UP Election 2027: अखिलेश यादव का फॉर्मूला क्लियर, कांग्रेस से कहा - पहले प्रत्याशी का नाम बताइये फिर सीट ले जाइये
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनावों की सरगर्मी अभी से तेज हो चुकी है। विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन के तहत समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच मिलकर चुनाव लड़ने की संभावना है, लेकिन सीट बंटवारे के सटीक फार्मूले को लेकर बैठकों और मंथन का दौर जारी है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि केवल राजनीतिक सौदेबाजी या सीटों की संख्या के आधार पर समझौते के बजाय, जमीन पर मजबूत पकड़ रखने वाले 'जिताऊ चेहरों' को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
सीटों की संख्या नहीं, 'विनबिलिटी' है अखिलेश यादव का मुख्य पैमाना
सपा प्रमुख अखिलेश यादव का रुख स्पष्ट है कि गठबंधन के तहत सीटों का बंटवारा इस बात पर तय होना चाहिए कि कौन सी पार्टी या उम्मीदवार उस क्षेत्र में सीट निकालने का दम रखता है। उनका मानना है कि सिर्फ हवा हवाई दावों या राजनीतिक दबाव के आधार पर सीटें तय करने से गठबंधन को नुकसान हो सकता है, इसलिए 'जीत की क्षमता' ही सबसे बड़ा आधार होनी चाहिए।
कांग्रेस के सामने रखी गई सपा की चार प्रमुख शर्तें
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीट शेयरिंग के इस पेच को सुलझाने के लिए सपा ने कांग्रेस के सामने चार मुख्य शर्तें रखी हैं:
- संभावित उम्मीदवारों के नाम: कांग्रेस जिन सीटों पर अपनी दावेदारी जता रही है, वहां के लिए उसे अपने मजबूत संभावित उम्मीदवारों के नाम पहले ही बताने होंगे।
- विशिष्ट सीटों की सूची: मनचाही सीटों के नाम स्पष्ट किए जाएं ताकि उनका जमीनी सत्यापन किया जा सके।
- क्षेत्रीय जनाधार का आकलन: यह देखा जाए कि उस खास विधानसभा क्षेत्र में पार्टी और उसके वर्करों का वास्तव में कितना राजनीतिक आधार है।
- जीत की शत-प्रतिशत संभावना: प्रत्याशी ऐसा होना चाहिए जो स्थानीय समीकरणों को साधते हुए चुनाव जीतने में पूरी तरह सक्षम हो।
2024 के लोकसभा चुनावों से सीख और 2027 की तैयारी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2024 के आम चुनावों में उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस के गठबंधन को जो सफलता मिली थी, उसके पीछे सही सामाजिक समीकरण और मजबूत सीटों का चयन एक बड़ा कारण था। इसी रणनीति को दोहराते हुए 2027 के विधानसभा रण में भी सपा किसी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है। पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि मैदान में उतरने वाला हर एक उम्मीदवार पूरी तरह मजबूत स्थिति में हो।
सीट संख्या को लेकर दोनों दलों के बीच खींचतान
जहां एक तरफ कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में संगठन को विस्तार देने और अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए अधिक से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा रखती है, वहीं समाजवादी पार्टी अपने हिस्से के समीकरणों और चुनावी गणित को ध्यान में रखते हुए सीटों के आंकड़े और मजबूत प्रत्याशियों की सूची पर सटीक संतुलन बनाना चाहती है। इस पर आगामी बैठकों में विस्तृत रूप से फैसला लिया जाना है।
रबी सीजन में किसानों को बड़ी राहत: खाद का पर्याप्त भंडार, एमएसपी से नीचे दाल-तिलहन नहीं बिकने देंगे: शिवराज
नई दिल्ली। रबी सीजन 2026-27 की तैयारियों को लेकर केंद्र सरकार ने किसानों को खाद, बीज, खरीद और प्राकृतिक आपदा से राहत के मामले में भरोसा दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मौसम की चुनौती हो या बाजार की परेशानी, सरकार किसानों के साथ खड़ी है। उन्होंने बताया कि देश में 163 लाख मीट्रिक टन से अधिक खाद का भंडार उपलब्ध है। रबी सीजन में 177.72 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
रबी की तैयारी के लिए राज्यों के साथ मंथन
राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026 के दौरान केंद्र और राज्यों के कृषि मंत्रियों, अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों ने रबी सीजन की तैयारियों पर चर्चा की। चौहान ने बताया कि पिछले करीब 15 दिनों से राज्यों में जिला और राज्य स्तर पर तैयारियां की जा रही थीं। सम्मेलन में फसल, पानी, खाद, बीज, बाजार, किसान ऋण और मौसम से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा हुई। केंद्र सरकार ने राज्यों से किसानों तक जरूरी सामग्री समय पर पहुंचाने और खेतों की स्थिति की लगातार निगरानी करने को कहा है।
खाद का पर्याप्त भंडार होने का दावा
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद की कीमतें बढ़ने के बावजूद भारतीय किसानों पर इसका असर नहीं पड़ने दिया जाएगा। उनके अनुसार रबी 2026-27 के लिए राज्यों ने करीब 380 लाख मीट्रिक टन खाद की मांग रखी है और देश में 163 लाख मीट्रिक टन से अधिक खाद पहले से उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि यूरिया, डीएपी और अन्य खाद की आपूर्ति राज्यों को जरूरत के अनुसार की जा रही है। सरकार का जोर खाद की समय पर उपलब्धता के साथ इसके संतुलित इस्तेमाल पर भी है। केंद्र ने रबी अभियान में खाद वितरण की निगरानी मजबूत करने पर जोर दिया है।
177.72 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य
