शंकराचार्य विवाद के बीच, अयोध्या में जीएसटी के उप आयुक्त प्रशांत कुमार सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार के समर्थन में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बयानों के विरोध में यह कदम उठाया है। अपने इस फैसले के बारे में बताते हुए सिंह ने कहा कि सरकारी अधिकारी रोबोट नहीं होते और जिस सरकार से उन्हें वेतन मिलता है, उस पर हमले होने पर वे चुप नहीं रह सकते। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद मुख्यमंत्री पर निराधार आरोप लगा रहे हैं और ऐसी स्थिति में चुप रहना उन्हें मंजूर नहीं है।
अयोध्या के जीएसटी आयुक्त प्रशांत कुमार सिंह ने कहा कि सरकार के समर्थन में और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का विरोध करते हुए मैंने इस्तीफा दे दिया है। पिछले दो दिनों से मैं हमारे मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के खिलाफ उनके निराधार आरोपों से बहुत आहत था... जिस सरकार से मुझे वेतन मिलता है, उसके प्रति मेरी कुछ नैतिक जिम्मेदारियां हैं... जब मैंने देखा कि मेरे मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री का अपमान किया जा रहा है, तो मैंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा पत्र भेज दिया।
वहीं, बरेली के नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सरकारी नीतियों विशेषकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े मामले पर नाराजगी जताते हुए सोमवार को सेवा से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने बताया कि प्रांतीय प्रशासनिक सेवा (पीसीएस) के 2019 बैच के अधिकारी अग्निहोत्री ने राज्यपाल और बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह को ईमेल के माध्यम से अपना इस्तीफा भेजा।
सूत्रों ने बताया कि अग्निहोत्री ने इस्तीफे का कारण सरकारी नीतियों, विशेषकर यूजीसी के नए नियमों से गहरी असहमति को बताया है। कानपुर नगर के निवासी अग्निहोत्री पहले उन्नाव, बलरामपुर और लखनऊ समेत कई जिलों में एसडीएम के रूप में कार्य कर चुके हैं और प्रशासनिक हलकों में अपने स्पष्ट विचारों व सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए अग्निहोत्री ने कहा कि बीते दो सप्ताह में दो बड़े निंदनीय मामले सामने आए हैं, जिन्होंने उन्हें झकझोर कर रख दिया है।
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भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते की घोषणा के अवसर पर एक खुशनुमा पल आया जब यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा ने अचानक अपना ओसीआई कार्ड निकाला और भारत से अपने व्यक्तिगत जुड़ाव के बारे में बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ उपस्थित थे, कोस्टा की गोवा से जुड़ी जड़ों के बारे में सुनकर मुस्कुरा उठे, जिसे उन्होंने यूरोप और भारत के बीच बढ़ती साझेदारी से जोड़ा। एंटोनियो कोस्टा के पिता का जन्म और पालन-पोषण गोवा में हुआ था, जो पहले पुर्तगाली उपनिवेश था। गोवा की मुक्ति के बाद, 18 वर्ष की आयु में वे पुर्तगाल चले गए। कोस्टा, जिन्हें बचपन में कोंकणी भाषा के लोकप्रिय उपनाम 'बाबुश' से पुकारा जाता था, ने मंगलवार को संयुक्त ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए इस बात का जिक्र किया।
भावुक कोस्टा ने अपनी जेब से ओसीआई कार्ड निकालते हुए कहा मैं यूरोपीय परिषद का अध्यक्ष हूं, लेकिन मैं एक प्रवासी भारतीय नागरिक भी हूं। फिर उन्होंने गोवा में अपनी जड़ों का जिक्र किया, जिसके बारे में कमरे में मौजूद लोगों को शायद ही कोई जानकारी होगी। जैसा कि आप कल्पना कर सकते हैं, मेरे लिए इसका एक विशेष महत्व है। मुझे गोवा में अपनी जड़ों पर बहुत गर्व है, जहां से मेरे पिता का परिवार आया था, और यूरोप और भारत के बीच का संबंध मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से बहुत मायने रखता है," पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, जिन्होंने 2015 से 2024 तक सेवा की। कोस्टा ने कहा कि आज हम अपनी साझेदारी को अगले स्तर पर ले जा रहे हैं. दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र होने के नाते हम मिलकर अपने नागरिकों को ठोस लाभ देने और शांति, स्थिरता, आर्थिक विकास और सतत विकास को मजबूत करने वाली वैश्विक व्यवस्था बनाने के लिए काम कर रहे हैं। एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा ने कहा कि मैं एक ओवरसीज भारतीय नागरिक भी हूं। जैसा कि आप समझ सकते हैं, मेरे लिए इसका खास मतलब है। उन्होंने कहा कि मुझे गोवा में अपनी जड़ों पर बहुत गर्व है, जहां से मेरे पिता का परिवार आता है और यूरोप तथा भारत के बीच का संबंध मेरे लिए व्यक्तिगत है।
एंटोनियो कोस्टा का गोवा से क्या संबंध है?
कोस्टा की भारत यात्रा ने उनके बचपन की यादें ताजा कर दी होंगी। उन्होंने आखिरी बार 2017 में पुर्तगाल के प्रधानमंत्री के रूप में भारत का दौरा किया था, जब वे अपने कवि और उपन्यासकार पिता ऑरलैंडो कोस्टा के नाटक के अंग्रेजी अनुवाद का विमोचन करने आए थे। कोस्टा का जन्म 1961 में लिस्बन में हुआ था, लेकिन उन्होंने पहली बार अपने माता-पिता के साथ किशोरावस्था में गोवा की यात्रा की थी। कोस्टा के दादा का जन्म मारगाओ में हुआ था और उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय वहीं बिताया। उनके पिता, ऑरलैंडो, एक प्रख्यात लेखक थे जिनकी रचनाओं में गोवा का गहरा प्रभाव दिखता है, साथ ही रवींद्रनाथ टैगोर पर भी उनकी रचनाएँ शामिल हैं। कोस्टा ने 2017 की अपनी यात्रा के दौरान कहा था, "मेरे पिता लिस्बन गए थे, लेकिन उन्होंने गोवा कभी नहीं छोड़ा। गोवा हमेशा उनकी रचनाओं में मौजूद रहा।
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