क्या दीवाली से पहले ही जारी हो जाएगी PM Kisan की 24वीं किस्त? तुरंत निपटा लें यह जरूरी काम
PM Kisan Yojana 24th Installment: देशभर के करोड़ों अन्नदाताओं के लिए केंद्र सरकार की तरफ से बहुत जल्द राहत भरी खबर सामने आ सकती है. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की अगली किस्त का इंतजार कर रहे किसानों के बैंक खातों में जल्द ही दो-दो हजार रुपये की सम्मान राशि भेजी जा सकती है.
त्योहारी सीजन की शुरुआत से पहले किसानों की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए यह मदद काफी अहम मानी जा रही है. हालांकि कृषि मंत्रालय की तरफ से तारीख को लेकर अभी कोई पक्की घोषणा नहीं की गई है, फिर भी चर्चा है कि अक्टूबर के महीने में केंद्र सरकार 24वीं किस्त का पैसा सीधे किसानों के बैंक खातों में डाल सकती है. सरकार की यह कोशिश रहती है कि बुवाई और त्योहारों के समय किसानों को नकदी की कमी का सामना न करना पड़े.
कब तक आ सकती है अगली किस्त
केंद्र सरकार साल भर में किसानों को तीन बार दो-दो हजार रुपये की आर्थिक मदद देती है. यह सहायता चार-चार महीने के अंतराल पर अप्रैल से जुलाई, अगस्त से नवंबर और दिसंबर से मार्च के बीच बांटी जाती है. इससे पहले 23वीं किस्त का पैसा जून के महीने में किसानों के खातों में भेजा गया था. उस समय सरकार ने करीब 18880 करोड़ रुपये की बड़ी रकम सीधे लाभार्थियों के खाते में जमा कराई थी.
अब तक इस जनकल्याणकारी योजना के माध्यम से सरकार 4.46 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की मदद देश के किसानों तक पहुंचा चुकी है. अब अगस्त से नवंबर वाली समय सीमा चल रही है, इसलिए पूरी उम्मीद है कि अक्टूबर के दौरान ही 24वीं किस्त का भुगतान किसानों के खाते में कर दिया जाएगा.
ई-केवाईसी करवाना क्यों है सबसे ज्यादा जरूरी
सरकार ने इस योजना में किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने और सिर्फ सही लाभार्थियों तक लाभ पहुंचाने के लिए ई-केवाईसी को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया है. अगर किसी किसान ने अभी तक अपनी ई-केवाईसी की प्रक्रिया को पूरा नहीं किया है, तो उनके बैंक खाते में आने वाली राशि रुक सकती है. इस काम को घर बैठे अपने फोन से भी पूरा किया जा सकता है. इसके लिए किसान का मोबाइल नंबर आधार के साथ जुड़ा होना बेहद आवश्यक है. किसान पीएम किसान के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर ई-केवाईसी का विकल्प चुन सकते हैं. वहां अपना आधार विवरण दर्ज करने के बाद फोन पर आए ओटीपी को सबमिट करके इस प्रक्रिया को आसानी से पूरा किया जा सकता है.
बायोमेट्रिक और चेहरा दिखाकर सत्यापन का आसान तरीका
जो किसान ऑनलाइन खुद से यह काम करने में असमर्थ हैं, वे अपने नजदीकी जनसेवा केंद्र यानी सीएससी पर जाकर बायोमेट्रिक तरीके से अंगूठे का निशान देकर ई-केवाईसी करवा सकते हैं. इसके अलावा सरकार ने मोबाइल ऐप के जरिए फेस ऑथेंटिकेशन यानी चेहरा दिखाकर सत्यापन की बेहद आधुनिक सुविधा भी दी है. इसके लिए किसान को अपने स्मार्टफोन में पीएम किसान ऐप डाउनलोड करना होता है. ऐप में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से लॉगिन करने के बाद लाभार्थी के पेज पर ई-केवाईसी का स्टेटस देखा जा सकता है. यदि वहां प्रक्रिया अधूरी दिखे, तो कैमरे के सामने चेहरा दिखाकर कुछ ही सेकंड में बिना ओटीपी और बिना फिंगरप्रिंट के भी सत्यापन पूरा हो जाता है.
