उज्जैन में मस्जिद के हिस्से को तोड़ने पर हंगामा:महिलाओं ने चक्काजाम किया, पुलिस आगे बढ़ी तो पत्थर फेंके; 12 PHOTOS
उज्जैन में शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने की कार्रवाई को लेकर सोमवार को हंगामा हो गया। महिलाओं ने चक्काजाम किया, जबकि कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव किया। भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे। इस दौरान क्राइम ब्रांच थाना प्रभारी पुष्पा पांचाल भी घायल हो गईं। इस पूरे घटनाक्रम को 12 फोटोज में समझें
सुप्रीम कोर्ट बोला- दिल्ली-NCR में गैंगरेप निर्भया कांड जैसे:पूछा- उस घटना से क्या सबक लिया; 4 अगस्त को चलती बस में नाबालिग से घटना हुई थी
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में पिछले कुछ दिनों में नाबालिगों से गैंगरेप के मामलों पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। कोर्ट ने आस्था कुंज पार्क, स्वरूप नगर और ग्रेटर नोएडा-दिल्ली बस में नाबालिग से गैंगरेप के मामले पर खुद से नोटिस लिया। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा कि इन घटनाओं को देखकर 2012 के निर्भया कांड की दर्दनाक घटना याद आती है। सवाल यह उठता है कि क्या उस घटना से कोई सबक लिया गया है। 2012 में दिल्ली में चलती बस में 23 साल की युवती के साथ गैंगरेप हुआ था। बाद में उसकी मौत हो गई थी। घटना के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे। कोर्ट ने पुलिस की गश्त और निगरानी पर सवाल सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाल की घटनाएं अलग-अलग सार्वजनिक जगहों पर हुई हैं। इनमें पार्क, सड़क और बस शामिल हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि पार्क, सड़क, बस, मेट्रो स्टेशन और सब-वे जैसे सार्वजनिक स्थानों को कम गश्त और निगरानी की कमी के कारण ‘ज्यादा जोखिम वाले क्षेत्र’ नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट के मुताबिक, लोगों को सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित माहौल मिलना जरूरी है। हिंसा से मुक्त होकर सम्मान के साथ जीने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाया। आस्था कुंज पार्क में हुई घटना के संदर्भ में कोर्ट ने कहा कि खबरों से सामने आया कि LSR कॉलेज की छात्राओं ने पहले भी सेक्सुअल हैरेसमेंट की घटनाओं की शिकायत की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन शिकायतों के बावजूद सुरक्षा की कमियों को दूर करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। कोर्ट ने बेहतर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में नाबालिगों और महिलाओं के खिलाफ हाल की यौन हिंसा के मामलों को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। कोर्ट ने इन घटनाओं को कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना है। कोर्ट की टिप्पणी का मुख्य सवाल यही है कि अगर पार्क, सड़क और सार्वजनिक परिवहन जैसी जगहों पर भी महिलाएं और बच्चे सुरक्षित नहीं हैं, तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस और प्रशासन की मौजूदा व्यवस्था कितनी प्रभावी है। पार्क, सड़क और बस में 3 घटनाएं हुईं 4 अगस्त: दिल्ली में 16 साल की नाबालिग से चलती बस में गैंगरेप। पीड़ित ग्रेटर नोएडा के परी चौक से बस में बैठी। आरोपियों ने उसे कश्मीरी गेट पर छोड़ा। इस दौरान बस करीब 47 किमी दौड़ती रही। बस के शीशों पर पर्दे लगे थे। 12 सितंबर: स्वरूप नगर में 16 साल की नाबालिग से गैंगरेप-हत्या। अगले दिन खेत के पास खुले मैदान में शव मिला। चार आरोपी गिरफ्तार हुए, जिनमें तीन नाबालिग हैं। 21 सितंबर: दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पास आस्था कुंज पार्क में 17 साल की नाबालिग अपने दोस्त के साथ बैठी थी। तीन युवकों ने फर्जी पुलिस वाले बनकर छात्रा से रेप किया। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
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