्रभाव महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय के रूप में सामने आया है. यूसीसी के लागू होने से राज्य की बहन-बेटियों को हलाला, बहुविवाह, बाल विवाह और तीन तलाक जैसी कुप्रथाओं से मुक्ति मिली है. यह गर्व का विषय है कि कानून के लागू होने के बाद उत्तराखंड में एक भी हलाला या बहुविवाह का मामला सामने नहीं आया है. यूसीसी ने महिलाओं को समान अधिकार, सम्मान और सुरक्षा का मजबूत कानूनी आधार प्रदान करते हुए उन्हें समाज में सशक्त भूमिका निभाने का अवसर दिया है.
4 लाख 74 हजार 447 से अधिक विवाह पंजीकरण
UCC के एक साल के भीतर ही इसके सकारात्मक परिणाम आंकड़ों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं. पुराने अधिनियम के तहत जहां प्रतिदिन औसतन केवल 67 विवाह पंजीकरण होते थे, वहीं यूसीसी लागू होने के बाद यह संख्या बढ़कर प्रतिदिन 1400 से अधिक तक पहुंच गई है. एक वर्ष से भी कम समय में 4 लाख 74 हजार 447 से अधिक विवाह पंजीकरण सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं. अब पति-पत्नी कहीं से भी ऑनलाइन माध्यम से सुरक्षित और सरल प्रक्रिया के तहत विवाह पंजीकरण करा सकते हैं, जिससे समय, संसाधन और मेहनत तीनों की बचत हो रही है.
यूसीसी ने न केवल विवाह पंजीकरण, बल्कि विवाह विच्छेद, वसीयत पंजीकरण, लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण और उसके समापन जैसी सेवाओं को भी डिजिटल, पारदर्शी और सुगम बनाया है. बीते एक वर्ष में कुल 5 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 95 प्रतिशत से अधिक का निस्तारण किया जा चुका है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस दौरान निजता उल्लंघन की एक भी शिकायत सामने नहीं आई है. मजबूत साइबर सुरक्षा, फेसलेस सिस्टम और गोपनीयता आधारित प्रक्रिया ने नागरिकों के भरोसे को और मजबूत किया है.
22 भाषाओं में उपलब्ध है UCC की सेवाएं
CM धामी यह पहले ही साफ कर चुके हैं कि यह कानून किसी धर्म या पंथ के खिलाफ नहीं है, बल्कि समाज की कुप्रथाओं के खिलाफ है. इसका उद्देश्य सभी नागरिकों में 'समानता से समरसता' स्थापित करना है, ताकि हर व्यक्ति को समान अधिकार, समान अवसर और समान सम्मान मिल सके.
यूसीसी की एक वर्ष की इस यात्रा ने यह सिद्ध कर दिया है कि उत्तराखंड ने केवल एक कानून लागू नहीं किया, बल्कि एक नई सामाजिक चेतना को जन्म दिया है. यह चेतना न्याय, समानता और गरिमा पर आधारित है. मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में देवभूमि उत्तराखंड आज एक ऐसे भविष्य की ओर अग्रसर है, जहां हर नागरिक को सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त जीवन जीने का अवसर मिले और जहां समानता से समरसता तक का यह सफर पूरे देश के लिए एक प्रेरणास्रोत बने.
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अरिजीत सिंह की पहली पत्नी रह चुकी हैं सिंगिंग रियलिटी शो की विनर, जानें क्यों एक साल में ही टूट गई थी शादी?
Arijit Singh First Wife: बॉलीवुड के फेमस सिंगर अरिजीत सिंह के गानों की आवाज जब भी किसी के कानों में पड़ती है, तो लोग इसे गुनगुनाने लग जाते हैं. अरिजीत की आवाज ने सालों से लोगों को दीवाना बनाया हुआ है. लेकिन अब सिंगर ने अचानक प्लेबैक सिंगिंग से संन्यास ले लिया है. जिससे उनके फैंस निराश हो गए हैं. इस बीच अब हर कोई अरिजीत की पर्सनल लाइफ के बारे में जानना चाह रहा है. तो क्या आपको पता हैं कि सिंगर ने एक नहीं बल्कि दो शादियां की थी. जी हां, अरिजीत की पहली पत्नी भी एक सिंगर है, तो चलिए जानते हैं उनके बारे में-
कौन थी अरिजीत सिंह की पहली पत्नी?
अरिजीत सिंह को बचपन से ही गाने का शौक थे, ऐसे में साल 2005 में वो रियलिटी शो 'फेम गुरुकुल' में नजर आए थे. लेकिन इस शो में ज्यादा नहीं टिक पाए और बाहर हो गए थे. लेकिन इसी शो में उनकी पहली मुलाकात रूपरेखा बनर्जी (Ruprekha Banerjee) से हुई थी. रूपरेखा ने काजी तौकीर के साथ मिलकर 'फेम गुरुकुल' जीता था. वहीं, दूसरी ओर अरिजीत सिंह और रूपरेखा बनर्जी की लव स्टोरी भी शुरू हो गई थी. फिर साल 2013 में दोनों ने शादी भी कर ली थी, लेकिन ये रिश्ता लंबा नहीं चला और एक साल के अंदर ही दोनों का तलाक हो गया था. लेकिन दोनों का तलाक क्यों हुआ था इसकी वजह आजतक सामने नहीं आई है.
बचपन की दोस्त से की दूसरी शादी
रूपरेखा बनर्जी से तलाक के बाद अरिजीत सिंह ने अपनी बचपन की दोस्त कोयल रॉय (Koel Roy) के साथ 21 जनवरी 2014 को दूसरी शादी की. अरिजीत सिंह ने बेहद ही प्राइवेट सेरेमनी रखी थी और पश्चिम बंगाल के त्रिपाठी मंदिर में सात फेरे लिए थे. अरिजीत ने मीडिया से अपनी शादी छिपाकर रखी थी. बता दें, कोयल रॉय का भी सिंगर की तरह डिवोर्स हुआ था. कोयल की पहले पति से एक बेटी है. वहीं, दूसरी ओर रूपरेखा बनर्जी ने भी बाद में नलिनाक्ष्या भट्टाचार्य से शादी की और उनकी एक बेटी है. एक तरफ जहां अरिजीत का करियर आसमान छूने लगा. तो वहीं, रूपरेखा बनर्जी ने भी कई गाने गए, लेकिन अरिजीत की तरह सफलता हासिल नहीं कर पाई.
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