एक ही दिन और एक ही शहर में 50 लोगों को मिली इस इलेक्ट्रिक कार की डिलीवरी, 517 KM है रेंज
जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया की नई-नवेली इलेक्ट्रिक एसयूवी ने हेक्टर टोमाहॉक ने बड़ा कारनामा कर दिया है। बता दें कि गुजरात के सूरत में एक ही दिन में 50 MG Hector Tomahawk EV की डिलीवरी हुई है।
UP Election 2027: अखिलेश यादव का फॉर्मूला क्लियर, कांग्रेस से कहा - पहले प्रत्याशी का नाम बताइये फिर सीट ले जाइये
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनावों की सरगर्मी अभी से तेज हो चुकी है। विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन के तहत समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच मिलकर चुनाव लड़ने की संभावना है, लेकिन सीट बंटवारे के सटीक फार्मूले को लेकर बैठकों और मंथन का दौर जारी है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि केवल राजनीतिक सौदेबाजी या सीटों की संख्या के आधार पर समझौते के बजाय, जमीन पर मजबूत पकड़ रखने वाले 'जिताऊ चेहरों' को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
सीटों की संख्या नहीं, 'विनबिलिटी' है अखिलेश यादव का मुख्य पैमाना
सपा प्रमुख अखिलेश यादव का रुख स्पष्ट है कि गठबंधन के तहत सीटों का बंटवारा इस बात पर तय होना चाहिए कि कौन सी पार्टी या उम्मीदवार उस क्षेत्र में सीट निकालने का दम रखता है। उनका मानना है कि सिर्फ हवा हवाई दावों या राजनीतिक दबाव के आधार पर सीटें तय करने से गठबंधन को नुकसान हो सकता है, इसलिए 'जीत की क्षमता' ही सबसे बड़ा आधार होनी चाहिए।
कांग्रेस के सामने रखी गई सपा की चार प्रमुख शर्तें
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीट शेयरिंग के इस पेच को सुलझाने के लिए सपा ने कांग्रेस के सामने चार मुख्य शर्तें रखी हैं:
- संभावित उम्मीदवारों के नाम: कांग्रेस जिन सीटों पर अपनी दावेदारी जता रही है, वहां के लिए उसे अपने मजबूत संभावित उम्मीदवारों के नाम पहले ही बताने होंगे।
- विशिष्ट सीटों की सूची: मनचाही सीटों के नाम स्पष्ट किए जाएं ताकि उनका जमीनी सत्यापन किया जा सके।
- क्षेत्रीय जनाधार का आकलन: यह देखा जाए कि उस खास विधानसभा क्षेत्र में पार्टी और उसके वर्करों का वास्तव में कितना राजनीतिक आधार है।
- जीत की शत-प्रतिशत संभावना: प्रत्याशी ऐसा होना चाहिए जो स्थानीय समीकरणों को साधते हुए चुनाव जीतने में पूरी तरह सक्षम हो।
2024 के लोकसभा चुनावों से सीख और 2027 की तैयारी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2024 के आम चुनावों में उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस के गठबंधन को जो सफलता मिली थी, उसके पीछे सही सामाजिक समीकरण और मजबूत सीटों का चयन एक बड़ा कारण था। इसी रणनीति को दोहराते हुए 2027 के विधानसभा रण में भी सपा किसी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है। पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि मैदान में उतरने वाला हर एक उम्मीदवार पूरी तरह मजबूत स्थिति में हो।
सीट संख्या को लेकर दोनों दलों के बीच खींचतान
जहां एक तरफ कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में संगठन को विस्तार देने और अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए अधिक से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा रखती है, वहीं समाजवादी पार्टी अपने हिस्से के समीकरणों और चुनावी गणित को ध्यान में रखते हुए सीटों के आंकड़े और मजबूत प्रत्याशियों की सूची पर सटीक संतुलन बनाना चाहती है। इस पर आगामी बैठकों में विस्तृत रूप से फैसला लिया जाना है।
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