2027 वनडे वर्ल्ड कप से पहले इतने मैच खेलेगी टीम इंडिया, ODI फॉर्मेट में हो सकता है एशिया कप, तो बढ़ जाएगी मुकाबलों की संख्या
ODI World Cup 2027: आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप 2027 की तैयारियां जोरों-शोरों से कर रही है. इस टूर्नामेंट का आधिकारिक शेड्यूल 1 अक्टूबर को केपटाउन में जारी किए जाने की संभावना है. टीम इंडिया ने भी वनडे वर्ल्ड कप की तैयारियां शुरू कर दी हैं. वेस्टइंडीज के खिलाफ जारी वनडे सीरीज से भारतीय टीम ने खुद को परखने और सही संयोजन तलाशना शुरू कर दिया है. अब फैंस के मन में होगा कि वनडे वर्ल्ड कप से पहले टीम इंडिया को कितने वनडे खेलने को मिलेंगे, तो चलिए जानते हैं.
2027 वर्ल्ड कप से पहले टीम इंडिया का पूरा शेड्यूल
वेस्टइंडीज के खिलाफ चल रही सीरीज के बाद भारतीय टीम को न्यूजीलैंड, श्रीलंका और जिम्बाब्वे के खिलाफ भी वनडे सीरीज खेलनी है. फिलहाल के तय शेड्यूल के हिसाब से, 2027 वर्ल्ड कप से पहले भारत को कुल 13 वनडे मैच खेलने हैं, जिसमें अभी वेस्टइंडीज के खिलाफ बचे 2 मैच भी शामिल हैं. हालांकि, आने वाले समय में इस कार्यक्रम में कुछ बदलाव भी हो सकते हैं और कुछ नए मैच जोड़े जा सकते हैं. इसके साथ ही, साल 2027 का एशिया कप भी 50 ओवर के फॉर्मेट में होने की उम्मीद है, जिसमें टीम इंडिया को 2,3 वनडे मैच खेलने को मिल जाएंगे. ऐसे में भारतीय टीम को वर्ल्ड कप की फाइनल तैयारियों के लिए कुछ और मैच खेलने का बेहतरीन मौका मिल जाएगा.
कीवी सरजमीं पर होगा टीम इंडिया की असली इम्तिहान
वेस्टइंडीज सीरीज के आखिरी दो मैचों के बाद टीम इंडिया का असली टेस्ट शुरू होगा. नवंबर 2026 में भारतीय टीम न्यूजीलैंड का दौरा करेगी, जहां दोनों टीमों के बीच 5 वनडे मैचों की रोमांचक सीरीज होगी. इसके तुरंत बाद, दिसंबर 2026 में भारत अपने घर में श्रीलंका से 3 वनडे मैचों की सीरीज खेलेगा. फिर नए साल की शुरुआत यानी जनवरी 2027 में जिम्बाब्वे की टीम भारत आएगी, जहां दोनों देशों के बीच 3 मैचों की घरेलू वनडे सीरीज खेली जाएगी.
13 वनडे मैचों में तैयार होगी वर्ल्ड कप की बेस्ट टीम
इस तरह देखें तो वर्ल्ड कप से पहले भारत को 13 पक्के वनडे मैच खेलने को मिलेंगे. इन मैचों के जरिए टीम मैनेजमेंट के पास नए खिलाड़ियों को आजमाने और अपनी सबसे मजबूत प्लेइंग इलेवन तैयार करने का शानदार मौका होगा. अगर पिछले रिकॉर्ड पर नजर डालें, तो 2023 वर्ल्ड कप फाइनल के बाद से टीम इंडिया ने अब तक कुल 30 वनडे मैच खेले हैं. इनमें से भारत ने 19 मैचों में धमाकेदार जीत दर्ज की है, जबकि 10 मैचों में उसे हार मिली और एक मैच बेनतीजा रहा. इस दौरान भारत ने दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और अफगानिस्तान जैसी मजबूत टीमों को वनडे सीरीज में धूल चटाई. साथ ही, टीम इंडिया ने 2025 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जीतकर भी अपनी बादशाहत साबित की थी.
एशिया कप से चमकेगी रणनीति, बढ़ सकती है वनडे मैचों की गिनती
भारतीय टीम के शेड्यूल में आने वाले समय में कुछ और वनडे मैच जुड़ सकते हैं. दरअसल, भारत और बांग्लादेश के बीच पहले टल चुकी वनडे सीरीज को अगर दोबारा शेड्यूल में जगह मिलती है, तो टीम इंडिया के मैचों की संख्या बढ़ जाएगी. इसके अलावा, साल 2027 का एशिया कप भी भारत की विश्व कप तैयारियों के लिए बेहद जरूरी साबित होगा. इस टूर्नामेंट के 50 ओवर फॉर्मेट में होने की पूरी उम्मीद है. ऐसे में, एशिया कप के कड़े मुकाबले भारतीय टीम को वर्ल्ड कप से ठीक पहले अपनी रणनीति मजबूत करने, खिलाड़ियों की भूमिकाएं तय करने और दबाव वाले बड़े मैचों में खुद को परखने का एक बेहतरीन मौका देंगे.
हॉकी में देश को गोल्ड दिलाने वाली पार्वती के परिवार की मदद को आगे आया प्रशासन, घर में शौचालय तक नहीं
गुमला की हॉकी खिलाड़ी पार्वती तोपनो ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर जिले और राज्य का नाम रोशन किया है. चीन में 4 से 13 सितंबर 2026 तक आयोजित जूनियर महिला एशिया कप में पार्वती भारतीय टीम का हिस्सा रहीं. भारत ने इस प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता.
कामडारा की रहने वाली पार्वती के गांव लौटने पर हॉकी डे-बोर्डिंग सेंटर के खिलाड़ियों और ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया. पार्वती ने वर्ष 2017 में कामडारा हॉकी डे-बोर्डिंग सेंटर से अपने खेल सफर की शुरुआत की थी. इसके बाद उन्होंने बारियातू, मोरहाबादी और बेंगलुरु एनसीओई में प्रशिक्षण लिया. वह 2025 में चिली में आयोजित जूनियर महिला विश्व कप में भी भारतीय टीम का हिस्सा रह चुकी हैं.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल करने के बावजूद पार्वती के परिवार के सामने बुनियादी सुविधाओं की कमी की बात सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक उनके घर में अभी पानी और शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. उनके पिता मजदूरी और राजमिस्त्री का काम करते हैं. आर्थिक चुनौतियों के बीच पार्वती ने मेहनत जारी रखी और हॉकी में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई.
पार्वती की उपलब्धि और उनके परिवार की स्थिति सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर प्रशासन से मदद की उम्मीद बढ़ी है. जिला परिषद सदस्य दीपक कंडुलना ने परिवार की समस्याओं को उपायुक्त के सामने रखने और समाधान कराने की बात कही है.
वहीं, झारखंड सरकार ने जुलाई 2026 में खेल विभाग की समीक्षा के दौरान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों की आर्थिक स्थिति पर ध्यान देने और कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि वाले खिलाड़ियों के लिए प्रोत्साहन योजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए थे. सरकार ने ऐसे खिलाड़ियों का डेटाबेस तैयार करने पर भी जोर दिया था.
पार्वती की कहानी यह दिखाती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद प्रतिभा और मेहनत के दम पर खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकते हैं. अब स्थानीय स्तर पर उनके परिवार को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की पहल से इस उपलब्धि को और सार्थक बनाने की उम्मीद है.
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