SIR पूरा होने वाले राज्यों में अब Declaration Form की जरूरत नहीं, ECI का बड़ा बयान
ECI के एक अधिकारी ने बुधवार को कहा कि जिन सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) पूरा हो चुका है और जहाँ यह अभी शुरू होना बाकी है, वहाँ 'डिक्लेरेशन फ़ॉर्म' की कोई ज़रूरत नहीं होगी। चुनाव आयोग के अधिकारी के अनुसार, SIR के दौरान या SIR-रहित अवधि में, 'फ़ॉर्म 6' में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अधिकारी ने बताया, डिक्लेरेशन फ़ॉर्म एक अतिरिक्त दस्तावेज़ था जिसे उन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में माँगा गया था जहाँ 24 जून 2025 के SIR आदेश और उसके बाद के SIR आदेशों के अनुसार SIR चलाया गया था। ये सभी कदम आयोग के सर्वसम्मत फ़ैसले के तहत उठाए गए थे। उन्होंने कहा कि 26 सितंबर 2026 को जारी आयोग के प्रेस नोट के अनुसार, जिन सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका है और जहाँ यह अभी शुरू होना बाकी है, वहाँ डिक्लेरेशन फ़ॉर्म की कोई ज़रूरत नहीं होगी। डिक्लेरेशन फ़ॉर्म में नए आवेदकों से ऐसी जानकारी मांगी जाती है जो उन्हें या उनके माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी को पहले हुए सघन संशोधन (intensive revision) के दौरान तैयार की गई वोटर लिस्ट से जोड़ती हो।
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ECI ने 26 सितंबर के अपने प्रेस नोट में कहा था कि SIR के लिए फ़ॉर्म 6 के साथ लगे डिक्लेरेशन को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है। बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में SIR का काम पहले ही पूरा हो चुका है। CEC ज्ञानेंद्र कुमार को विपक्षी पार्टियों की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। यह आलोचना 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के बाद हो रही है, जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान SIR प्रक्रिया और चुनाव से जुड़े अन्य मामलों के फ़ैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। हालांकि, बैठक के बाद जारी प्रेस नोट में ECI ने बताया कि 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) का शेड्यूल 27 अक्टूबर, 2025 को जारी किया गया था, जबकि 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए शेड्यूल 14 मई, 2026 को आयोग की सर्वसम्मति से मंज़ूरी के बाद जारी किया गया था।
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आज देश की राजधानी में INDIA गठबंधन की बैठक शुरू हुई। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) प्रक्रिया को वापस लेने, वोटर लिस्ट में ज़्यादा पारदर्शिता लाने और चुनाव आयोग की जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि वोट जनता का होता है। INDIA गठबंधन को संबोधित करते हुए खड़गे ने कहा कि भारत का लोकतांत्रिक सिस्टम एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य के सिद्धांत पर बना है और आरोप लगाया कि इस सिद्धांत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। खड़गे ने कहा आज उस सिद्धांत पर गंभीर खतरा है। देश भर में नागरिक और राजनीतिक पार्टियां चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर गंभीर चिंताएं जता रही हैं।
आरोप तय करने पर राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई, लालू परिवार की बढ़ सकती है मुसीबतें
राउज़ एवेन्यू कोर्ट, पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती, तेजस्वी यादव, हेमा यादव, तेज प्रताप यादव और कई अन्य लोगों से जुड़े कथित 'नौकरी के बदले ज़मीन' वाले मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय करने पर नए सिरे से दलीलें सुनेगी। अब इस मामले की सुनवाई स्पेशल जज प्रशांत कुमार करेंगे और आरोप तय करने पर दलीलें 14 और 15 अक्टूबर को सुनी जाएंगी। यह नई सुनवाई इसलिए ज़रूरी हो गई क्योंकि इस मामले में आदेश सुरक्षित रखने वाले पूर्व स्पेशल जज विशाल गोगने का तबादला दिल्ली हाई कोर्ट में हो गया था। दिल्ली हाई कोर्ट की मौजूदा रजिस्ट्रार सूची के अनुसार, डॉ विशाल गोगने 22 सितंबर, 2026 से रजिस्ट्रार के तौर पर कार्यरत हैं।
