आरोप तय करने पर राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई, लालू परिवार की बढ़ सकती है मुसीबतें
राउज़ एवेन्यू कोर्ट, पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती, तेजस्वी यादव, हेमा यादव, तेज प्रताप यादव और कई अन्य लोगों से जुड़े कथित 'नौकरी के बदले ज़मीन' वाले मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय करने पर नए सिरे से दलीलें सुनेगी। अब इस मामले की सुनवाई स्पेशल जज प्रशांत कुमार करेंगे और आरोप तय करने पर दलीलें 14 और 15 अक्टूबर को सुनी जाएंगी। यह नई सुनवाई इसलिए ज़रूरी हो गई क्योंकि इस मामले में आदेश सुरक्षित रखने वाले पूर्व स्पेशल जज विशाल गोगने का तबादला दिल्ली हाई कोर्ट में हो गया था। दिल्ली हाई कोर्ट की मौजूदा रजिस्ट्रार सूची के अनुसार, डॉ विशाल गोगने 22 सितंबर, 2026 से रजिस्ट्रार के तौर पर कार्यरत हैं।
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राउज़ एवेन्यू कोर्ट में चल रहा मनी लॉन्ड्रिंग का मामला CBI के 'ज़मीन के बदले नौकरी' वाले केस से जुड़ा है। यह मामला उन आरोपों से संबंधित है जिनमें कहा गया है कि 2004-2009 के दौरान, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे, रेलवे में ग्रुप-D पदों पर नौकरी देने के बदले ज़मीन के टुकड़े लालू प्रसाद यादव के परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़ी संस्थाओं के नाम ट्रांसफर किए गए थे। आरोपी इन आरोपों का खंडन कर रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुरू में अपनी प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट में व्यवसायी अमित कात्याल, राबड़ी देवी, मीसा भारती, हेमा यादव और अन्य को आरोपी बनाया था। बाद में एजेंसी ने सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट में लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और अन्य के नाम शामिल किए। ED ने जनवरी 2024 में अमित कात्याल, राबड़ी देवी, मीसा भारती, हेमा यादव और अन्य के खिलाफ इस मामले में अपनी पहली प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की थी। एजेंसी ने कात्याल को लालू प्रसाद यादव का सहयोगी बताया था। बाद में, 6 अगस्त 2024 को ED ने लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और अन्य के नाम शामिल करते हुए एक सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की। कोर्ट ने 18 सितंबर 2024 को इस सप्लीमेंट्री कंप्लेंट का संज्ञान लिया और आरोपियों को नोटिस जारी किए।
ED की सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट में तेज प्रताप यादव का नाम आरोपी के तौर पर शामिल नहीं था, लेकिन कोर्ट को उन्हें और दूसरे आरोपियों को समन भेजने के लिए पर्याप्त सबूत मिले थे।
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14 मार्च 2026 को ED ने तत्कालीन स्पेशल जज विशाल गोगने के सामने आरोप तय करने पर अपनी दलीलें पूरी की थीं। एजेंसी ने तर्क दिया कि लालू प्रसाद यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सबूत थे और आरोप लगाया कि अपराध से मिली रकम का इस्तेमाल उन्होंने किया था। ED ने आरोप लगाया है कि A K इन्फोसिस्टम्स को 2006-07 में अमित कात्याल के प्रमोटर के तौर पर शामिल करके बनाया गया था और कंपनी ने कोई खास बिजनेस एक्टिविटी करने के बजाय कई ज़मीन के टुकड़े खरीदे थे। एजेंसी के मुताबिक, एक प्रॉपर्टी कथित ज़मीन-के-बदले-नौकरी घोटाले से जुड़ी थी और बाद में 2014 में कंपनी को 1 लाख रुपये में राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को ट्रांसफर कर दिया गया था। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि 1996 में बनी कंपनी A B एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का इस्तेमाल न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में एक प्रॉपर्टी खरीदने के लिए किया गया था। ED के मुताबिक, 2007 में पांच कंपनियों के ज़रिए 5 करोड़ रुपये का फंड भेजा गया और बाद में प्रॉपर्टी खरीदी गई। ED ने अपनी जांच के सिलसिले में मार्च 2024 में दिल्ली-NCR, पटना, मुंबई और रांची में 24 जगहों पर तलाशी ली थी। एजेंसी के मुताबिक, तलाशी के दौरान बिना हिसाब-किताब वाला कैश, विदेशी मुद्रा, सोने की ईंटें, सोने के गहने और प्रॉपर्टी व सेल डीड से जुड़े दस्तावेज़ बरामद हुए थे। एजेंसी ने जांच के दायरे में आए अपराध से मिली रकम का अनुमान लगभग 600 करोड़ रुपये लगाया था, जिसमें अचल संपत्तियां और कथित तौर पर बेनामीदारों के ज़रिए किए गए ट्रांज़ैक्शन शामिल थे।