लाभार्थी सूची में अपना नाम ऐसे करें चेक
किस्त का पैसा पाने के लिए यह भी देखना जरूरी है कि आपका नाम नई लाभार्थी सूची में शामिल है या नहीं. इसके लिए सबसे पहले पीएम किसान के आधिकारिक पोर्टल पर जाना होगा. वहां फार्मर्स कॉर्नर में जाकर बेनेफिशियरी लिस्ट के विकल्प को चुनना होता है. इसके बाद एक नया पेज खुलेगा, जहां किसान को अपने राज्य, जिले, तहसील, ब्लॉक और गांव की सही जानकारी चुननी होगी. यह विवरण भरने के बाद जैसे ही रिपोर्ट पर क्लिक करेंगे, पूरे गांव की सूची स्क्रीन पर आ जाएगी. यदि किसी किसान को अपना स्टेटस अलग से देखना है, तो वे पोर्टल पर नो योर स्टेटस वाले विकल्प में जाकर अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और कैप्चा कोड भरकर आसानी से चेक कर सकते हैं.
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UP Rajya Sabha Election: स्मृति ईरानी को फिर मिलेगी अहम जिम्मेदारी? यूपी से राज्यसभा भेजने की चर्चा, क्या है पूरा सियासी गणित?
UP Rajya Sabha Election: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू होने वाली है. खास बात यह है कि इसी के साथ संभावित उम्मीदवारों को लेकर सियासी हलचलें भी तेज हो गई हैं. इसी बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है. माना जा रहा है कि स्मृति ईरानी को एक बार फिर बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है.
सूत्रों की मानें तो पार्टी उन्हें यूपी के जरिए राज्यसभा भेजने का मन बना रही है. हालांकि अभी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी या घोषणा सामने नहीं आई है. लेकिन ये जान लेते हैं कि ये चुनाव क्यों काफी अहम माना जा रहा है?
स्मृति ईरानी 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से चुनाव हार गई थीं. इसके बाद वह केंद्र सरकार से बाहर हो गईं, लेकिन अगस्त 2026 में बीजेपी के नए राष्ट्रीय संगठन में उन्हें राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी दी गई. अब राज्यसभा चुनाव में उनका नाम सामने आसे से यह सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी उन्हें फिर से संसद के उच्च सदन मं भेजने की तैयारी कर रही है?
यूपी में 10 राज्यसभा सीटों पर क्यों है नजर?
यूपी से राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव 16 अक्टूबर को होना है. चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक,
29 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी, 6 अक्टूबर नामांकन की अंतिम तारीख होगी, 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे. मतदान 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा औऱ उसी दिन शाम 5 बजे से काउंटिंग होगी.
इन 10 सीटों में वर्तमान में आठ बीजेपी, एक समाजवादी पार्टी और एक बहुजन समाज पार्टी के पास है. इन सदस्यों का कार्यकाल नवंबर से समाप्त हो रहा है. एक सीट डॉ. दिनेश शर्मा के इस्तीपे के बाद पहले ही रिक्त हो चुकी है.
यानी चुनाव केवल खाली हो रही सीटों को भरने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इससे यूपी की विधानसभा में मौजूद दलों की संख्या के आधार पर राज्यसभा में पार्टियों का प्रतिनिधित्व भी तय होगा.
स्मृति ईरानी का नाम क्यों चर्चा में आया?
अब सबसे अहम सवाल आखिर स्मृति ईरानी का नाम क्यों चर्चा में आया? बता दें कि स्मृति ईरानी का नाम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह पहले केंद्र सरकार में मंत्री रह चुकी हैं और वर्तमान में बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन में खास भूमिका निभा रही हैं. अगस्त में घोषित बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है. यह नियुक्ति 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से हार के बाद पार्टी संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका की वापसी के रूप में देखी गई.
सितंबर में पार्टी ने उन्हें हरियाणा और छत्तीसगढ़ की संगठनात्म जिम्मेदारी भी दी. इसका मतलब है कि वह फिलहाल पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में सक्रिया भूमिका निभा रही हैं. ऐसे में उनका राज्यसभा जाना हुआ तो वह संगठनात्मक और संसदीय दोनों भूमिकाओं में नजर आ सकती हैं.
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि राज्यसभा उम्मीदवारों की अंतिम सूची गोषित होने तक स्मृति ईरानी का नाम केवल संभावित उम्मीदवार के तौर पर ही देखा जाना चाहिए.
भाजपा के सामने सिर्फ स्मृति ईरानी का नाम नहीं
हालांकि यूपी राज्यसभा को लेकर बीजेपी के अंदर कई नामों पर चर्चा की खबरें सामने आ रही हैं. सूत्रों की मानें तो पार्टी कुछ मौजूदा सदस्यों को दोबारा मौका देने के साथ कुछ सीट पर नए चेहरों के उतारने के विकल्प पर भी सोच रही है. इनमें केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा, पूर्व डीजीपी ब्रजलाल, गीता शाक्य और सीमा द्विवेदी जैसे नाम भी चर्चा में बताए गए हैं.
