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कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 62.50 रुपए महंगा हुआ, एटीएफ का भी बढ़ा दाम

नई दिल्ली, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क कीमतों में मजबूती के अनुरूप गुरुवार से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 62.50 रुपए की बढ़ोतरी की है।

इस संशोधन के बाद दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 62.50 रुपए बढ़कर 2,810 रुपए हो गई है। सितंबर में भी इसकी कीमत 9.50 रुपए बढ़ाई गई थी। इससे पहले अगस्त में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में 192 रुपए और जुलाई में 183.50 रुपए की कटौती की गई थी।

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी के बीच जून में कमर्शियल एलपीजी की कीमत रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थी। इसके अलावा, फरवरी से जून के बीच 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत में 1,373 रुपए की बढ़ोतरी हुई थी, जिससे इसकी कीमत 1,740.50 रुपए से बढ़कर 3,113.50 रुपए हो गई थी।

हालांकि, घरेलू एलपीजी की कीमत 942 रुपए पर अपरिवर्तित रखी गई है। पश्चिम एशिया संकट से जुड़ी आपूर्ति बाधाओं और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में तेजी के बीच मार्च से जून के बीच घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 89 रुपए प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी हुई थी।

इसके अलावा, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में भी 16 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। इसके बाद घरेलू एयरलाइंस के लिए एटीएफ की कीमत 121 रुपए से बढ़कर 137 रुपए प्रति लीटर हो गई है।

हालांकि, सितंबर में 6.28 रुपए प्रति लीटर यानी 5.46 प्रतिशत और अगस्त में 5 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि के बाद हुई है। एटीएफ किसी एयरलाइन की परिचालन लागत का 40 प्रतिशत तक हिस्सा होता है, जिससे ईंधन की कीमतें एयरलाइंस के खर्च का एक महत्वपूर्ण घटक बन जाती हैं।

ताजा कीमत संशोधन अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क कीमतों में बदलाव और रुपये-डॉलर विनिमय दर को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं।

एटीएफ और एलपीजी की कीमतों में हर महीने की पहली तारीख को संशोधन किया जाता है। स्थानीय करों, जैसे वैट के कारण अलग-अलग राज्यों में कीमतें अलग हो सकती हैं।

इसके अलावा, पेट्रोल और डीजल की कीमतें, जिनमें मई में बढ़ोतरी की गई थी, अभी भी अपरिवर्तित हैं।

--आईएएनएस

एबीएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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शराब दुकानदारों के लिए रेड अलर्ट! MRP से एक रुपया भी ज्यादा लिया तो लगेगा 10 लाख जुर्माना

आंध्र प्रदेश में शराब की दुकानों को लेकर बड़ा बदलाव हो चुका है. दरअसल, अब राज्य सरकार की नई 'एक्साइज शॉप्स पॉलिसी 2026-27' 1 अक्टूबर से लागू हो गई है. इन नए नियमों के अनुसार शराब दुकानों के संचालन से लेकर निगरानी तक हर स्तर पर व्यवस्था में बड़ा फेरबदल किया गया है. बता दें नई शराब नीति 30 सितंबर 2027 तक प्रभावी रहेगी. आइए आपको बताते हैं कि इस नई नीति के तहत क्या-क्या बदलाव किए गए हैं. 

राज्य में कुल कितनी शराब दुकानें संचालित होंगी?

सरकार ने साफ कर दिया है कि इस बार दुकानों की कुल संख्या में कोई बढ़ोतरी नहीं की जा रही. राज्यभर में पहले की तरह कुल 3736 शराब दुकानें ही संचालित होंगी. इनमें से 3396 दुकानें सामान्य यानी ओपन कैटेगरी की होंगी जबकि 340 दुकानें विशेष तौर पर गीता कुल यानी ताड़ी उतारने वाले पारंपरिक समुदाय के लिए आरक्षित रखी गई हैं.

पुरानी दुकानों के मालिकों का क्या होगा?

इस बार नीति में सबसे बड़ा बदलाव 'नवीनीकरण आधारित मॉडल' अपनाने का है. यानी जिन लोगों के पास पहले से लाइसेंस है उन्हें सीधे नीलामी से नहीं गुजरना पड़ेगा बल्कि वे अपने मौजूदा लाइसेंस का एक साल के लिए नवीनीकरण करा सकते हैं. इसके लिए उन्हें अपनी लाइसेंस फीस का 38 प्रतिशत हिस्सा नवीनीकरण शुल्क यानी रिन्यूअल रिटेल एक्साइज टैक्स (RET) के तौर पर चुकाना होगा.

