Delhi Weather: राजधानी में न्यूनतम तापमान 21 डिग्री दर्ज, 2008 के बाद सितंबर की सबसे ठंडी सुबह
दिल्ली में मंगलवार सुबह न्यूनतम तापमान सामान्य से 2.3 डिग्री कम 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सितंबर में राष्ट्रीय राजधानी में 2008 के बाद दर्ज किया गया सबसे कम न्यूनतम तापमान है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने यह जानकारी दी। आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2001 के बाद सितंबर में सबसे कम न्यूनतम तापमान छह सितंबर 2008 को 20.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जबकि तीसरा सबसे कम न्यूनतम तापमान 19 सितंबर 2024 को 21.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।
आंकड़ों के मुताबिक, 29 और 30 सितंबर 2000 को तापमान इससे भी कम रहा था, जब शहर में न्यूनतम तापमान क्रमशः 20.6 और 20.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। हालांकि, वर्ष 2001 के बाद की तुलना में इन आंकड़ों को शामिल नहीं किया गया है। शहर के प्रमुख मौसम केंद्र सफदरजंग में भी रविवार को न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।
अन्य मौसम केंद्रों में पालम में न्यूनतम तापमान 19.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 3.8 डिग्री कम है। वहीं, लोधी रोड में न्यूनतम तापमान 20.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 1.6 डिग्री कम है। रिज में न्यूनतम तापमान 16.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 6 डिग्री कम है, जबकि आया नगर में यह 20.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2 डिग्री कम है।
आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार, मंगलवार को दिल्ली में अधिकतम तापमान करीब 32 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है और आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। मौसम केंद्रों पर सुबह साढ़े आठ बजे तक दर्ज बारिश के आंकड़ों के अनुसार, पालम में एक मिलीमीटर, रिज में 0.2 मिलीमीटर और आया नगर में 0.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। वहीं, सफदरजंग और लोधी रोड में नाममात्र की बारिश दर्ज की गई।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, मंगलवार सुबह नौ बजे दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 62 रहा, जो ‘संतोषजनक’ श्रेणी में आता है। सीपीसीबी के अनुसार, शून्य से 50 के बीच एक्यूआई को अच्छा , 51 से 100 को संतोषजनक , 101 से 200 को मध्यम , 201 से 300 को खराब , 301 से 400 को बहुत खराब और 401 से 500 के बीच गंभीर श्रेणी में माना जाता है।
Ujjain में Shahi Masjid का हिस्सा हटाने पर बनी सहमति, हाईकोर्ट ने याचिकाओं का किया निपटारा
उज्जैन में मस्जिद समिति के एक सदस्य ने कहा कि मुस्लिम समुदाय 2028 के सिंहस्थ कुंभ मेले के मद्देनजर किए जा रहे सड़क चौड़ीकरण कार्य का सम्मान करता है और ऐतिहासिक शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को स्वेच्छा से हटाने का काम मंगलवार को भी जारी रहेगा। नुमाइंदा समिति के सदस्य फहीम सिकंदर ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा कि स्थानीय प्रशासन, शहर काजी और समिति के पदाधिकारियों के बीच चर्चा के बाद शांतिपूर्ण तरीके से काम करने पर सहमति बनी। उन्होंने कहा कि मस्जिद के एक हिस्से को हटाने के फैसले की जानकारी रविवार रात सभी संबंधित लोगों तक नहीं पहुंच पाने के कारण कुछ समय के लिए स्थिति तनावपूर्ण हो गई जिससे सोमवार को पथराव की घटना भी हुई।
सिकंदर ने कहा कि मुस्लिम समुदाय सड़क चौड़ीकरण परियोजना का सम्मान करता है और शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने में सहयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि मस्जिद समिति का प्रयास धार्मिक स्थल को यथासंभव सुरक्षित रखने का था, लेकिन सहमति नहीं बन पाने के बाद सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहे हिस्से को हटाने का फैसला किया गया। सिकंदर ने कहा कि प्रशासन ने शुरुआत में तोड़फोड़ के लिए मशीन और अन्य उपकरण उपलब्ध नहीं कराए थे, इसलिए समुदाय के सदस्यों ने खुद ही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाना शुरू कर दिया।
उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए मस्जिद का कितना हिस्सा हटाया जाएगा, इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। दीवार के तीन से आठ फुट तक हिस्से को हटाने को लेकर चर्चा जारी है। सिकंदर ने कहा कि वरिष्ठ सदस्यों के साथ चर्चा के बाद यह स्पष्ट किया गया कि काम स्वेच्छा से किया जा रहा है, जिसके बाद स्थिति शांत हो गई।
उन्होंने कहा कि सड़क परियोजना के लिए मस्जिद का प्रभावित हिस्सा हटाने में सात से आठ दिन लग सकते हैं और जरूरत पड़ने पर मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि काम मंगलवार सुबह शुरू होगा और पूरी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। इस बीच, सोमवार को मध्यप्रदेश के इस शहर में उस समय तनाव फैल गया, जब सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए मस्जिद का एक हिस्सा हटाने के प्रस्ताव के विरोध में भीड़ एकत्र हो गई और उसने पथराव किया।
पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। बाद में सोमवार को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए सड़क चौड़ीकरण के वास्ते ऐतिहासिक शाही मस्जिद का एक हिस्सा हटाने के मामले में दायर दो रिट अपील का निपटारा कर दिया। मुस्लिम पक्ष और नगर निगम के बीच सहमति बनने के बाद अदालत ने दोनों अपील निस्तारित कर दीं।
न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की इंदौर पीठ ने याचिकाकर्ताओं द्वारा उज्जैन नगर निगम के साथ समझौता होने की जानकारी दिए जाने के बाद उनकी अलग-अलग अपीलों का निपटारा किया। अदालत ने कहा कि शाही मस्जिद मामले में उज्जैन नगर निगम की ओर से दिए गए आश्वासन और अंतरिम नोटिस नगर निकाय पर बाध्यकारी होंगे। मुस्लिम पक्ष की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता कुलदीप पाठक ने सुनवाई के बाद ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उच्च न्यायालय ने उज्जैन नगर निगम और शाही मस्जिद के प्रबंधन से जुड़ी एक समिति के बीच समझौते के आधार पर मुस्लिम पक्ष की रिट अपील का निपटारा किया है और दोनों पक्षों को समझौते का पालन करने को कहा है।
उन्होंने दावा किया कि उज्जैन के प्रशासन ने सड़क चौड़ीकरण के लिए शाही मस्जिद के करीब 9.5 फुट हिस्से को हटाने के लिए कहा था, लेकिन समझौते के तहत करीब तीन फुट हिस्सा हटाने पर सहमति बनी है।
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