भारत में निवेशकों की भागीदारी बढ़ने से पीएमएस इंडस्ट्री की ग्रोथ 20 प्रतिशत रहने की उम्मीद: सेबी चेयरमैन
नई दिल्ली, 30 सितंबर (आईएएनएस)। भारत में शेयर बाजार में निवेशकों की भागीदारी बढ़ने से पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (पीएमएस) इंडस्ट्री के 20 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ने का अनुमान है। यह जानकारी भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे की ओर से बुधवार को दी गई।
एसोसिएशन ऑफ पोर्टफोलियो मैनेजर्स इन इंडिया (एपीएमआई) की तीसरी सालाना इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, पांडे ने कहा कि भारत के निवेश क्षेत्र के कई हिस्से 15 प्रतिशत से ज्यादा की दर से बढ़ रहे हैं, जिससे पीएमएस के 20 प्रतिशत की दर से बढ़ने की गुंजाइश बन रही है।
हालांकि, सेबी चेयरमैन ने इस आंकड़े को औपचारिक ग्रोथ अनुमान के तौर पर पेश नहीं किया, बल्कि वेल्थ क्रिएशन और निवेशकों की भागीदारी बढ़ने के साथ निवेश उत्पादों की संभावनाओं के बारे में बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि पीएमएस इंडस्ट्री को भी तेजी से बदलते और विविध निवेश माहौल में अपनी जगह बनानी होगी, जहां म्यूचुअल फंड और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (एआईएफ) जैसे प्रोडक्ट्स अलग-अलग तरह के निवेशकों की जरूरतें पूरी करते हैं।
पांडे ने कहा, हमें इस बात को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए कि हमारे पास दूसरे विकल्प भी हैं। हमारे पास म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री और एआईएफ हैं। ये ऐसे माध्यम हैं जो अलग-अलग तरह के ग्राहकों की जरूरतें पूरी करते हैं। जरूरी नहीं कि वे एक-दूसरे के साथ मुकाबला ही करें।
उन्होंने कहा कि पीएमएस खास तौर पर ज्यादा नेट-वर्थ वाले लोगों की जरूरतों को पूरा करता है, जबकि पैसिव इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट उन निवेशकों को आकर्षित कर सकते हैं जो लागत पर ज्यादा ध्यान देते हैं।
पीएमएस निवेशकों को पेशेवर तरीके से प्रबंध किए जाने वाला निवेश पोर्टफोलियो देता है और यह म्यूचुअल फंड जैसे मास-मार्केट इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट से अलग है।
उन्होंने आगे कहा कि जैसे-जैसे निवेश बाजार में प्रतिस्पर्धा और विकल्प बढ़ रहे हैं, पीएमएस इंडस्ट्री को अपनी खास वैल्यू के बारे में बताना होगा और निवेशकों का भरोसा जीतना होगा।
--आईएएनएस
एबीएस
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Jharkhand News: रांची का मास्टर प्लान बदलेगा नक्शा, 274 गांव जुड़ेंगे; 1534 वर्ग किमी तक बढ़ेगा दायरा
Jharkhand News: राजधानी रांची में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और शहर के अनियोजित विस्तार को देखते हुए राज्य सरकार रांची मास्टर प्लान 2037 को अपडेट करने जा रही है. नगर विकास एवं आवास विभाग के निर्देश पर झारखंड अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड यानी जुडको ने इसका प्रस्ताव तैयार किया है. नए प्लान में शहर के आसपास के कई गांवों को शामिल किया जाएगा, ताकि रांची का विकास व्यवस्थित तरीके से किया जा सके. मौजूदा मास्टर प्लान की सीमा से 10 से 12 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 120 नए गांवों को इसमें शामिल करने का प्रस्ताव है. इसके अलावा रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण यानी आरआरडीए के अधीन आने वाले 154 गांव भी नए मास्टर प्लान का हिस्सा बनेंगे. इन गांवों के लिए अभी तक कोई मास्टर प्लान नहीं था.
652 से बढ़कर 1534 वर्ग किलोमीटर होगा क्षेत्र
मौजूदा रांची मास्टर प्लान 2037 में रांची नगर निगम के 175 वर्ग किलोमीटर और आरआरडीए के 477 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को शामिल किया गया था. यानी कुल नियोजन क्षेत्र करीब 652 वर्ग किलोमीटर था। नए मास्टर प्लान के बाद यह क्षेत्र बढ़कर करीब 1534 वर्ग किलोमीटर हो जाएगा. सरकार का उद्देश्य शहर और आसपास के इलाकों का एक साथ और योजनाबद्ध विकास करना है. इसमें सड़क, आवास, परिवहन, व्यावसायिक क्षेत्र और दूसरी शहरी सुविधाओं की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखा जाएगा.
GIS और ड्रोन से तैयार होगा नया मास्टर प्लान
रांची समेत राज्य के कुल 26 शहरी स्थानीय निकायों के मास्टर प्लान को भी अपडेट करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. इसके लिए जल्द ही एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू होगी. नया मास्टर प्लान GIS यानी भौगोलिक सूचना प्रणाली पर आधारित होगा. इसे तैयार करने में ड्रोन और UAV सर्वे तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा. मौजूदा मास्टर प्लान CAD आधारित है. अब डिजिटल मैपिंग के जरिए जमीन और शहर की स्थिति का ज्यादा विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा.
ट्रैफिक व्यवस्था में भी होगा बदलाव
रांची में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए शहरी कॉरिडोर और प्रमुख सड़कों की मैपिंग की जाएगी. इसके लिए नई दिल्ली की अर्बन मास ट्रांजिट कंपनी लिमिटेड को सलाहकार बनाया गया है. योजना में नामकुम BRT-लाइट, हरमू-कांके मुख्य मार्ग और स्वर्णरेखा नदी तट जैसे प्रस्तावित मार्ग शामिल हैं. शहर में परिवहन व्यवस्था, रिंग रोड और हरित गलियारों की GIS मैपिंग भी होगी. साथ ही ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट, जोनिंग और FAR/FSI को लेकर भी योजना तैयार की जाएगी.
भवन निर्माण नियमों में भी बदलाव
शहर में जमीन के बेहतर इस्तेमाल के लिए भवन निर्माण से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है. झारखंड भवन उपविधि 2016 में 11वां संशोधन किया गया है. इसके तहत आवासीय भवनों का अधिकतम FAR 2.5 से बढ़ाकर 4.5 और व्यावसायिक भवनों का FAR 3 से बढ़ाकर 5 किया गया है. यह सड़क की चौड़ाई के आधार पर लागू होगा. वहीं व्यावसायिक और औद्योगिक भवनों में ग्राउंड कवरेज की सीमा 50 से बढ़ाकर 65 प्रतिशत कर दी गई है. इन बदलावों का उद्देश्य उपलब्ध जमीन का बेहतर इस्तेमाल करना और रांची के भविष्य के विकास के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराना है.
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