स्मृति ईरानी के अलावा कौन से नामों पर चर्चा
स्मृति ईरानी के अलावा हरीश द्विवेदी का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में सामने आया है. हरीश द्विवेदी को हाल में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी मिली है. यही कारण है कि अंति सूची में संगठन और सामाजिक प्रतिनिधित्व दोनों पहलुओं को ध्यान में रखे जाने की संभावना जताई जा रही है.
राज्यसभा चुनाव में कैसे होता है फैसला?
लोकसभा के विपरीत राज्यसभा के राज्यवार चुनाव में आम मतदाता सीधे वोट नहीं डालता है. राज्सभा के निर्वाचित सदस्य राज्य की विधानसभा के निर्वाचित विधायकों की ओर से चुने जाते हैं. चुनाव में आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली और सिंगल ट्रांसफरेबल वोट का इस्तेमाल होता है.
इसका मतलब है कि किसी प्रत्याशी की जीत के लिए विधानसभा में मौजूद दलों और गठबंधनों के पास पर्याप्त संख्या होना जरूरी है. उत्तर प्रदेश में मौजूदा विधानसभा की प्रभावी संख्या 397 बताई गई है और एक उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 37 प्रथम वरीयता वाले वोट चाहिए.
यही कारण है कि उम्मीदवारों के चयन के साथ-साथ पार्टियों की विधानसभा में संख्या भी इस चुनाव का महत्वपूर्ण पहलू है.
यूपी का मौजूदा राजनीतिक गणित
रिपोर्टों की मानें तो यूपी विधानसभा में बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या है, जबकि समाजवादी पार्टी भी दो प्रत्याशियों को राज्यसभा भेजने की स्थिति में है. मौजूदा संख्या के आधार पर बीजेपी के नेतृत्व वाला गठबंधन 8 सीट के लिए आवश्यक संख्या रखता है जबकि सपा के पास दो सीट के लिए संख्याबल है.
ऐसे में इस गणित में अन्य दलों के लिए अपनी मौजूदा राज्यसभा सीट बचाना मुश्किल हो सकता है. क्योंकि पार्टी के पास विधानसभा में पर्याप्त संख्या नहीं है. यही कारण है कि रामजी गौतम का कार्यकाल पूरा होने के बाद राज्यसभा से बसपा का प्रतिनिधित्व खत्म हो सकता है.
2027 विधानसभा चुनाव से पहले क्यों महत्वपूर्ण है चुनाव?
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल उम्मीदवारों के चयन में संगठन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और सामाजिक समीकरण जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दे रहे हैं. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी इस बार कुछ नए चेहरों को मौका देने और सामाजिक संतुलन
साधने पर विचार कर रही है.
वहीं स्मृति ईरानी का नाम भी इसी व्यापक चर्चा या फिर प्रक्रिया का हिस्सा है. उनके पक्ष में सबसे प्रमुख तथ्य उनका लंबा संसदीय और केंद्रीय मंत्री के रूप में अनुभव माना जा रहा है. हालांकि दूसरी ओर पार्टी के सामे अन्य वरिष्ठ और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाने का सवाल भी है.
क्या राज्यसभा के रास्ते फिर संसद पहुंचेंगी स्मृति?
इस सवाल का जवाब फिलहाल देना मुश्किल है. इसका जवाब आधिकारिक रूप से नहीं दिया जा सकता. उपलब्ध रिपोर्टों में स्मृति ईरानी को संभावित उम्मीदवार बताया गया है, लेकिन भाजपा ने अंतिम उम्मीदवारों की सूची जारी नहीं की है. पार्टी की प्रदेश इकाई से नामों का पैनल केंद्रीय स्तर पर भेजे जाने और उसके बाद अंतिम फैसला होने की प्रक्रिया बताई गई है.
ऐसे में आने वाले दिनों में 29 सितंबर से शुरू होने वाले नामांकन प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी होंगी. लेकिन असली तस्वीर 6 अक्टूबर तक साफ हो सकती है.
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों का चुनाव केवल उच्च सदन की खाली सीटें भरने की कवायद नहीं है. यह विधानसभा में मौजूदा संख्या, दलों के संगठनात्मक समीकरण और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले की राजनीतिक तैयारियों से भी जुड़ा हुआ है. स्मृति ईरानी का नाम इस पूरी प्रक्रिया में सामने आया प्रमुख नामों में से एक है, लेकिन अंतिम फैसला उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा.
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