बंगाल- कांग्रेस कैंडिडेट को मिली जमानत पर सरकार कोर्ट पहुंची:सुप्रीम कोर्ट बोला- आपकी याचिका खारिज होगी, लेकिन हम ऐसा सोमवार को करेंगे
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट के उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को मिली अंतरिम जमानत के खिलाफ बंगाल की भाजपा सरकार बुधवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंची। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट से कहा कि मिलन प्रधान हत्या के केस में गिरफ्तार किए गए हैं। उन्हें चुनाव लड़ने के नाम पर हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी। इसलिए इस मामले पर जल्द सुनवाई होनी चाहिए। इस पर टिप्पणी करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा- कल कई मामले सुनवाई के लिए पहले से लगे हैं। हम आपको आश्वस्त कर सकते हैं कि आपकी याचिका खारिज होगी, लेकिन हम यह कल नहीं सोमवार यानी 5 अक्टूबर को ऐसा करेंगे। हाईकोर्ट ने शर्तों के साथ 20 अक्टूबर तक की अंतरिम जमानत दी है प्रधान को 2007 में दर्ज छह आपराधिक मामलों में अंतरिम जमानत मिली है। इनमें हत्या, हत्या की कोशिश और आर्म्स एक्ट के उल्लंघन के आरोप शामिल हैं। कलकत्ता हाईकोर्ट ने 29 सितंबर को उन्हें 20 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत दी थी। इससे वे 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम उपचुनाव के लिए प्रचार कर सकेंगे। हाईकोर्ट ने मिलन प्रधान को 21 अक्टूबर को ट्रायल कोर्ट के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया है। छहों आपराधिक मामलों में उन्हें 20-20 हजार रुपए का जमानती बॉन्ड जमा करना होगा। कोर्ट ने प्रधान को अपना मोबाइल नंबर जांच अधिकारी को देने का भी निर्देश दिया है। जांच अधिकारी उम्मीदवार को दिन में दो बार फोन कर सकेंगे। अधिकारी के सीट छोड़ने के बाद उपचुनाव नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में जीती थी। उन्होंने कोलकाता की भवानीपुर सीट से भी जीत दर्ज की। इसके बाद सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट छोड़ दी। चुनाव आयोग ने इसी सीट पर उपचुनाव की घोषणा की। बंगाल की राजनीति में खास जगह रही है नंदीग्राम की नंदीग्राम का पश्चिम बंगाल की राजनीति में खास स्थान रहा है। 2007 में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन में सुवेंदु अधिकारी ने मदद की थी। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने 2011 में 34 साल पुरानी वाम मोर्चा सरकार को हटाकर सत्ता हासिल की। नंदीग्राम आंदोलन इस राजनीतिक बदलाव से जुड़े प्रमुख घटनाक्रमों में गिना जाता है। शुभेंदु अधिकारी ने 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर ही ममता बनर्जी को 1,956 वोटों से हराया था। ---------------------- ये खबर भी पढ़ें… 4 राज्यों में उपचुनाव का ऐलान, 6 अक्टूबर को वोटिंग:9 अक्टूबर को नतीजे; बंगाल की 2 विधानसभा और असम की एक लोकसभा सीट शामिल चुनाव आयोग ने तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल की विधानसभा सीटों और असम की एक लोकसभा सीट पर उपचुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। इन सीटों पर 6 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे और 9 अक्टूबर को नतीजे आएंगे। पूरी खबर पढ़ें…
क्रिमिनल केस में जज अपनी नैतिक सोच न थोपें:सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का जमानत आदेश रद्द किया
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जमानत और क्रिमिनल ट्रायल के मामलों में अदालतें अपनी निजी नैतिक सोच या मूल्य-निर्णय न थोपें। जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एएस चंद्रकुर की बेंच ने 23 सितंबर के आदेश में यह टिप्पणी की। बेंच ने यौन शोषण मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का जमानत खारिज करने वाला आदेश रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि इससे सामाजिक व्यवस्था और पीड़िता के परिवार की ‘नैतिकता’ पर असर पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को एक साल से ज्यादा समय से जेल में होने और ट्रायल में समय लगने के आधार पर जमानत दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “जमानत या आरोपी के क्रिमिनल ट्रायल से जुड़े मामले पर फैसला करते समय अदालतों को पीठासीन जज की निजी सोच या नैतिकता से जुड़े मूल्य-निर्णय थोपने से बचना चाहिए।” बेंच ने कहा कि 20 मार्च के हाईकोर्ट के आदेश को पढ़ने से पता चलता है कि जमानत देने से इनकार सामाजिक व्यवस्था और पीड़िता के परिवार की ‘नैतिकता’ पर असर पड़ने की आशंका के आधार पर किया गया था। आरोपी पर लगे आरोप आरोपी के खिलाफ मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में FIR दर्ज की गई थी। इसमें BNS की विभिन्न धाराओं के साथ प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज एक्ट, 2012 (POCSO Act) और शेड्यूल्ड कास्ट्स एंड शेड्यूल्ड ट्राइब्स (प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटीज) एक्ट, 1989 की धाराएं लगाई गई थीं। आरोपी पीड़िता के पड़ोस में किराएदार के रूप में रहता था। आरोप है कि शादीशुदा होने के बावजूद उसने पीड़िता की बड़ी बहन को अगवा करने की कोशिश की। इसके बाद मामला दर्ज हुआ। बाद में पीड़िता ने अपनी मां को बताया कि आरोपी ने करीब एक महीने तक उसका यौन शोषण किया। इसके बाद मौजूदा मामले में FIR दर्ज की गई। बचाव पक्ष की दलील आरोपी के वकील ने कहा कि यह मामला आरोपी के पीड़िता की बड़ी बहन के साथ संबंधों का नतीजा है। वकील के मुताबिक, बड़ी बेटी के साथ संबंधों को लेकर आरोपी को परेशान करने के लिए यह मामला दर्ज कराया गया। एक साल से ज्यादा समय से जेल में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि आरोपी एक साल से ज्यादा समय से हिरासत में है। ट्रायल पूरा होने में अभी कुछ और समय लग सकता है। बेंच ने कहा, “इन परिस्थितियों में हम मानते हैं कि आरोपी को जमानत देने का आधार बनता है।” इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। बेंच ने निर्देश दिया कि आरोपी को अधिकतम सात दिनों के भीतर संबंधित क्षेत्राधिकार वाली स्पेशल कोर्ट में पेश किया जाए। इसके बाद तय शर्तों और जमानत की शर्तों के अनुसार उसे रिहा किया जाए।
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