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सूडान में जारी गृहयुद्ध में महिलाएं बड़ी संख्या में बन रहीं शिकार, यौन हिंसा के मामले सबसे ज्यादा

नई दिल्ली, 25 जनवरी (आईएएनएस)। सूडान में दो साल से भी ज्यादा लंबे समय से गृह युद्ध छिड़ा हुआ है, लेकिन इस लड़ाई में औरतें सबसे ज्यादा शोषण का शिकार हैं। सूडान की महिलाओं को दुनिया की सबसे बुरी यौन हिंसा और दूसरे जुर्मों का सामना करना पड़ रहा है। यह जानकारी सेना के समर्थन वाली सरकार की सामाजिक मामलों की मंत्री बनी एक कार्यकर्ता सुलेमा इसहाक अल-खलीफा ने दी है।

सूडान की सेना और पैरामिलिट्री रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) अप्रैल 2023 से एक भयानक लड़ाई में उलझी हुई हैं। इस गृहयुद्ध में अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं, लगभग 1.10 करोड़ लोग बेघर हुए और बड़े पैमाने पर यौन हिंसा हुई है।

सुलेमा इसहाक अल-खलीफा ने कहा कि औरतों के साथ बुरा बर्ताव नियमित तौर पर लूटपाट और हमलों के साथ होता है। पोर्ट सूडान में ट्रेंड साइकोलॉजिस्ट ने कहा, महिलाओं के साथ जो यौन हिंसा हो रही है, उसमें कोई उम्र की लिमिट नहीं है। 85 साल की औरत से दुष्कर्म हो सकता है, एक साल की बच्ची भी सुरक्षित नहीं है।

लंबे समय से महिला अधिकारों के लिए काम कर रही कार्यकर्ता ने कहा कि महिलाओं को सेक्सुअल स्लेवरी (यौन दासों) का शिकार बनाया जा रहा है और पड़ोसी देशों में उनकी तस्करी की जा रही है। इसके साथ ही उनकी जबरदस्ती शादियां भी करवाई जा रही हैं।

खलीफा ने कहा कि दोनों तरफ से यौन हिंसा की खबरें आई हैं। उनके मंत्रालय ने अप्रैल 2023 और अक्टूबर 2025 के बीच 1,800 से ज्यादा दुष्कर्म के मामले दस्तावेज में दर्ज किए हैं। इस आंकड़े में अक्टूबर के आखिर से पश्चिमी दारफुर और पड़ोसी कोर्डोफन इलाके में डॉक्यूमेंट किए गए अत्याचार शामिल नहीं हैं।

खलीफा ने कहा, यह लोगों को बेइज्जत करने, उन्हें उनके घर, जगह और शहर छोड़ने के लिए मजबूर करने और सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने के बारे में है।

एक कार्यकर्ता समूह और हॉर्न ऑफ अफ्रीका में महिलाओं के खिलाफ होने वाले गलत कामों को डॉक्यूमेंट करने वाली रिपोर्ट में पाया गया कि रिकॉर्ड किए गए तीन-चौथाई से ज्यादा मामले दुष्कर्म के थे, जिसमें से 87 फीसदी आरएसएफ से जुड़े थे।

संयुक्त राष्ट्र ने दारफुर में गैर-अरब समुदायों पर टारगेटेड हमलों को लेकर बार-बार चिंता जताई है। इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (आईसीसी) ने दोनों तरफ से किए गए युद्ध अपराधों की औपचारिक जांच शुरू कर दी है।

यूएन सिक्योरिटी काउंसिल को आईसीसी के डिप्टी प्रॉसिक्यूटर नजहत शमीम खान ने कहा कि इन्वेस्टिगेटर को एल फशेर में एक सोचे-समझे कैंपेन के सबूत मिले हैं। यह दारफुर में आर्मी का आखिरी गढ़ था, जिस पर आरएसएफ ने अक्टूबर के आखिर में कब्जा कर लिया था।