बदल गया है Jammu-Kashmir, अब आतंकी कुछ समय भाग तो सकते हैं मगर सुरक्षाबलों की गोली से बच नहीं सकते, मूसा के मारे जाने से देश में खुशी की लहर
बदले हुए जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी अब कुछ समय के लिए भाग तो सकते हैं लेकिन बच नहीं सकते। पाकिस्तान की विशेष सेवा समूह में पैरा कमांडो रह चुके आतंकवादी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा के साथ भी ऐसा ही हुआ। पहलगाम में 26 निर्दोष लोगों की निर्मम हत्या के खूनी खेल में शामिल मूसा लंबे समय तक सुरक्षा बलों से बचता रहा, लेकिन आखिरकार बडगाम में उसका हिसाब कर दिया गया और वह सुरक्षा बलों की गोली का शिकार होकर ढेर हो गया। मूसा का खात्मा पहलगाम के पीड़ित परिवारों के लिए बड़ी राहत है और यह देशवासियों के उस भरोसे को और मजबूत करता है कि भारत की धरती पर किसी भी नागरिक का खून बहाने वाले आतंकियों को न तो भुलाया जाएगा और न ही बख्शा जाएगा, वे जहां भी छिपेंगे, सुरक्षा बल उन्हें खोज निकालेंगे और उनके आतंक का अंत तय है।
हम आपको बता दें कि पहलगाम आतंकी हमले के प्रमुख संदिग्धों में शामिल पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा को बडगाम के यूसमर्ग इलाके में मार गिराया गया है। सुरक्षा बलों ने उसके शव के साथ युद्ध जैसे सामान भी बरामद किए हैं। यह कार्रवाई ऑपरेशन कोराग के तहत की गई। विशेष खुफिया सूचना के आधार पर भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की संयुक्त टीम ने इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया था। तलाशी के दौरान जवानों को संदिग्ध गतिविधि दिखाई दी। सुरक्षा बलों ने जब आतंकियों को चुनौती दी तो उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद मुठभेड़ भड़क उठी और जवाबी कार्रवाई में हाशिम मूसा को मार गिराया गया। अभियान के बाद भी आसपास के इलाके में तलाशी जारी रखी गई, ताकि किसी अन्य आतंकी या हथियारों के ठिकाने की मौजूदगी का पता लगाया जा सके।
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श्रीनगर स्थित चिनार कोर ने बताया कि पालमैदान के सामान्य इलाके में बुधवार सुबह तलाशी के दौरान पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा का शव बरामद किया गया। उसके पास से युद्ध संबंधी सामग्री भी मिली। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार मूसा लंबे समय से जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों में वांछित था और पीर पंजाल के दोनों ओर हुए हमलों से उसका संबंध बताया गया था।
हम आपको बता दें कि 2025 के पहलगाम हमले में 26 लोगों की हत्या के बाद हाशिम मूसा सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था। उसकी गिरफ्तारी के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 20 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की थी। इस मामले में पाकिस्तान के नागरिक आदिल हुसैन ठोकर और अली भाई के नाम भी सामने आए थे। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, हाशिम मूसा पाकिस्तान की विशेष सेवा समूह में पैरा-कमांडो रह चुका था।
इस पूरे मामले में एनआईए की जांच ने भी पाकिस्तान स्थित आतंकवादी ढांचे की भूमिका को रेखांकित किया था। दिसंबर 2025 में दाखिल 1,597 पन्नों के आरोपपत्र में पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा और उसके नाम से जुड़े द रेजिस्टेंस फ्रंट को हमले की साजिश, तैयारी और क्रियान्वयन से जोड़ा गया था। पाकिस्तानी आतंकवादी संचालक साजिद जट्ट को भी आरोपी बनाया गया था। देखा जाये तो हाशिम मूसा का खात्मा आतंकवाद के नेटवर्क के लिए एक और कठोर संदेश है। जो लोग कश्मीर की जमीन पर बंदूक लेकर निर्दोषों को निशाना बनाने आएंगे, उनके लिए छिपने की जगह लगातार छोटी होती जा रही है। पहाड़, जंगल और सीमा पार का प्रशिक्षण, इनमें से कुछ भी सुरक्षा बलों की कार्रवाई से बचने की गारंटी नहीं है। आतंक के आकाओं को यह समझ लेना चाहिए कि हिंसा का रास्ता चुनने वालों तक सुरक्षा एजेंसियां पहुंचेंगी और उनके नेटवर्क को कानून के दायरे में जवाब दिया जाएगा।
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