सरकार ने रबी सीजन 2026-27 के लिए 177.72 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसमें गेहूं, दलहन, मोटे अनाज और अन्य रबी फसलें शामिल हैं। गेहूं का उत्पादन लक्ष्य करीब 121 मिलियन टन रखा गया है। चौहान ने कहा कि जहां पानी और मिट्टी में नमी कम है, वहां किसानों को अधिक पानी वाली फसलों के बजाय दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
22 अक्टूबर से देशभर में चलेगा 'खेत बचाओ अभियान'
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि खरीफ सीजन में चलाए गए अभियान के बाद अब रबी सीजन में भी 'खेत बचाओ अभियान' चलाया जाएगा। यह अभियान 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक चलाने की योजना है। इस दौरान कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञ, कृषि विभाग के अधिकारी और अन्य टीमें गांवों और खेतों तक पहुंचेंगी। किसानों को मिट्टी की जरूरत के अनुसार खाद के इस्तेमाल, सही फसल और उन्नत बीज के चयन के बारे में जानकारी दी जाएगी। किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड बनवाने और उसका सही इस्तेमाल करने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। संतुलित खाद इस्तेमाल पर सरकार पहले से जोर दे रही है।
खाद की खपत घटाने का दावा, 1400 करोड़ रुपये की बचत
चौहान ने बताया कि खरीफ सीजन में कुछ राज्यों के दो-दो जिलों में मिट्टी की जांच के आधार पर संतुलित खाद इस्तेमाल का प्रयोग किया गया। उनके अनुसार इससे इन जिलों में खाद की खपत 27 प्रतिशत तक कम हुई और करीब 1400 करोड़ रुपये की बचत हुई। अब इसी तरीके को बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी है। सरकार का कहना है कि इससे किसानों की लागत कम करने के साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
एमएसपी से नीचे दाल-तिलहन की खरीद पर सरकार का फैसला
किसानों को बाजार भाव गिरने से बचाने के लिए केंद्र ने दाल और तिलहन की खरीद व्यवस्था को मजबूत करने की बात कही है। चौहान के अनुसार यदि बाजार में कीमत न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP से नीचे जाती है, तो NAFED और NCCF राज्यों की खरीद व्यवस्था में देरी का इंतजार किए बिना मंडियों में जाकर किसानों से खरीद कर सकेंगी। इसका उद्देश्य किसानों को कम कीमत पर अपनी उपज बेचने की मजबूरी से बचाना है।
आपदा प्रभावित किसानों के लिए केंद्रीय टीमें जाएंगी
भारी बारिश, बाढ़ और सूखे से प्रभावित राज्यों के लिए केंद्र सरकार ने भी मदद का भरोसा दिया है। चौहान ने बताया कि कर्नाटक और महाराष्ट्र सहित प्रभावित राज्यों में स्थिति का जायजा लेने के लिए 3 अक्टूबर को केंद्रीय टीमें भेजी जाएंगी। उन्होंने कहा कि नुकसान का मौके पर आकलन कराया जाएगा। राज्य आपदा मोचन निधि यानी SDRF से तत्काल राहत दी जाएगी। इसके बाद विस्तृत आकलन के आधार पर राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि यानी NDRF से अतिरिक्त सहायता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
किसान की फसल को एमएसपी से कम भाव नहीं मिलने देने की बात
चौहान ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा देना है। दाल और तिलहन की खरीद व्यवस्था में देरी होने पर केंद्रीय खरीद एजेंसियों को सीधे मंडी में उतरने की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को मजबूरी में औने-पौने दाम पर फसल बेचने की स्थिति नहीं आने दी जाएगी।
डिजिटल पहचान से किसानों को योजनाओं का लाभ
कृषि मंत्री ने एग्रीस्टैक और किसान पहचान पत्र के जरिए किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया। किसान की जमीन, फसल और अन्य जरूरी जानकारी को डिजिटल व्यवस्था से जोड़कर योजनाओं का लाभ सीधे पात्र किसानों तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है। राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में किसान पहचान, डिजिटल कृषि, दलहन-तिलहन, खाद्य तेल और बाजार व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
पराली के मुद्दे पर बोले- किसानों को दोषी ठहराना ठीक नहीं
दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण और पराली जलाने के मुद्दे पर चौहान ने कहा कि प्रदूषण के लिए केवल किसानों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि किसानों को खलनायक बनाकर कार्रवाई करने के बजाय उनसे संवाद किया जाना चाहिए और उन्हें आधुनिक कृषि मशीनें उपलब्ध कराई जानी चाहिए। चौहान के अनुसार पराली से प्रदूषण में होने वाला योगदान पहले की तुलना में कम हुआ है। उन्होंने कहा कि किसान भी पराली जलाना नहीं चाहते और समस्या का समाधान सहयोग से किया जाना चाहिए।
2015 के बाद कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी का दावा
कृषि मंत्री ने देश में कृषि उत्पादन की वृद्धि का जिक्र करते हुए कहा कि 2015 के बाद खाद्यान्न उत्पादन की औसत वार्षिक वृद्धि दर 8.4 मिलियन टन तक पहुंची है। उन्होंने इसे भारतीय कृषि में बड़ा बदलाव बताया। सरकार का कहना है कि रबी अभियान में मौसम, पानी, मिट्टी, खाद, बीज, बाजार और किसान की आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखकर राज्यों के साथ मिलकर योजना बनाई जा रही है। राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में भी केंद्र-राज्य समन्वय और वैज्ञानिक तरीके से रबी की तैयारी को प्रमुख विषय बनाया गया।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi









