भारत-ईयू एफटीए से लेदर और टेक्सटाइल इंडस्ट्री को मिला बड़ा बूस्ट, अब जीरो ड्यूटी पर होगा निर्यात
नई दिल्ली, 27 जनवरी (आईएएनएस)। भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मंगलवार को हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) देश के अधिक श्रम उपयोग वाले सेक्टर्स जैसे लेदर एंड फुटवियर, जेम्स एवं ज्वैलरी और टेक्सटाइल इंडस्ट्री से बड़ी सौगात लेकर आया है।
अब यह सेक्टर जीरो ड्यूटी पर यूरोप के 27 देशों में आसानी से निर्यात कर पाएंगे।
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की गई पोस्ट में कहा गया कि भारत-ईयू एफटीए से देश के अधिक श्रम उपयोग वाले सेक्टर्स को बढ़ावा मिलेगा और उनके निर्यात में तेज वृद्धि देखने को मिलेगी।
पोस्ट में बताया गया कि इस ट्रेड डील से यूरोप को भारत के टेक्सटाइल और अपैरल निर्यात पर जीरो ड्यूटी लगेगी। इससे भारतीय निर्यातकों को ईयू के 263 अरब डॉलर के टेक्सटाइल बाजार में सीधे प्रवेश मिलेगा।
इससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और भारतीय बुनकरों का सशक्तिकरण होगा।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत-ईयू एफटीए से लेदर एंड फुटवियर पर ड्यूटी जीरो हो गई है, जो कि पहले 17 प्रतिशत थी। इससे भारतीय निर्यातकों को यूरोप के 100 अरब डॉलर के बाजार में जीरो ड्यूटी पर निर्यात के मौके मिलेंगे।
इसके साथ ही, इस एफटीए से रत्न और आभूषण उद्योग को भी फायदा होगा। इससे यूरोप के 79 अरब डॉलर के प्रीमियम मार्केट में नए अवसर खुलेंगे। वहीं, भारतीय निर्यातकों को यूरोप के 2 ट्रिलियन डॉलर के इंडस्ट्रियल बाजार में प्राथमिकता के आधार पर डायरेक्ट एंट्री मिलेगी।
भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) का ऐलान करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह एफटीए केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि साझा समृद्धि का नया ब्लूप्रिंट है।
प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक, यह ऐतिहासिक समझौता हमारे किसानों और हमारे छोटे उद्योगों के लिए यूरोपीय मार्केट तक पहुंच को आसान बनाएगा, मैन्युफैक्चरिंग में नए अवसर पैदा करेगा और हमारे सर्विसेज सेक्टर के बीच सहयोग को और मजबूत करेगा।
--आईएएनएस
एबीएस/
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बांग्लादेश चुनाव: बीएनपी की मतदाताओं से अपील, 1971 के पाकिस्तानी सहयोगियों को नकारें
ढाका, 27 जनवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों के लिए चुनाव प्रचार शुरू होते ही बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने जमात-ए-इस्लामी पर परोक्ष हमला बोलते हुए मतदाताओं से अपील की है कि वे 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी सेना के साथ सहयोग करने वालों को वोट देकर “देश को बर्बाद न करें।”
बीएनपी के महासचिव मिर्ज़ा फ़खरुल इस्लाम आलमगीर ने ठाकुरगांव ज़िले के सदर उपज़िला स्थित बीडी हाई स्कूल मैदान में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। वह आगामी चुनाव में ठाकुरगांव-1 संसदीय सीट से उम्मीदवार हैं।
बांग्लादेश के प्रमुख अख़बार द डेली स्टार के मुताबिक, फ़खरुल ने कहा, “जिन लोगों ने आख़िरी समय तक पाकिस्तानी सेना की मदद की, वही आज देश पर शासन करने के लिए वोट मांग रहे हैं। उन्हें वोट देकर देश को बर्बाद मत कीजिए।”
उन्होंने आगे कहा, “हम 1971 की भावना को जीवित रखना चाहते हैं, क्योंकि हमारी पहचान वहीं से आती है। पाकिस्तान के शोषण और दमन के कारण ही बांग्लादेश का जन्म हुआ। हमने पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई लड़ी और आज़ादी हासिल की।”
रैली के दौरान हिंदू समुदाय को संबोधित करते हुए फ़खरुल ने कहा कि देशभर में हिंदुओं के बीच अक्सर उत्पीड़न का डर रहता है, लेकिन उन्हें भयभीत होने की ज़रूरत नहीं है।
इधर, फरवरी चुनाव से पहले बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) ने विपक्षी दलों पर चुनाव आचार संहिता के व्यापक उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को ढाका स्थित चुनाव आयोग मुख्यालय में मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात के बाद जमात के सहायक महासचिव एहसानुल महबूब ज़ुबैर ने पत्रकारों से कहा कि पिछले कुछ दिनों में उनके कार्यकर्ताओं पर जानबूझकर हमले किए गए हैं।
ज़ुबैर ने आरोप लगाया, “हमारी महिला कार्यकर्ताओं को परेशान किया जा रहा है, अपमानित किया जा रहा है और कुछ जगहों पर उनसे घूंघट हटाने को कहा गया। कई मामलों में उनके मोबाइल फोन भी छीने गए हैं।”
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इन घटनाओं पर काबू नहीं पाया गया, तो चुनाव से पहले हालात और बिगड़ सकते हैं।
वहीं, एनसीपी नेताओं ने भी आरोप लगाया कि कई निर्वाचन क्षेत्रों में विपक्षी दल चुनाव नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं और प्रशासन की ओर से बहुत कम हस्तक्षेप हो रहा है। एनसीपी ने दावा किया कि ढाका-18 सीट से उसके उम्मीदवार के चुनाव अभियान पर हमला हुआ, जिससे चुनावी प्रक्रिया पर “नकारात्मक संदेश” जा रहा है।
एनसीपी नेता आयमन राहा ने बीएनपी के ढाका-8 सीट के उम्मीदवार पर सरकारी वाहनों के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए कहा, “जब ऐसी चीजें खुलेआम होती हैं और कोई कार्रवाई नहीं होती, तो जनता में डर पैदा होता है। हमें लगता है कि हमें बराबरी का चुनावी माहौल नहीं मिल रहा है।”
बता दें कि 12 फरवरी के चुनाव से पहले बांग्लादेश में राजनीतिक टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। जिन दलों ने पहले अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के साथ मिलकर शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग की लोकतांत्रिक सरकार को हटाने में भूमिका निभाई थी, वही अब आगामी चुनाव जीतने के लिए आपसी सत्ता संघर्ष में उलझे हुए हैं।
--आईएएनएस
डीएससी
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