अगर आपकी फ़्लाइट हाईजैक हो जाए तो किसी इजरायली...नेतन्याहू ने दे डाली बड़ी सलाह
7 अक्टूबर के हमले की बरसी से कुछ दिन पहले, इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फ्लाईदुबई कॉकपिट की घटना को इज़राइल से जुड़े एक बड़े संदेश में बदलने में बिल्कुल देर नहीं की। उन्होंने कॉकपिट के अंदर हमलावर को काबू करने में मदद करने वाले यात्रियों की जमकर तारीफ की। फॉक्स न्यूज़ (Fox News) से बातचीत में नेतन्याहू ने कहा मुझे नहीं पता कि अगली बार किसका विमान हाईजैक होगा, लेकिन यह ज़रूर सुनिश्चित करें कि आपकी बगल वाली सीट पर कोई इज़राइली बैठा हो।" इस घटना के बाद इज़राइल के लोगों में गर्व की लहर दौड़ गई कि कैसे यात्रियों ने विमान पर दोबारा नियंत्रण हासिल किया और एक बड़े जानलेवा हादसे को टालने में मदद की। इज़राइल में यात्रियों के काम की तेज़ी से तारीफ़ होने लगी और इसे राष्ट्रीय गर्व का विषय माना गया। इस बहादुरी भरे कदम को आम लोगों की पहल का एक बेहतरीन उदाहरण बताया गया, जिन्होंने तब ज़िम्मेदारी संभाली जब विमान पर गंभीर संकट मंडरा रहा था।
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यात्रियों की बहादुरी के लिए इज़राइल करेगा सम्मान
इज़राइल के राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग ने कहा कि वह उन पाँच यात्रियों को नागरिक बहादुरी के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित करेंगे, जिन्होंने कॉकपिट में जाकर स्थिति को संभाला था। यह घटना तब हुई जब ओमान के को-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला किया और विमान पर कब्ज़ा करने की कोशिश की। हर्ज़ोग ने कहा आपने दूसरों की जान बचाने के लिए खुद को खतरे में डाला और एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया। आज पूरी दुनिया ने इज़राइली समाज का एक सुंदर और साहसी चेहरा देखा है। हीरो माने जाने वालों में यानिव हायून भी शामिल थे, जो एक प्लंबर हैं और जिन्होंने को-पायलट को काबू करने में मदद की थी। हायून इस घटना के एक अहम चेहरे बन गए, जब उन्होंने बताया कि कैसे वे कॉकपिट में दौड़े और हमलावर को काबू में करने में मदद की, जबकि घायल कैप्टन का इलाज चल रहा था।
यात्रियों के इज़राइल लौटने पर नेतन्याहू बेन गुरियन एयरपोर्ट पर हायून से मिले। हायून ने वही खून से सनी टी-शर्ट और जींस पहनी हुई थी जो उसने संघर्ष के दौरान पहनी थी। नेतन्याहू ने उसे गले लगाया और पूछा तुम एक हीरो हो। तुमने यह कैसे किया?
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हायून ने जवाब दिया हम शेरों की कौम हैं। उसने को-पायलट के साथ हुई शारीरिक हाथापाई का भी ज़िक्र किया और नेतन्याहू से कहा दुर्भाग्य से हम उसे मार नहीं पाए, लेकिन उसे ठीक होने में कुछ समय लगेगा। यह बहादुरी जल्द ही इज़राइल की राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गई। यात्रियों का व्यक्तिगत रूप से स्वागत करने और उनके काम की सराहना करने के नेतन्याहू के फैसले की कुछ इज़राइलियों ने तारीफ़ की, लेकिन विपक्ष के नेताओं ने प्रधानमंत्री पर इस घटना का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश देने के लिए करने का आरोप भी लगाया।
गेहूं-चावल भंडारण में कीट नियंत्रण के लिए आईसीएआर और एफसीआई ने मिलाया हाथ, सुरक्षित तकनीकों पर होगा शोध
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने गेहूं और चावल के भंडारण में लगने वाले कीटों के सुरक्षित और टिकाऊ प्रबंधन के लिए वैकल्पिक फ्यूमिगेशन तकनीकों पर शोध करने हेतु एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। सरकार का मानना है कि यह पहल देश के खाद्यान्न भंडारण तंत्र को अधिक सुरक्षित, प्रभावी और पर्यावरण-अनुकूल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
आधिकारिक बयान के अनुसार, भारत में लंबे समय से गेहूं और चावल के भंडारण के दौरान कीट नियंत्रण के लिए मुख्य रूप से एल्युमिनियम फॉस्फाइड (एएलपी) और मैलाथियॉन जैसे रसायनों का उपयोग किया जाता रहा है। हालांकि इन रसायनों के लगातार और व्यापक इस्तेमाल के कारण कई गंभीर चुनौतियां सामने आई हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, कई प्रमुख राज्यों में भंडारण कीटों में इन रसायनों के प्रति 72 से 100 प्रतिशत तक प्रतिरोध विकसित हो चुका है। इसके कारण बार-बार फ्यूमिगेशन करना पड़ता है, जिससे लागत बढ़ रही है। साथ ही इन रसायनों का उपयोग श्रमिकों के स्वास्थ्य के लिए भी जोखिम पैदा करता है और पर्यावरण पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
नई पहल का उद्देश्य इन चुनौतियों का समाधान करना है। इसके तहत नाइट्रोजन गैस, कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) और सीओ2 तथा फॉस्फीन के संयुक्त उपयोग जैसी तकनीकों को व्यावसायिक स्तर पर मानकीकृत करने पर काम किया जाएगा।
परियोजना के पहले चरण (फेज-I) में तीन प्रमुख परीक्षण किए जाएंगे। इनमें धातु के साइलो में संग्रहित गेहूं के लिए 99 प्रतिशत से अधिक शुद्ध नाइट्रोजन गैस फ्यूमिगेशन, एफसीआई और केंद्रीय भंडारण निगम (सीडब्ल्यूसी) के गोदामों में बोरीबंद गेहूं एवं चावल के लिए कार्बन डाइऑक्साइड और फॉस्फीन गैस के संयुक्त उपयोग तथा हर्मेटिक कवर में संग्रहित अनाज के लिए कार्बन डाइऑक्साइड-आधारित फ्यूमिगेशन का परीक्षण शामिल है।
दो वर्षों तक चलने वाले पायलट चरण के बाद दूसरे चरण (फेज-II) में देश के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में एक वर्ष तक बहु-स्थान परीक्षण किए जाएंगे। इसके आधार पर क्षेत्रवार स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स (एसओपी) तैयार किए जाएंगे।
बयान में कहा गया है कि इस पहल का लक्ष्य पारंपरिक रासायनिक फ्यूमिगेशन के ऐसे वैज्ञानिक, व्यावहारिक और टिकाऊ विकल्प विकसित करना है, जो कीट प्रतिरोध, स्वास्थ्य जोखिम, पर्यावरणीय प्रभाव और रसायनों के अवशेषों जैसी समस्याओं को कम कर सकें।
यह अनुसंधान परियोजना खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी), उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के सहयोग से संचालित की जाएगी। परियोजना के पहले चरण को आईसीएआर-केंद्रीय फसलोत्तर अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईपीएचईटी), लुधियाना द्वारा लागू किया जाएगा।
--आईएएनएस
डीबीपी
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