इस सरकारी बैंक ने बदले क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियम, 1 नवंबर से होंगे लागू, यूजर्स जरूर जान लें
पब्लिक सेक्टर के केनरा बैंक में क्रेडिट कार्ड ईएमआई से जुड़े कई (Credit Card Rules) बदलाव किए हैं। नए नियम 1 नवंबर 2026 से लागू होने वाले हैं। जिसकी जानकारी बैंक में एक नोटिफिकेशन के जरिए दी है। वर्तमान में 3, 6 और 9 महीने के लिए ब्याज दर 13% सालाना है, जो नवंबर से बढ़कर 14% होने वाला है। 12, 15 और 18 महीने की अवधि के लिए 15% ब्याज लगेगा। वर्तमान में 12 18 और 24 महीने के अवधि के लिए ब्याज 14% है। 21 और 24 महीने की अवधि के लिए ब्याज दर 16% होगा।
नियमों के तहत क्रेडिट कार्ड के लिए ईएमआई सुविधा ऑटोमेटिक या मैन्युअल कैश डिसबर्समेंट, महंगे स्टोन, गहने और सिल्वर वेयर स्टोर जैसे ट्रांजैक्शन कैटेगरी पर लागू नहीं होते। वहीं फीस, चार्जेस, जीएसटी और अन्य चार्ज पर लगे इंटरेस्ट को ईएमआई में बदला नहीं जा सकता। यह सुविधा केवल लिमिटेड टेन्योर के लिए ही उपलब्ध होती है।
क्रेडिट कार्ड ईएमआई प्रोसेसिंग फीस में बदलाव
बैंक ने क्रेडिट कार्ड ईएमआई की प्रोसेसिंग फीस में भी बदलाव किया है। वर्तमान में प्रोसेसिंग फीस अमाउंट का 2% है। इसकी लिमिट न्यूनतम 100 रुपये और अधिकतम 200 रुपये और जीएसटी है। 1 नवंबर से इसकी लिमिट अधिकतम 499 रुपये और जीएसटी होने वाली है। हालांकि न्यूनतम लिमिट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। प्रोसेसिंग फीस भी 2% होगी।
इन नियमों को भी जान लें
बैंक ने ईएमआई कन्वर्जन के लिए न्यूनतम योग्य अमाउंट में भी बदलाव किया है। अब ग्राहक 2500 रुपये तक के अमाउंट को ईएमआई में बदल सकते हैं। वर्तमान में यह लिमिट 5000 रुपये है। हालांकि बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कार्ड मेंबर को प्राइमरी या एड-ऑन क्रेडिट कार्ड से की गई रिटेल खरीदारी या ट्रांजैक्शन को ही ईएमआई में बदलने की अनुमति होगी। बैंक अपनी मर्जी और फैसले से कम से कम रकम की पात्रता में बदलाव भी कर सकता है। अगर लगातार 3 महीने से ज्यादा समय तक यदि ईएमआई का भुगतान नहीं किया जाता, तो बैंक के पास इस सुविधा को बंद करने का अधिकार भी होता है।
भारत में कुल कितने झरने हैं और कितने सूख गए? पहली बार सामने आया सरकारी डेटा, 20 करोड़ जिंदगियों पर खतरा
भारत में कुल कितने झरने हैं? जल शक्ति मंत्रालय इस सवाल का जवाब ढूंढ रहा है. पहले स्प्रिंग सेंसस में 10 राज्यों के 14,468 झरनों का डेटा सामने आया है. इस रिपोर्ट के मुताबिक मणिपुर और महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा झरने दर्ज किए गए हैं. वहीं हजारों कुदरती जलस्रोत अब सूखने की कगार पर पहुंच चुके हैं. देश की लगभग 20 करोड़ आबादी अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इन्हीं झरनों पर निर्भर है. ऐसे में अनियंत्रित विकास और घटते जलस्रोतों ने गंभीर खतरे की घंटी बजा दी है. (All Photos : PTI)
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