सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा पेंगुइन वाला ये वीडियो; ट्रंप ने भी किया शेयर, लेकिन क्या है इसकी सच्चाई? जानिए
सोशल मीडिया पर आए दिन कोई न कोई वीडियो वायरल होते रहते हैं. इन दिनों एक पेंगुइन का वीडियो खूब वायरल हो रहा है. इस वीडियो ने पलक झपकते जेन जी का ध्यान अपनी ओर खींचा है. इसपर जमकर मीम बन रहे हैं. मीम तो छोड़िए यह वीडियो अब व्हाइट हाउस भी पहुंच चुका है. व्हाइट हाउस ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया पर ट्रंप की फोटो लगाते हुए इसे पोस्ट किया है. तो चलिए इस वायरल वीडियो के बैग्राउंड यानी कि ये कहां से आया और अब क्यों ट्रेंड कर रहा है? इसकी बात करते हैं.
Embrace the penguin. pic.twitter.com/kKlzwd3Rx7
— The White House (@WhiteHouse) January 23, 2026
वीडियो में क्या था?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक अकेला पेंगुइन अपने समूह से दूर बर्फीली पहाड़ियों की ओर चलता दिखाई देता है. इंटरनेट यूजर्स इसे ‘निहिलिस्ट पेंगुइन’ कह रहे हैं और इसे जीवन, अकेलेपन और विद्रोह से जोड़कर देख रहे हैं. हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके पीछे भावनात्मक नहीं, बल्कि प्राकृतिक कारण हैं.
Redditors don't understand the penguin. pic.twitter.com/AidHlzrNkE
— Reddit Lies (@reddit_lies) January 22, 2026
2007 की डॉक्यूमेंट्री का है ये क्लिप
यह वीडियो साल 2007 की डॉक्यूमेंट्री ‘एनकाउंटर्स एट द एंड ऑफ द वर्ल्ड’ से लिया गया है, जिसे मशहूर फिल्ममेकर वेर्नर हर्जोग ने बनाया था. इसमें एडेली प्रजाति का एक पेंगुइन अपने समुद्र किनारे बसे कॉलोनी से अलग होकर करीब 70 किलोमीटर अंदर बंजर पहाड़ियों की ओर जाता दिखता है. आमतौर पर पेंगुइन समुद्र के आसपास ही रहते हैं, इसलिए यह व्यवहार असामान्य माना जाता है.
अब क्यों वायरल हुआ ये वीडियो
वीडियो वायरल इसलिए हुआ क्योंकि सोशल मीडिया पर लोगों ने इस पेंगुइन को इंसानी भावनाओं से जोड़ दिया. कोई इसे आजादी की तलाश बताता है तो कोई इसे व्यवस्था के खिलाफ विद्रोह का प्रतीक मान रहा है. कई मीम्स में लिखा गया कि पेंगुइन “अपने उद्देश्य की खोज” में निकला है. लेकिन ये सब व्याख्याएं इंसानी सोच पर आधारित हैं.
इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण
वैज्ञानिकों के मुताबिक, एडेली पेंगुइन सामान्य तौर पर अपने भोजन और प्रजनन क्षेत्र के पास ही रहते हैं. कभी-कभी कोई पेंगुइन भटक सकता है, लेकिन इतनी दूर पहाड़ों की ओर जाना बहुत दुर्लभ है. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. जैसे दिशा भटक जाना, बीमारी या चोट के कारण असामान्य व्यवहार, या फिर युवा पेंगुइनों में नई जगह देखने की प्रवृत्ति.
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. ऐनली का कहना है कि पेंगुइन जानबूझकर ऐसा नहीं करते. वे कहते हैं कि जानवर कभी-कभी भ्रमित हो सकते हैं और उनका असामान्य व्यवहार किसी मानसिक उद्देश्य का संकेत नहीं होता. यह अक्सर तनाव, पर्यावरण या व्यक्तिगत अंतर के कारण होता है. वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो एक अकेले पेंगुइन का भटकना किसी बड़े संकट का संकेत नहीं है. यह पूरी प्रजाति के लिए खतरे की बात नहीं है. सोशल मीडिया ने इसे एक प्रतीक बना दिया है, जबकि विज्ञान इसे एक अलग और रोचक घटना मानता है.
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पार्टी लाइन को नहीं किया क्रॉस, जानें कांग्रेस से तनातनी को लेकर क्या बोले शशि थरूर
तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने पार्टी के साथ मतभेदों की चर्चाओं के बीच बड़ा बयान दिया है. थरूर ने साफ कहा है कि उन्होंने कभी भी संसद में कांग्रेस के आधिकारिक रुख का उल्लंघन नहीं किया. केरल लिटरेचर फेस्टिवल में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए थरूर ने स्पष्ट किया कि सिद्धांतों के स्तर पर उनका एकमात्र मतभेद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर था और इस पर उन्होंने जो रुख अपनाया, उस पर उन्हें कोई पछतावा नहीं है.
ऑपरेशन सिंदूर पर क्यों था अलग नजरिया
शशि थरूर ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के मुद्दे पर उन्होंने एक प्रेक्षक और लेखक के तौर पर अपनी राय रखी थी. पहलगाम हमले के बाद लिखे गए अपने अखबारी कॉलम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को बिना जवाब के नहीं छोड़ा जा सकता. उनका मानना था कि आतंकवाद के खिलाफ सख्त और स्पष्ट संदेश देना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे हमलों पर लगाम लगाई जा सके.
सीमित कार्रवाई और विकास पर जोर
थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका रुख किसी बड़े युद्ध या लंबे संघर्ष के पक्ष में नहीं था. उन्होंने कहा कि भारत को विकास के रास्ते से भटकाकर पाकिस्तान के साथ अंतहीन टकराव में नहीं फंसना चाहिए. किसी भी कार्रवाई का दायरा सिर्फ आतंकी ठिकानों तक सीमित रहना चाहिए. थरूर के अनुसार, उन्हें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि भारत सरकार ने बाद में लगभग वही कदम उठाए, जिनका उन्होंने सुझाव दिया था.
राष्ट्रीय हित सर्वोपरि
अपने बयान में थरूर ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति से जुड़ा कोई भी सवाल हो, उसमें देश को प्राथमिकता मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा, 'राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन जब बात भारत की सुरक्षा और सम्मान की हो, तो भारत की ही जीत होनी चाहिए.'
कांग्रेस नेतृत्व से दूरी की अटकलें
थरूर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस नेतृत्व के साथ उनकी कथित तनातनी को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि राहुल गांधी द्वारा कोच्चि के एक कार्यक्रम में उन्हें नजरअंदाज किए जाने और केरल के कुछ नेताओं द्वारा कथित तौर पर उन्हें हाशिये पर रखने से वे असहज हैं. हालांकि, थरूर ने इन अटकलों पर सीधे तौर पर टिप्पणी करने से बचते हुए अपने सिद्धांतों और राष्ट्रीय हित को ही अपनी प्राथमिकता बताया.
संतुलन और जिम्मेदारी का संदेश
शशि थरूर के बयान से यह साफ झलकता है कि वह पार्टी अनुशासन और व्यक्तिगत विचारों के बीच संतुलन बनाए रखना चाहते हैं. उनका संदेश यही है कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन देश की सुरक्षा और सम्मान के सवाल पर एकजुटता सबसे अहम है.
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