अगर कोई दुकान मालिक नवीनीकरण नहीं कराना चाहता तो क्या होगा?

ऐसी स्थिति में सरकार ने एक स्पष्ट विकल्प तय किया है. अगर किसी मौजूदा लाइसेंसधारी की दिलचस्पी नवीनीकरण में नहीं है तो वह दुकान लॉटरी प्रणाली के जरिए किसी नए आवेदक को आवंटित कर दी जाएगी. यानी खाली रह जाने वाली किसी भी दुकान के लिए पारदर्शी लॉटरी व्यवस्था अपनाई जाएगी.

नई दुकान का लाइसेंस फीस कितना तय किया गया है?

लाइसेंस फीस का ढांचा इलाके की आबादी के हिसाब से तय किया गया है. 50 हजार से कम आबादी वाले क्षेत्रों में ओपन कैटेगरी दुकान के लिए 60.5 लाख रुपये और आरक्षित श्रेणी के लिए 30 लाख रुपये फीस रखी गई है. वहीं, 50 हजार से 5 लाख तक की आबादी वाले इलाकों में ओपन कैटेगरी के लिए 71 लाख रुपये और आरक्षित श्रेणी के लिए 35 लाख रुपये चुकाने होंगे. जबकि 5 लाख से ज्यादा आबादी वाले बड़े शहरों में ओपन कैटेगरी दुकान के लिए सबसे ज्यादा 93.5 लाख रुपये और आरक्षित श्रेणी के लिए 46.8 लाख रुपये की फीस तय की गई है. इसके अलावा परमिट रूम के लिए 5 लाख और 7.5 लाख रुपये की फीस भी रखी गई है.

शराब दुकानों पर निगरानी को लेकर क्या नया नियम जोड़ा गया है?

इस बार हर शराब दुकान और परमिट रूम पर सीसीटीवी कैमरे लगाना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है. सबसे खास बात यह है कि इन कैमरों की फीड को सिर्फ रिकॉर्ड करके नहीं छोड़ा जाएगा बल्कि AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए इसका विश्लेषण किया जाएगा ताकि नियमों के उल्लंघन को तुरंत पकड़ा जा सके.

'ट्रैक एंड ट्रेस' सिस्टम का मतलब क्या है?

सरकार ने इस बार एक एंड-टू-एंड डिजिटल ट्रैक एंड ट्रेस व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है. इसका मतलब है कि शराब के उत्पादन से लेकर परिवहन, वितरण, दुकान तक पहुंचने और आखिर में ग्राहक को बेचे जाने तक, हर चरण को डिजिटल तरीके से ट्रैक किया जाएगा. इससे अवैध शराब बिक्री और कालाबाजारी पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी.

MRP से ज्यादा दाम वसूलने पर अब क्या सजा मिलेगी?

यह बदलाव दुकानदारों के लिए सबसे सख्त माना जा रहा है. अगर कोई दुकान तय मूल्य यानी MRP से ज्यादा कीमत वसूलते पकड़ी जाती है तो पहली बार में ही उस पर 10 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया जाएगा. वहीं, अगर वही दुकानदार दोबारा इसी गलती का दोषी पाया जाता है तो उसका लाइसेंस पूरी तरह रद्द कर दिया जाएगा।

शराब दुकानों के संचालन के समय को लेकर क्या नियम हैं?

नई नीति के तहत सभी शराब दुकानों को सप्ताह के सातों दिन और चौबीसों घंटे संचालित करने का प्रावधान रखा गया है ताकि आपूर्ति और राजस्व, दोनों में निरंतरता बनी रहे. सरकार ने मौजूदा दुकानों पर लागू रिटेल एक्साइज टैक्स की दरों को यथावत रखने का फैसला किया है. यानी टैक्स के ढांचे में फिलहाल कोई बड़ा फेरबदल नहीं किया गया है बल्कि पूरा ध्यान निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने पर केंद्रित है.

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सरकार इस नई नीति के जरिए आखिर हासिल क्या करना चाहती है?

राज्य की गठबंधन सरकार का मकसद साफ है शराब कारोबार में हो रही गड़बड़ियों और अवैध बिक्री पर नकेल कसी जा सके. इस नई नीति से सरकार प्रदेश के राजस्व को सुरक्षित रखना चाहती है. इसके अलावा बता दें कि डिजिटल निगरानी, सीसीटीवी-AI कॉम्बिनेशन और सख्त जुर्माने के प्रावधान के जरिए सरकार इस पूरे सिस्टम को पहले से कहीं ज्यादा पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की कोशिश में जुटी है.

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