चीनी महावाणिज्य दूत ने 49वें कोलकाता अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले के उद्घाटन समारोह में भाग लिया
बीजिंग, 25 जनवरी (आईएएनएस)। हाल ही में भारत के कोलकाता में स्थित चीन के महावाणिज्य दूत शू वेई ने 49वें कोलकाता अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले के उद्घाटन समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री, पर्यटन मंत्री तथा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा मंत्री भी उपस्थित थे।
उद्घाटन समारोह के पश्चात महावाणिज्य दूत शू वेई और पुस्तक मेले की आयोजन समिति के अध्यक्ष ने संयुक्त रूप से चीनी वाणिज्य दूतावास के चीनी पुस्तक प्रदर्शनी बूथ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर शू वेई ने अतिथियों को प्रदर्शनी के विषय-वस्तु और प्रस्तुति से परिचित कराया।
उन्होंने प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई), इंडो-एशियन न्यूज सर्विस (आईएएनएस), द टेलीग्राफ और स्काई8 टीवी सहित कई प्रमुख भारतीय मीडिया संस्थानों से बातचीत की और चीन-भारत के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं सहयोग को और विस्तार देने पर विचार साझा किए।
साक्षात्कार के दौरान शू वेई ने कहा कि पुस्तकों सहित विविध सांस्कृतिक माध्यम दोनों देशों के लोगों के बीच विचारों, ज्ञान और भावनाओं को जोड़ने वाले सशक्त सेतु हैं।
उल्लेखनीय है कि कोलकाता अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेला वर्ष 1976 में आरंभ हुआ था और यह अब एशिया के सबसे बड़े पुस्तक मेलों में से एक बन चुका है। इस वर्ष के आयोजन में अर्जेंटीना विशिष्ट अतिथि देश के रूप में सहभागी है, जबकि ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस सहित कुल 20 देशों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
आयोजकों के अनुसार, इस बार मेले में लगभग 30 लाख से अधिक आगंतुकों के आने की संभावना है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
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ग्रीनलैंड पर ट्रंप की जिद ने बढ़ाई टेंशन, पहली बार अमेरिका के खिलाफ एकजुट हुआ पूरा यूरोप
यूरोप और अमेरिका के बीच सालों से चली आ रही दोस्ती अब एक बड़े तनाव में बदल गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को खरीदने या उस पर कब्जा करने की पुरानी मांग ने इस बार यूरोपीय देशों को नाराज कर दिया है. ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में यह पहला मौका है जब पूरा यूरोप एक सुर में अमेरिका के खिलाफ खड़ा नजर आ रहा है.
ग्रीनलैंड बना विवाद की असली जड़
ग्रीनलैंड तकनीकी रूप से डेनमार्क का हिस्सा है और नाटो का सदस्य भी है. ट्रंप ने एक बार फिर कहा है कि अमेरिका को हर कीमत पर ग्रीनलैंड चाहिए. यूरोपीय नेताओं का मानना है कि ट्रंप की यह मांग अंतरराष्ट्रीय कानूनों का मजाक उड़ाने जैसी है. पिछले एक साल से यूरोपीय नेता इस मामले को शांति से सुलझाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन अब उन्होंने साफ कर दिया है कि वे इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेंगे.
सभी देशों ने दिखाई सख्ती
इस विवाद में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने खुलकर ग्रीनलैंड का साथ दिया है. उन्होंने साफ कहा कि उनका देश ग्रीनलैंड की आजादी और हक के साथ खड़ा है. नॉर्वे और दूसरे यूरोपीय देशों ने भी अमेरिका को चेतावनी दी है कि दोस्तों के बीच धमकियों की कोई जगह नहीं होती है. इस बार खास बात यह रही कि यूरोपीय देशों ने अलग-अलग बोलने के बजाय एक टीम की तरह अपनी बात रखी है.
यूरोप की रणनीति में आया बड़ा बदलाव
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन का कहना है कि जब यूरोप एकजुट होकर बोलता है, तभी उसकी बात सुनी जाती है. जानकारों का मानना है कि ट्रंप सिर्फ फायदे और नुकसान की भाषा समझते हैं, उन्हें पुराने नियमों या डिप्लोमेसी से कोई खास मतलब नहीं है. इसी वजह से यूरोप ने भी अपनी पुरानी रणनीति बदलकर अब सीधे शब्दों में जवाब देना शुरू कर दिया है.
धमकियों के बावजूद पीछे नहीं हटा यूरोप
जब ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन ने साफ कह दिया कि अब बहुत हो गया है, तो पूरे यूरोप ने उनका समर्थन किया. इसके जवाब में ट्रंप ने आठ यूरोपीय देशों पर टैक्स बढ़ाने की धमकी दी ताकि उन पर दबाव बनाया जा सके. इसके बावजूद यूरोपीय नेताओं ने हार नहीं मानी और इसे दबाव बनाने की घटिया राजनीति करार दिया.
भविष्य के लिए कड़ा संदेश
कनाडा के बड़े नेताओं और अन्य यूरोपीय दिग्गजों का मानना है कि ट्रंप इस वक्त अपने देश में कई मुश्किलों से घिरे हैं. ऐसे में यूरोप को किसी के सामने झुकने की जरूरत नहीं है. हालांकि ट्रंप अब अपनी बात से थोड़ा पीछे हटते दिख रहे हैं, लेकिन डेनमार्क ने साफ कर दिया है कि वे अपनी जमीन का सौदा कभी नहीं करेंगे. इस पूरे विवाद ने दिखा दिया है कि अब यूरोप अमेरिका के सामने दबकर रहने के मूड में बिल्कुल नहीं है.
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