Responsive Scrollable Menu

भारत को वीटो पावर बस मिलने ही वाला है! पाक घबराया, ट्रंप का मुंह उतर आया

भारत की लगातार बढ़ती ताकत से कई देश परेशान हैं। जिसमें आतंकी मुल्क पाकिस्तान, तुर्की, चीन और अमेरिका भी शामिल है। भारत के दुश्मनों को यह बात कतई हजम नहीं हो रही है कि बिना किसी शोरशराबा के भारत हर क्षेत्र में लगातार वो इतिहास रच रहा है जिसकी कल्पना खुद को महाशक्ति बताने वालों ने भी नहीं की थी। अब दुनिया भर में इस बात की खूब चर्चा हो रही है कि जल्द ही भारत को वीटो पावर मिलने के साथ ही यूएन में स्थाई मेंबरशिप मिलने वाली है। जिसके बाद भारत उन महाशक्तियों में शुमार हो जाएगा जो दुनिया भर के फैसलों में सीधे दखल देगा। यानी कि भारत की सहमति के बिना अब दुनिया भर में कई बड़े फैसले नहीं लिए जाएंगे। अब भारत के दुश्मन पाकिस्तान को भी यह पूरा आभास हो गया है कि जल्द भारत यूएन का स्थाई मेंबर बनने वाला है और वीटो पावर भी मिलने वाली है। जिसको लेकर पाकिस्तान बुरी तरह से घबराया हुआ है। 

इसे भी पढ़ें: क्या बिगड़ रही है सुपरपावर देश के राष्ट्रपति की हालत, ट्रंप के हाथ पर ये जख्म कैसा?

पाकिस्तान की घबराहट का आलम यह है कि अब वो यूएन में इसे लेकर खूब रोया है और अपने डर को जाहिर किया है। दरअसल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी यूएससी में सुधार और भारत की स्थाई मेंबरशिप के लिए बढ़ते सपोर्ट को देखकर पाकिस्तान बौखलाए हुए है। अब पाकिस्तान खुलकर इसके खिलाफ अपनी नापाक चाले चलने में जुट गया है। पाकिस्तान ने सुरक्षा परिषद में संभावित रूप से शामिल होने वाले देशों को वीटो पावर दिए जाने का विरोध किया है। इसके साथ ही उसने संयुक्त राष्ट्र के मंच से एक बार फिर सिंधु जल संधि को निलंबित करने का मुद्दा उठाया और भारत के इस कदम को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया। भारत ने पिछले साल पहलगाम में आतंकी हमले के बाद 23 अप्रैल को सिंधु जल संधि पर रोक लगा दी थी। इंटरनेशनल लॉ ईयर इन रिव्यू 2026 कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थाई प्रतिनिधि आसिमकार अहमद ने कहा कि कोई भी सुधार ऐसे नहीं होना चाहिए जो स्थाई सदस्यता और वीटो में निहित मौलिक दोषों को और खराब करेंगे।
यह सीधे तौर पर पाकिस्तान का भारत के लिए विरोध था। दरअसल भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी यूएससी में सुधार की मांग करता रहा है और जिसमें अपने लिए स्थाई संस्था की मांग शामिल है। भारत ने लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मौजूदा ढांचे पर सवाल उठाए हैं। भारत का कहना है कि यूएससी का मौजूदा ढांचा द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वाले शक्ति संतुलन पर आधारित है। जबकि दुनिया अब पूरी तरह से बदल चुकी है। भारत ने तर्क दिया है कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और दक्षिण एशिया का प्रमुख देश होने के नाते स्थाई सदस्यता उसे मिलनी चाहिए। 

इसे भी पढ़ें: मिडिल ईस्ट की फ्लाइट्स रद्द.. खामनेई को ट्रंप का सरप्राइज मिलने वाला है

दरअसल हाल ही में स्थाई सदस्यता के लिए ब्रिटेन रूस के बाद फ्रांस ने भी धमाकेदार तरीके से भारत का सपोर्ट किया था। फ्रांस ने कहा था कि वीटो पावर के साथ भारत को स्थाई मेंबरशिप मिलनी चाहिए। फ्रांस ने इसको लेकर यूएएससी रिफॉर्म की बैठक में भी बयान दिया था। इसके अलावा जो चीन भारत को वीटो पावर मिलने को लेकर हमेशा रोड़ा बनताया है। उसने भी हाल ही में यह साफ कर दिया था कि अगर भारत को वीटो पावर मिलती है तो उसे कोई आपत्ति नहीं है। अमेरिका भी भारत का इस मुद्दे पर खुला समर्थन कर चुका है। 

