ग्रीनलैंड पर अमेरिकी राष्ट्रपति की नजर टिकी हो और यूरोप अपनी सुरक्षा को लेकर बेचैन हो तभी भारत और यूरोपीय संघ एक ऐसा रक्षा समझौता कर रहा है जो आने वाले सालों में वैश्विक शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल सकता है। दरअसल फ्रांस के साथ राफेल लड़ाकू विमान निर्माण डील को हरी झंडी मिलने के बाद अब भारत और यूरोपीय संघ एक बेहद अहम सिक्योरिटी और डिफेंस पार्टनरशिप एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं। इस मुक्त व्यापार समझौते को 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा जा रहा है यानी सभी समझौतों से बढ़कर। भारत-EU मिलकर ग्लोबल GDP का करीब एक चौथाई बनाते हैं और दोनों के पास 1.9 अरब के करीब की विशाल आबादी है। यह समझौता केवल इन दोनों के लिए ही नहीं, आज की वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए पूरी दुनिया की जरूरत है।
भारत और अमेरिका के बीच अभी तक अधूरे मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में कृषि एक बड़ी बाधा रही है। राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस क्षेत्र को उस समझौते में भी शामिल नहीं किए जाने की संभावना है जिसे भारत इस सप्ताह यूरोपीय संघ के साथ अंतिम रूप देने वाला है। भारत कृषि को किसी भी ऐसे एफटीए से बाहर रखना चाहता है जो शुल्क में कमी और गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाने के माध्यम से आयात के लिए उसके बाजारों को खोलता है, इसके दो प्रमुख कारण हैं। 2024 के नवीनतम सर्वेक्षण के अनुसार, अमेरिका में मात्र 1.88 मिलियन खेत हैं, जबकि 2020 में यूरोपीय संघ में यह संख्या 9.07 मिलियन थी। दूसरी ओर, भारत में 2015-16 की पिछली कृषि जनगणना के अनुसार, कुल परिचालन भूमि जोत 146.45 मिलियन थी। अकेले नरेंद्र मोदी सरकार की पीएम-किसान सम्मान निधि आय सहायता योजना से लाभान्वित होने वाले भूमिधारक किसान परिवारों की संख्या अप्रैल-जुलाई 2025 की किस्त के दौरान 97.14 मिलियन थी। कृषि से अपनी आजीविका चलाने वाली बड़ी आबादी को देखते हुए, भारत की पिछली सरकारों ने विदेशी उत्पादों को अधिक बाजार पहुंच प्रदान करने के प्रति सतर्कता बरती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि 17 जनवरी को यूरोपीय संघ द्वारा चार मर्कोसुर देशों - अर्जेंटीना, ब्राजील, पैराग्वे और उरुग्वे के साथ हस्ताक्षरित अंतरिम व्यापार समझौते को यूरोपीय संसद में झटका लगा।
21 जनवरी को, 27 देशों के इस समूह के सांसदों ने 334 के मुकाबले 324 मतों से व्यापार समझौते को यूरोपीय न्यायालय में भेजने का फैसला किया। यह फैसला किसानों के विरोध प्रदर्शनों के बाद लिया गया। कृषि में उपयोग होने वाली सामग्रियों (जैसे उर्वरक, बिजली, सिंचाई का पानी, ऋण या कृषि मशीनरी) पर कुल सब्सिडी 2022-24 में औसतन 47.9 अरब डॉलर रही। यह ओईसीडी द्वारा निगरानी किए गए 54 देशों में से किसी भी देश से अधिक थी। हालांकि, पीएम-किसान जैसी योजनाओं के माध्यम से भारत में किसानों को दी जाने वाली प्रत्यक्ष आय सहायता और अन्य भुगतान, जो 7.9 अरब डॉलर थे, यूरोपीय संघ (58.6 अरब डॉलर) और अमेरिका (22 अरब डॉलर) की तुलना में काफी कम थे। वस्तु बाजार मूल्य समर्थन और भी अधिक चौंकाने वाला है, जिसका वार्षिक औसत मूल्य 2022-24 के दौरान भारत के लिए चौंका देने वाला -129 अरब डॉलर आंका गया। कृषि उत्पादों पर घरेलू भंडारण, आवागमन और विपणन संबंधी विभिन्न प्रतिबंधों के साथ-साथ समय-समय पर लगाए गए निर्यात प्रतिबंधों का प्रभाव यह है कि आंतरिक परिवहन और अन्य शुल्कों को घटाने के बाद भारत में कृषि उत्पाद की कीमतें सीमा (निर्यात समता) कीमतों से भी नीचे गिर जाती हैं।
उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा है कि बहुपक्षीय व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय कानून और लोकतंत्र जैसे मूल्य चुनौती के दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे में भारत को यूरोप ऐसे साझेदार के रूप में देख रहा है, जिससे संतुलन स्थापित करने में मदद मिल सकती है। यूरोपीय कमिशन की अध्यक्ष ने दबाव डालकर नहीं, बल्कि मर्जी से सहयोग की बात कही है। यह लाइन आज के संदर्भमें और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, खासकर अमेरिका को लेकर।
Continue reading on the app
आईसीसी के फैसले के बाद, आईसीसी के अल्टीमेटम के बाद, चेतावनी देने के बाद मोहसीन नकवी जिस तरह की भाषा बोल रहे थे उस पर तो लगाम लग गई है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड पीसीबी बैकफुट पर आता नजर आ रहा है। T20 वर्ल्ड कप के को लेकर उन्होंने अपनी टीम भी अनाउंस कर दी। लेकिन इस टीम के पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी हमेशा की तरह आदतन जिस तरह के वो बयान देते आ रहे हैं। कंउसी तरह का एक और ट्रोवर्शियल स्टेटमेंट् उन्होंने दे दिया है। उन्हें बड़ी जोर से गुस्सा आ गया और गुस्से में उन्होंने आईसीसी को लेकर बयान दिया है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया है। लेकिन भारत में हम उनके पोस्ट नहीं देख सकते क्योंकि अकाउंट विद हेल्ड है क्योंकि वह जिस तरह के बयानबाजी इंडिया के अगेंस्ट करते रहे हैं तो इंडिया में तो उनका अकाउंट बैन है।
शाहिद आफरीदी ने कहा कि आईसीसी ने डबल स्टैंडर्ड दिखाया है। बांग्लादेश के साथ और बांग्लादेश के लोगों के साथ। यह अन्याय है। आईसीसी की दोहरे मापदंड की आलोचना करते हुए कहा कि आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के दौरान भारत को दुबई में अपने मैच खेलने की अनुमति दी गई थी। अफरीदी ने एक्स पर लिखा, बांग्लादेश और आईसीसी प्रतियोगिताओं में खेल चुके एक पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर के रूप में मैं आईसीसी की असंगतता से बेहद निराश हूं। इसने 2025 में पाकिस्तान का दौरा न करने के लिए भारत की सुरक्षा चिंताओं को स्वीकार किया, फिर भी बांग्लादेश के मामले में वही समझ दिखाने को तैयार नहीं दिख रहा है। वैश्विक क्रिकेट प्रशासन की नींव निरंतरता और निष्पक्षता पर टिकी है। बांग्लादेश के खिलाड़ी और उसके लाखों प्रशंसक सम्मान के पात्र हैं न कि मिश्रित मापदंडों के। आईसीसी को संबंध सुधारने चाहिए, न कि उन्हें नष्ट करना चाहिए।
पाकिस्तान का दर्द यह नहीं है कि बांग्लादेश खेलने आ रहा है कि नहीं आ रहा है। वो बस किसी तरह से भारत पर टारगेट करना चाहते हैं क्योंकि जो चैंपियंस ट्रॉफी में उनके साथ हुआ है कि जो एक कहावत चलती आ रही थी आप सब ने देखा होगा। कैसे चैंपियंस ट्रॉफी में ये भारत वाले हमारे यहां नहीं आते हैं। यह सब बात शुरुआत हुई है 2023 ओडीआई वर्ल्ड कप से जब वहां पे टीम इंडिया ने टीम इंडिया आना आने की बात हुई थी कि भारत आना है पाकिस्तान ने कहा था हम नहीं आएंगे फिर ICC ने हड़काया और उसके बाद एकदम चुपचाप चले आए और उसके बाद वेलकम हुआ बहुत खुश भी हुए बहुत मेहमान नवाजी हुई।
Continue reading on the app