उन्होंने आगे कहा कि इस कैंपेन में बड़े पैमाने पर सामूहिक दुष्कर्म और फांसी शामिल थी, कभी-कभी अपराधियों ने इसे फिल्माया और सेलिब्रेट किया और पूरी तरह से सजा से बचने की भावना से इसे हवा दी।

--आईएएनएस

केके/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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अमेरिका में बदला इमिग्रेशन नियम, अब बिना जज के वारंट के भी घरों में घुस रहे हैं अधिकारी

अमेरिका में इमिग्रेशन नियमों को लेकर एक ऐसा बदलाव हुआ है जिसने सालों से चली आ रही कानूनी समझ को पूरी तरह बदल दिया है. अब इमिग्रेशन अधिकारी (ICE) बिना किसी जज के वारंट के भी लोगों के घरों में घुसकर उन्हें गिरफ्तार कर सकेंगे.

क्या है नया नियम?

अभी तक अमेरिका में यह माना जाता था कि अगर आपके दरवाजे पर इमिग्रेशन अधिकारी आए हैं, तो जब तक उनके पास जज द्वारा साइन किया हुआ वारंट न हो, आप दरवाजा खोलने के लिए मजबूर नहीं हैं. यह अधिकार अमेरिकी संविधान के चौथे संशोधन (Fourth Amendment) के तहत मिलता था.

लेकिन, अब एक नए इंटरनल मेमो के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ 'फाइनल रिमूवल ऑर्डर' (देश निकाला का अंतिम आदेश) है, तो अधिकारी प्रशासनिक वारंट के आधार पर भी जबरन घर में घुस सकते हैं.

कैसे होगी गिरफ्तारी?

इस नए बदलाव के बाद अधिकारियों को अब घंटों घर के बाहर इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. हालांकि, मेमो में कुछ शर्तें भी रखी गई हैं. अधिकारियों को दरवाजा खटखटाना होगा.
उन्हें अपनी पहचान बतानी होगी. कार्रवाई सुबह 6 बजे से रात 10 बजे के बीच ही की जा सकती है. 

जमीन पर दिखने लगा असर

यह नियम सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है. मिनियापोलिस में ऐसी घटनाएं देखी गई हैं जहां ICE एजेंट भारी हथियारों और टैक्टिकल गियर के साथ लोगों के घरों के दरवाजे तोड़कर अंदर घुसे. प्रवासियों के बीच सालों से चली आ रही 'Know Your Rights' (अपने अधिकारों को जानो) की सलाह अब बेअसर होती दिख रही है. 

क्यों बढ़ रहा है विवाद?

इस फैसले का कड़ा विरोध शुरू हो गया है. कई नेताओं और कानूनी जानकारों का कहना है कि जिन राज्यों में 'स्टैंड-योर-ग्राउंड' (आत्मरक्षा में हथियार चलाने का हक) जैसे कानून हैं, वहां अधिकारियों और मकान मालिकों के बीच हिंसक झड़प हो सकती है. अगर अधिकारी गलती से किसी गलत पते पर छापा मारते हैं, तो अमेरिकी नागरिक भी इसकी चपेट में आ सकते हैं.
जानकारों का मानना है कि यह नीति लोगों के अपने घर में सुरक्षित महसूस करने के हक को छीन रही है. 

डमोक्रेट्स उठा रहे हैं सवाल

डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने इस पर सवाल उठाए हैं और कांग्रेस में सुनवाई की मांग की है. वहीं, इमिग्रेशन को लेकर सख्त रुख रखने वाले अधिकारियों का कहना है कि पुरानी सलाह केवल लोगों को गिरफ्तारी से बचने की ट्रेनिंग दे रही थी, जिसे रोकना जरूरी था.

ये भी पढ़ें- US-Iran Tension: अमेरिका और ईरान के बीच टकराव की आशंका, बंकर में शिफ्ट हुए खामेनेई

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