Continue reading on the app

एक ही सैनिक अकेले संभाल लेगा 200 ड्रोन, भविष्य के युद्धों में Drones के झुंडों से हमला करवा कर दुश्मन को चकरा देगा China

चीन की सेना ने आधुनिक युद्ध की दिशा में एक ऐसा कदम उठाया है जो आने वाले वर्षों में सैन्य संतुलन को पूरी तरह बदल सकता है। चीनी सेना ने दावा किया है कि कृत्रिम बुद्धि की मदद से अब एक ही सैनिक दो सौ से अधिक ड्रोन को एक साथ संचालित कर सकता है। यह सफलता चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की उस रणनीति को उजागर करती है जिसमें ड्रोन झुंड आधारित युद्ध को भविष्य का मुख्य हथियार माना जा रहा है।

चीन के सरकारी टीवी चैनल सीसीटीवी पर प्रसारित एक रक्षा कार्यक्रम में बताया गया कि यह तकनीक पीपुल्स लिबरेशन आर्मी से संबद्ध नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नॉलॉजी द्वारा विकसित की गई है। परीक्षणों के दौरान यह सामने आया कि एक ही ऑपरेटर कई वाहनों से एक साथ दो सौ से अधिक फिक्स्ड विंग ड्रोन लॉन्च कर सकता है और उन्हें नियंत्रित भी कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार ड्रोन झुंड युद्ध प्रणाली में कृत्रिम बुद्धि और डाटा लिंक का उपयोग कर बहुत कम समय में बड़ी संख्या में ड्रोन तैनात किए जाते हैं। ये ड्रोन आपस में तालमेल बनाकर उड़ान भरते हैं, अपने कार्यों को खुद बांटते हैं और एक साथ कई तरह के मिशन अंजाम देते हैं। इनमें निगरानी, दुश्मन को भ्रमित करना और सीधा हमला करना शामिल है।

इसे भी पढ़ें: Donald Trump की Canada को चेतावनी, कहा- बीजिंग एक साल में निगल जाएगा, पीएम मार्क कार्नी को बताया 'एहसानफरामोश'

रिपोर्टों के मुताबिक, परीक्षणों के दौरान ड्रोन को पहले व्यापक सिमुलेशन के जरिये प्रशिक्षित किया गया और फिर वास्तविक उड़ान परीक्षण हुए। इससे ड्रोन में स्वायत्त निर्णय लेने की क्षमता विकसित हुई। परीक्षण की तस्वीरों में देखा गया कि शोधकर्ता एक ही स्क्रीन पर दर्जनों ड्रोन की स्थिति पर नजर रखे हुए थे और ऑपरेशन के दौरान ड्रोन अपनी भूमिकाएं बदलते नजर आए।

विश्वविद्यालय के इंटेलिजेंट साइंस स्कूल के शोधकर्ता श्यांग श्याओजिया ने बताया कि हर ड्रोन में अपना अलग बुद्धिमान एल्गोरिदम लगा है। आपसी संपर्क और स्वायत्त समझौते के जरिये ये ड्रोन एक शक्तिशाली सामूहिक झुंड का रूप ले लेते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक हस्तक्षेप वाले माहौल में एंटी जैमिंग एल्गोरिदम का सफल परीक्षण किया गया। इस प्रणाली के कारण सिग्नल बाधित होने पर भी ड्रोन अपने रास्ते खुद तय कर सकते हैं और खोज अभियान जारी रख सकते हैं।

हांगकांग स्थित अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार नया कंट्रोल मॉड्यूल झुंड के भीतर सटीक समन्वय संभव बनाता है। इसमें अलग अलग ड्रोन को निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग, नकली लक्ष्य और सीधे हमले जैसे काम सौंपे जा सकते हैं।