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राउज़ एवेन्यू कोर्ट में चल रहा मनी लॉन्ड्रिंग का मामला CBI के 'ज़मीन के बदले नौकरी' वाले केस से जुड़ा है। यह मामला उन आरोपों से संबंधित है जिनमें कहा गया है कि 2004-2009 के दौरान, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे, रेलवे में ग्रुप-D पदों पर नौकरी देने के बदले ज़मीन के टुकड़े लालू प्रसाद यादव के परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़ी संस्थाओं के नाम ट्रांसफर किए गए थे। आरोपी इन आरोपों का खंडन कर रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुरू में अपनी प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट में व्यवसायी अमित कात्याल, राबड़ी देवी, मीसा भारती, हेमा यादव और अन्य को आरोपी बनाया था। बाद में एजेंसी ने सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट में लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और अन्य के नाम शामिल किए। ED ने जनवरी 2024 में अमित कात्याल, राबड़ी देवी, मीसा भारती, हेमा यादव और अन्य के खिलाफ इस मामले में अपनी पहली प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की थी। एजेंसी ने कात्याल को लालू प्रसाद यादव का सहयोगी बताया था। बाद में, 6 अगस्त 2024 को ED ने लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और अन्य के नाम शामिल करते हुए एक सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की। कोर्ट ने 18 सितंबर 2024 को इस सप्लीमेंट्री कंप्लेंट का संज्ञान लिया और आरोपियों को नोटिस जारी किए।
ED की सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट में तेज प्रताप यादव का नाम आरोपी के तौर पर शामिल नहीं था, लेकिन कोर्ट को उन्हें और दूसरे आरोपियों को समन भेजने के लिए पर्याप्त सबूत मिले थे।
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14 मार्च 2026 को ED ने तत्कालीन स्पेशल जज विशाल गोगने के सामने आरोप तय करने पर अपनी दलीलें पूरी की थीं। एजेंसी ने तर्क दिया कि लालू प्रसाद यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सबूत थे और आरोप लगाया कि अपराध से मिली रकम का इस्तेमाल उन्होंने किया था। ED ने आरोप लगाया है कि A K इन्फोसिस्टम्स को 2006-07 में अमित कात्याल के प्रमोटर के तौर पर शामिल करके बनाया गया था और कंपनी ने कोई खास बिजनेस एक्टिविटी करने के बजाय कई ज़मीन के टुकड़े खरीदे थे। एजेंसी के मुताबिक, एक प्रॉपर्टी कथित ज़मीन-के-बदले-नौकरी घोटाले से जुड़ी थी और बाद में 2014 में कंपनी को 1 लाख रुपये में राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को ट्रांसफर कर दिया गया था। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि 1996 में बनी कंपनी A B एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का इस्तेमाल न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में एक प्रॉपर्टी खरीदने के लिए किया गया था। ED के मुताबिक, 2007 में पांच कंपनियों के ज़रिए 5 करोड़ रुपये का फंड भेजा गया और बाद में प्रॉपर्टी खरीदी गई। ED ने अपनी जांच के सिलसिले में मार्च 2024 में दिल्ली-NCR, पटना, मुंबई और रांची में 24 जगहों पर तलाशी ली थी। एजेंसी के मुताबिक, तलाशी के दौरान बिना हिसाब-किताब वाला कैश, विदेशी मुद्रा, सोने की ईंटें, सोने के गहने और प्रॉपर्टी व सेल डीड से जुड़े दस्तावेज़ बरामद हुए थे। एजेंसी ने जांच के दायरे में आए अपराध से मिली रकम का अनुमान लगभग 600 करोड़ रुपये लगाया था, जिसमें अचल संपत्तियां और कथित तौर पर बेनामीदारों के ज़रिए किए गए ट्रांज़ैक्शन शामिल थे।
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