देखा जाये तो चीनी सेना का यह दावा केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह एक खुली चेतावनी है कि भविष्य के युद्ध इंसान बनाम इंसान नहीं, बल्कि एल्गोरिदम बनाम एल्गोरिदम होंगे। एक सैनिक के हाथ में दो सौ ड्रोन का नियंत्रण सौंपना युद्ध की नैतिक और सामरिक सीमाओं को तोड़ देने जैसा है। यह तकनीक उस दौर की आहट है जहां संख्या और गति से ही जीत तय होगी। ड्रोन झुंड युद्ध का सबसे खतरनाक पहलू इसकी असमानता है। परंपरागत वायु रक्षा प्रणाली सीमित लक्ष्यों के लिए बनी होती है। जब एक साथ सैंकड़ों ड्रोन अलग अलग दिशाओं से हमला करें, तो किसी भी देश की रक्षा प्रणाली घुटनों पर आ सकती है। यह तकनीक दुश्मन के रडार, संचार और कमान तंत्र को कुछ ही मिनटों में पंगु बना सकती है।

सामरिक दृष्टि से देखें तो यह विकास एशिया प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को चीन के पक्ष में झुका सकता है। ताइवान, दक्षिण चीन सागर और भारत चीन सीमा जैसे संवेदनशील इलाकों में ड्रोन झुंड निर्णायक हथियार बन सकते हैं। बिना पायलट और बिना जान जोखिम में डाले किए गए हमले राजनीतिक नेतृत्व को युद्ध के फैसले लेने में और आक्रामक बना सकते हैं।

भारत के लिए यह खबर आंख खोलने वाली है। अभी तक ड्रोन को सहायक हथियार के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब वे मुख्य आक्रमणकारी भूमिका में आ रहे हैं। यदि समय रहते स्वदेशी कृत्रिम बुद्धि, ड्रोन झुंड और एंटी ड्रोन तकनीक पर निवेश नहीं हुआ, तो भविष्य में रणनीतिक बढ़त हाथ से निकल सकती है। यह भी ध्यान देने की बात है कि इस तरह की तकनीक युद्ध को सस्ता और अधिक विनाशकारी बना देती है। जब मशीनें खुद निर्णय लेने लगें, तो गलती की कीमत इंसान चुकाता है। चीन का यह कदम बताता है कि वह नैतिक बहसों से आगे निकल कर सीधे सैन्य प्रभुत्व की दौड़ में उतर चुका है।

बहरहाल, यह स्पष्ट है कि ड्रोन झुंड केवल हथियार नहीं, बल्कि युद्ध की सोच बदलने वाला औजार है। जो देश इसे सबसे पहले और सबसे बेहतर तरीके से अपनाएगा, वही भविष्य के युद्धक्षेत्र पर राज करेगा। चीन ने तो अपनी चाल चल दी है, अब देखना होगा कि दुनिया के और देश क्या करते हैं।

Continue reading on the app

  Sports

दंतेश्वरी मंदिर में चोरी का मामला, चोर ले गए सोने-चांदी के जेवरात, मंदिर फिलहाल बंद

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित प्रसिद्ध दंतेश्वरी मंदिर में चोरी की घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। मिली जानकारी के मुताबिक, अज्ञात चोर रात के समय मंदिर के पीछे के दरवाजे को तोड़कर अंदर घुसे और मंदिर में रखे सोने-चांदी के जेवरात चोरी कर फरार हो गए। सुबह मंदिर पहुंचने पर … Sat, 24 Jan 2026 13:14:15 GMT

  Videos
See all

Swami Ramdev: 'आपस में न लड़ें सनातनी, दुश्मन बहुत हैं' #viral #shorts #trending #ATShorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-01-24T08:10:00+00:00

Iran America War Update: ट्रंप की आर्मी फिर तैनात? भड़के ईरान का गुस्सा देखो! | Trump | Khamenei | #tmktech #vivo #v29pro
2026-01-24T08:15:02+00:00

Doda Snowfall : डोडा में भारी बर्फबारी | N18S | Top News | Jammu Kashmir | Trending News | #tmktech #vivo #v29pro
2026-01-24T08:12:55+00:00

KGMU परिसर से हटेंगी अवैध मजारें, प्रशासन ने दिया 15 दिन का अल्टीमेटम | Lucknow | Sudarshan News #tmktech #vivo #v29pro
2026-01-24T08:16:20+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers